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पलायन कैराना में नहीं गोधरा में हुआ: शिवपाल

 Girish Tiwari |  2016-06-18 12:19:30.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
फैजाबाद:
उत्‍तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने शनिवार को फैजाबाद में बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि कैराना में कोई पलायन नहींं हुआ है। शिवपाल ने कहा कि पलायन कैराना में नहीं बल्कि गोधरा में हुआ।

बता दें कि 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगी नंबर एस-6 आग लगने से 58 लोगों की मौत हो गई थी।

शिवपाल ने कहा कि  बीजपीे क्यों नहीं गोधरा से पलायन करने वालों को वापस लाती है।


शिवपाल यादव ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों को धोखा दिया है। बीजेपी की सरकार सिर्फ वादों की सरकार है। बीजेपी आज तक काला धन नहीं ला पायी। नदियों की सफाई के लिए करोड़ो की योजना लागू। लेकिन PM अपने संसदीय क्षेत्र में गंगा की सफाई नहीं करा पाए।

शिवपाल ने कहा कि यूपी में 2017 में सपा की पूर्ण बहुमत से सरकार बनेगी।

कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने कहा कि कैराना में हमने संतों का जांच दल भेजा है। संतों की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई करेंगे।

पढ़िए क्‍या है गोधराकांड 

दरअसल गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग आजाद हिन्दुस्तान के इतिहास पर काले धब्बे की तरह है। ट्रेन की उस कोच में लगी आग की आंच को पूरे गुजरात ने महसूस किया था। नफरत की आग में पूरा सूबा झुलस गया था। गोधरा में हुए उस कांड और उसके बाद इसकी जांच में कई अहम मोड़ आए।

27 फरवरी 2002 की सुबह 7 बजकर 43 मिनट पर अहमदाबाद जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस गोधरा स्टेशन पर थी, तय समय से घंटों लेट चल रही थी। गोधरा कांड की जांच करने वाली एजेंसियों के मुताबिक ट्रेन अहमदाबाद के लिए प्लेटफॉर्म से कुछ ही दूर आगे बढ़ी कि एस 6 बोगी आग की लपटों से घिर गई। इस हादसे में 58 लोगों की जान चली गई। मृतकों में 23 पुरुष, 15 महिलाएं और 20 बच्चे थे।

हादसे की चपेट में जो एस-6 कोच आया, उसमें कारसेवक सवार थे। इसलिए इसे हादसा की बजाय साजिश होने की आशंका जताई गई। मौके का मुआयना करने खुद मुख्यमंत्री गोधरा पहुंचे। साल 2002 में ही राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए नानावती आयोग का गठन कर दिया। नानावती आयोग ने 2008 में रिपोर्ट सरकार को सौंपी। कई गैर सरकारी संगठनों ने इस रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने पर रोक लगाने की मांग की। इस सिलसिले में गुजरात हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई। लेकिन हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया।

इस बीच यूपीए सरकार ने भी गोधरा कांड की जांच के लिए एक समिति बनाई। ये समिति साल 2004 में बनाई गई। समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस यूसी बनर्जी बनाए गए। इस समिति ने साल 2006 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।

इस बीच सरकार ने इस मामले की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने का फैसला किया। ये स्पेशल कोर्ट साबरमती जेल के अंदर ही बना। जून 2009 में स्पेशल कोर्ट में मुकदमा शुरू हुआ। मुकदमे के दौरान 253 गवाहों से पूछताछ की गई और गुजरात पुलिस ने कोर्ट के सामने 1500 से अधिक दस्तावेजी सबूत पेश किए। 94 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए। सितंबर 2010 में स्पेशल कोर्ट में ये सुनवाई पूरी हो गई।

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