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शिवपाल ने कहा मायावती के लिए अम्बेडकर सत्ता के साधन

 Sabahat Vijeta |  2016-04-13 17:17:00.0

shivpal-ambedkarलखनऊ, 13 अप्रैल. बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की जयंती की पूर्व संध्या के उपलक्ष्य में 7 कालिदास मार्ग स्थित सभागार में आयोजित संगोष्ठी के दौरान सपा के प्रदेश प्रभारी व प्रमुख प्रवक्ता शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी लेखक संघ व बौद्धिक सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक “लोहिया-अम्बेडकर व समाजवाद” का विमोचन करते हुए कहा कि बाबा साहब और राममनोहर लोहिया समाजवाद के प्रबल पैरोकार थे। दलितों व वंचित वर्ग की समस्याओं और समाधान के विषय में दोनों की सोच एक जैसी थी। दोनों मानवीय शोषण व विषमता को मिटाकर समतामूलक समाजवादी समाज की स्थापना करना चाहते थे।


लोहिया की समाजवादी अवधारणाओं पर जितना बहस हुआ या पढ़ा-लिखा गया उतनी चर्चा बाबा साहब के समाजवाद पर नही हुआ। इसके विपरीत बाबा साहब के दलित-विमर्श पर जितनी बातें हुई उतनी लोहिया के दलितोत्थान पर नही हुई है। बाबा साहब राज्य समाजवाद गहरी आस्था रखते थे। श्री यादव ने बताया कि 7 अगस्त1937 को अम्बेडकर की लेबर पार्टी के 20 सदस्यों का उच्चस्तरीय शिष्टमंडल महाराष्ट्र के तत्कालीन प्रधानमंत्री (तब मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहा जाता था।) से मिला और सिंचाई दर को आधा करने की मांग की। इस घटना के 17 साल बाद राममनोहर लोहिया ने नहर-रेट को घटाने के लिए सत्याग्रह की घोषणा की और गिरफ्तार हुए।


उनके समर्थन में छोटे-बड़े सभी समाजवादी घर से निकल पड़े, जेलो में जगह कम पड़ गई। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह की पहली गिरफ्तारी आब-पाशी इसी सत्याग्रह में हुई थी। मैं यह बात बचपन से सुनता था कि किसानों और किसानों की बेहतरी के लिए लोहिया व अम्बेडकर सिंचाई रेट कम कराना चाहते थे। जब उत्तर प्रदेश में पहली पूर्ण बहुमत की समाजवादी सरकार बनी और मुझे सिंचाई मंत्री का दायित्व मिला। मेरा पहला निर्णय हुआ कि किसानों को सिंचाई हेतु नहरों का पानी निःशुल्क कर दिया। हमारे पीढ़ी को जो बेहतर समाज और देश प्राप्त हुआ है, उसे बनाने में लोहिया व अम्बेडकर का अनिर्वचनीय योगदान है। लेकिन मुझे स्वीकारने में जरा भी हिचक नहीं कि अभी भी देश व समाज उस संस्थिति में नहीं है, जहाँ हमारे दोनो विभूतियाँ देखना चाहते थे।


उन्होंने कहा कि उनके अधूरे सपनों को पूरा करना हमारा दायित्व है। मायावती पर प्रहार करते हुए कहा कि बाबा साहब उनके लिए केवल सत्ता के साधन हैं। बाबा साहब के मिशन और विचारधारा से बसपा को कोई लेना-देना नही। जब से बसपा की लगाम मायावती के हाथ में आई है तब से एक भी पुस्तक का प्रकाशन बाबा साहब के नाम पर नही किया है। उन्होंने बाबा साहब के मिशन को काफी नुकसान पहुँचाया है।


दीपक मिश्र ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर और लोहिया जी वैचारिक रूप से सोशलिस्ट लैंडमार्क के लेखक प्रो. व लेबर पार्टी के नेता हैराल्ड लास्की के विचारों से अनुप्रेरित थे। बाबा साहब ने अपनी पार्टी का नाम इंग्लैण्ड़ की समाजवादी पार्टी लेबर पार्टी के नाम पर इंडिपेन्डेट लेबर पार्टी रखा था। दोनों अर्थशास्त्री और सम्पादक थे। संगोष्ठी में डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व समाज शास्त्री समाजशास्त्री प्रो. सत्यमित्र दूबे, लुआक्टा के अध्यक्ष डा. मनोज पाण्ड़ेय, डा. पंकज कुमार, यश भारती मधुकर त्रिवेदी, अग्रवाल सभा के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, अभय यादव समेत कई समाजवादी उपस्थित थे।

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