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समाजवाद से ही होगा मजदूरों का भला

 Sabahat Vijeta |  2016-05-02 14:58:31.0


  • माया किसी मजदूर बस्ती में नहीं गई : शिवपाल सिंह यादव


shivpal yadavलखनऊ. अन्तर्राष्ट्रीय श्रम दिवस व मधु लिमये जयंती के उपलक्ष्य में 7 कालीदास स्थित सभागार में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए समाजवादी नेता व सपा के प्रदेश प्रभारी शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि श्रमिकों का सर्वतोन्मुखी हित लोहिया-लिमये द्वारा प्रतिपादित समाजवादी सिद्धांतों से ही संभव है। जिस देश में श्रमिकों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति खराब होती है, वह देश कभी भी विकास की अगली कतार में नहीं आ पाता।


श्री यादव ने कहा कि मोदी सरकार की नीतियाँ श्रमिक विरोधी हैं। यही कारण है कि भारत में औद्योगिक विकास उस गति से नहीं हो रहा है, जिस गति से होना चाहिए। मोदी वही गलती कर रहे हैं जो मनमोहन सरकार कर चुकी है। औद्योगिक नीति श्रम प्रधान होनी चाहिए। मायावती ने अपने शासन काल के दौरान कभी भी मजदूरों के लिए कोई भी रचनात्मक काम नहीं किया। वे कभी भी मजदूरों की बस्ती में नहीं गईं। उन्हें मजदूरों के पक्ष में बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है।


महान समाजवादी चिन्तक मधु लिमये को यादव करते हुए शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि लिमये ने भारतीय श्रमिक आन्दोलन व समाजवादी विचारधारा को नई दिशा दी। वे एक अध्ययनशील और मेधावी व्यक्तित्व थे जिन्होंने लोहिया की विचारधारा की व्याख्या की। वे लोहिया और हमारी पीढ़ी के समाजवादियों के मध्य के सेतु थे, जिनके योगदान को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता उन्होंने लोहिया के जाने के बाद गोवा मुक्ति संग्राम को आगे बढ़ाया और पुर्तगाल से आजाद कराकर ही दम लिया। वे संसोपा के संसदीय दल के नेता रहे और चरण सिंह सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद स्वयं मंत्री नहीं बने।


उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी मधु जी के साहित्य को पढ़े और विचारधारा का प्रचार-प्रसार करे। समाजवादी लेखक संध के अध्यक्ष व इण्टरनेशनल सोशलिस्ट काउंसिल के सचिव दीपक मिश्र ने कहा कि न केवल भारत अपितु दुनिया में समाजवादी विचारधारा के सशक्त व्याख्याताओं में लिमये जी का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने सोशलिस्ट इण्टरनेशनल के बेल्जियम अधिवेशन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए जो जो भाषण दिया था वह वैश्विक समाजवादी विचारधारा की अनमोल थाती है। उन्होंने बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर, सरदार पटेल और लोहिया समेत कई महापुरूषों पर हिन्दी, मराठी और अंग्रेजी में कई पुस्तकें लिखी हैं। मधु लिमये जितने बड़े लेखक थे उतने ही महान योद्धा थे। उन्होंने आजादी के दौरान स्वतंत्रता के लिए कई बार गिरफ्तारियाँ दी और आजादी के बाद आपातकाल का विरोध करते हुए लम्बा समय जेल में बिताया। मधु जी देश बुद्धिजीवियों और समाजवादियों के आदर्श थे।

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