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विवादित नामों की पैरवी में सपा ने कर दी मुसलमानों की उपेक्षा!

 Tahlka News |  2016-05-17 13:14:20.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. समाजवादी पार्टी से राज्य सभा भेजे जाने वाले नामों में कोई मुस्लिम नाम नहीं है। पार्टी के एक धड़े का कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने विवादित नामों को क्लियर करने के चक्कर में मुस्लिमों की उपेक्षा की है। वहीँ अमर और बेनी को पार्टी में वापस लाकर पार्टी विधान सभा चुनावों के पहले अपने जातीय समीकरणों को दुरुस्त करना चाह रही है।

मुस्लिम नाम कई आए , एक भी फाइनल नहीं हुआ

इस बार श्रममंत्री शहीद मंजूर, प्रावधिक शिक्षामंत्री फरीद महफूज किदवई का नाम आगे बढाया गया था। पार्टी के सूत्रों के अनुसार इस बात पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है कि जो भी मुस्लिम चेहरा आगे किया जाय वह आजम खान की तरह विवादित न रहे। वहीँ आजम खान यूपी के पूर्व राज्य पाल अजीज कुरैशी को पार्टी की तरफ से राज्यसभा भिजवाना चाह रहे थे। चर्चा यह भी थी कि पार्टी इस बार पूर्वांचल से एक मुस्लिम चेहरा राज्यसभा भेजना चाहती है। इसके लिए नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी का सपा में विलय कराने वाले अरशद खान के नाम पर विचार हुआ।


ओवैसी की आंधी रोकने के लिए आजम चाहते थे अपना चहेता

दरअसल, सपा में आज़म खान को यूपी में सपा का मुस्लिम चेहरा माना जाता है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी आज़म खान को बहुत तवज्जो देते हैं। सरकार में उनका कद दूसरे नम्बर पर माना जाता है। कई मामलों में आजम सूबे में सुपर सीएम की भूमिका में भी नज़र आते दिखे हैं। खुद को प्रदेश के मुसलमानों का सबसे बड़ा नेता समझने वाले आज़म खान ओवैसी की काबलियत और उनके हुनर को अच्छी तरह जानते है इसीलिए वे सपा में तो मुस्लिम नेताओं के कद को अपने से ऊंचा होने से रोकते रहे। अब पार्टी के इस फैसले के बाद आजम औवेसी को कैसे रोकेंगे? फिलहाल यह उनके लिए टेढ़ी खीर साबित होता दिख रहा है। वहीँ आजम खान की न चलने के पीछे अमर सिंह की सपा में वापसी को भी माना जा रहा है।

माता प्रसाद भी हुए लिस्ट से बाहर


लिस्ट आने से पहले चर्चा यह थी कि माता प्रसाद पाण्डेय को राज्य सभा भेजकर किसी मुस्लिम चेहरे को विधान सभा का अध्यक्ष के रूप में चुना जाएगा। लेकिन उनका भी नाम इस लिस्ट से बाहर है। जबकि माता प्रसाद पाण्डेय को इस लिस्ट से पहले एक बड़े ब्राहमण चेहरे के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट किए जाने की कवायद की जा रही थी। इसके पीछे कारण है कि राज्यसभा में पार्टी की ओर से छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र और बृजभूषण तिवारी के निधन के बाद कोई दिग्गज चेहरा राष्ट्रीय ब्राह्मण नेता के रूप में नहीं रहा है। खाटी समाजवादी और समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शुमार किये जाने वाले माता प्रसाद पाण्डेय लोकप्रिय नेता के नाते जाने जाते हैं। लेकिन माता प्रसाद कोई दरकिनार कर पार्टी ने कमलेश पाठक को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है।

संजय सेठ का नाम रहा है विवादित

राज्यसभा के लिए ही उम्मीदवार घोषित सपा सुप्रीमो के करीबी संजय सेठ का नाम उस समय सुर्खियों में आया था जब राज्यपाल राम नाईक ने विधान परिषद में उनके नाम पर मुहर लगाने मना कर दिया था।  गवर्नर की आपत्ति की वजह से ही संजय सेठ विधान परिषद के सदस्य नहीं बन सके। बीते साल सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव परिवार के करीबी बिल्डर संजय सेठ के एक साथ लखनऊ और मुंबई स्थित ठिकानों पर इनकम टैक्स, डाइरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटीलिजेंस और ईडी ने एक साथ छापा मारा था। लखनऊ के 14 ठिकानों पर बिल्डर संजय सेठ और उनके पार्टनर के घरों पर छापेमारी की कार्रवाई हुई है।

जून में होना है राज्यसभा के लिए चुनाव
यूपी में 11 राज्यसभा और 13 विधान परिषद सीटों के लिए दो सालों में होने वाला चुनाव जून में होगा। राज्यसभा पहुंचने के लिए किसी भी पार्टी के उम्मीदवार को 37 विधायकों का समर्थन चाहिए होगा। राज्यसभा की सीटें चार जुलाई को खाली हो जाएंगी।



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