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जुमलों वाली सरकार का नारा ‘‘कैशलेस’’ जनता ने नकारा : शिवपाल सिंह यादव

 Vikas Tiwari |  2016-12-11 12:54:49.0

shivpal yadav


तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने आज अधिकांश समय पार्टी कार्यालय में जनता की समस्याएं सुनने में बिताया। उन्होंने दूर-दराज से आई जनता की समस्याओं का ज्यादा से ज्यादा निराकरण का प्रयास किया। उन्होंने जनता व कार्यकर्ताओं के साथ चुटकी लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री देश की जनता को कैशलेस की ओर ले जाना चाहते हैं लेकिन उनकी बात को एटीएम एवं बैंकों ने ही गम्भीरता से लिया है। जनता ने तो उनकी बात को नकार ही दिया।


शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि जुमलों वाली पार्टी ने ‘‘ब्लैक मनी’’ के नारे की जगह अब नया नारा दिया है ‘‘कैशलेस’’। आपको पता है क्यों? क्योंकि अब तक करीब साढ़े तेरह लाख करोड़ के पुराने 500 और 1000 के नोट बैंकों में जमा हो चुके हैं और पूरी उम्मीद है कि 30 दिसम्बर की सीमा तक बाकी के डेढ़ लाख करोड़ भी बैंकों में जमा हो जायेंगे। कहने का तात्पर्य यह कि ‘‘ब्लैक मनी’’ 500 और 1000 के नोट में था ही नहीं।


शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि मोदी सरकार सोच रही थी कि जो नोट रिकवर नहीं होंगे उसे काला धन मान कर सरकार के प्रॉफिट में जोड़ देंगे और काला धन घोषित कर देंगे, उसका ये प्लान फेल हो गया। श्री यादव ने कहा कि नए नोट छपने का खर्चा करीब 1.28 लाख करोड़ तक जाएगा। मतलब खाया पिया कुछ नहीं और गिलास तोड़ा बारह आना। जैसे वित मंत्री कह ही चुके हैं कि ये समस्या शायद 3 महीने तक खिंचे। तो मतलब पहले 2-3 दिन की परेशानी बनी 50 दिन, लेकिन अब 50 दिन की जगह 3 महीने।


शिवपाल सिंह यादव के अनुसार एक्सपर्ट की राय माने तो पूरे नोट छपने में करीब 6 महीने लगेंगे और इकोनोमी रिकवर करने में सालों। लोगों की परेशानी, बीमारी, गरीबी, पैसे की कमी से बच्चे, बूढें, रोगियों का मरना, मजदूर, किराने वालों का नुकसान, वो सब तो खैर है ही। शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि मोदी सरकार समझ गयी है कि हमेशा की तरह ‘‘ब्लैक मनी’’ भी एक जुमला ही निकला और बहुत जल्द जनता भी यह समझ जायेगी इसीलिये तो नया जुमला फेंका गया ‘‘हो जाओ कैशलेस’’।


शिवपाल सिंह यादव ने सवाल उठाया कि किस किस्म का मजाक है ये! जिस देश में क्रेडिट कार्ड सिर्फ 2 प्रतिशत लोगों के पास है, खाते सिर्फ आधी जनसंख्या के पास है, अंग्रेजी सबकी भाषा नहीं है, जिन गाँवों में एटीएम तो क्या बैंक भी नहीं पहुंचे, आप उनसे कह रहे हो ‘‘हो जाओ कैश लेस’’। संवेदनहीनता की भी कोई सीमा होती है।


उन्होंने कहा कि करने वाले लोग पिछले 10 साल से कैशलेस हैं और इन्टरनेट बैंकिंग कर रहे हैं उन्हें प्रधानमंत्री की सलाह की जरुरत नहीं। लेकिन कैश को फ्रीज करके लोगों को मजबूर करके, आप लोगों को अपग्रेड नहीं बल्कि प्रताड़ित कर रहे हैं। लेकिन जैसा कि मैंने शुरू में कहा, शायद ‘‘ब्लैक मनी’’ का मुद्दा हाथ से जाने के बाद अब मोदी सरकार के पास ‘‘हो जाओ कैशलेस’’ नारा ही बचा। थोड़े दिनों में यह भी जुमला ही बन जायेगा।

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