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जुलूस-ए-मदहे सहाबा की मांग को लेकर बड़े इमामबाड़े पर शियों ने किया प्रदर्शन

 Sabahat Vijeta |  2016-12-18 12:07:52.0

bada-imambadaतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. शिया मुसलमानों ने आज 17 रबीउलअव्वल को पैगम्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद साहब के जन्मदिन के मौके पर एतिहासिक आसिफ़ी इमामबाड़े से जुलूस-ए-मदहे सहाबा और जुलूस-ए-मोहम्मदी निकालने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया. तंजीम-ए-मिल्लत के तत्वावधान में हुए इस प्रदर्शन से पहले बड़े इमामबाड़े से जुलूस निकालने की कोशिश की गई लेकिन जिला और पुलिस प्रशासन ने इमामबाड़े के सभी गेट बंद कराकर इस जुलूस को इमामबाड़े से बाहर नहीं निकलने दिया. किसी आपात स्थिति से निबटने के लिए फायर ब्रिगेड और घुड़सवार पुलिस सहित सभी ज़रूरी सुरक्षा उपाय किये गये थे. प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित 10 सूत्रीय ज्ञापन दिया गया.


दूसरी ओर आल इण्डिया शिया यूथ फेडरेशन ने रौज़ा-ए-काजमैन में 17 रबीउलअव्वल के मौके पर महफ़िल का आयोजन किया और महफ़िल के बाद रौज़ा-ए-काजमैन परिसर में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला. पुलिस और प्रशासन ने इस जुलूस को भी रौज़ा-ए-काजमैन परिसर से बाहर नहीं आने दिया.


उल्लेखनीय है कि सुन्नी मुसलमान 12 रबीउलअव्वल को हज़रत मोहम्मद साहब का जन्मदिन मनाते हैं जबकि शिया मुसलमान 17 रबीउलअव्वल को मनाते हैं. 1977 में लखनऊ में हुए शिया-सुन्नी फसाद के बाद प्रशासन ने मुहर्रम के जुलूसों पर पाबंदी लगा दी थी. शिया मुसलमान अपने जुलूसों की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन करते रहे. 1997 में इस मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन बहुत उग्र हो गया और तीन शियों ने आत्मदाह कर लिया. आत्मदाह के बाद जिला प्रशासन और सरकार सक्रिय हुई और 1998 में शिया-सुन्नी समझौता कराया गया. इस समझौते के तहत शियों को 9 जुलूस मिले और सुन्नी मुसलमानों को जुलूस-ए-मदहे सहाबा दे दिया गया.


1998 से पहले जुलूस-ए-मदहे सहाबा की परम्परा न होने की वजह से शियों ने भी जुलूस-ए-मदहे सहाबा की मांग शुरू कर दी. सुन्नी मुसलमानों का एक पक्ष 12 रबीउलअव्वल को जुलूस-ए-मोहम्मदी की मांग करता रहा है. हर साल शाहमीना शाह की मज़ार से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकालने की कोशिश की जाती है. इसी तरह 17 रबीउलअव्वल को हर साल बड़े इमामबाड़े से शिया मुसलमान जुलूस निकालने की कोशिश करते हैं.


बड़े इमामबाड़े से जुलूस निकालने की कोशिश करने वाली तंजीम-ए-मिल्लत का इलज़ाम है कि उन्हें जुलूस न निकालने की इजाज़त देकर उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है. तंजीम का कहना है कि शियों के 953 जुलूस त्यौहार रजिस्टर में दर्ज हैं. इन जुलूसों में से कटौती कर सिर्फ 9 जुलूसों की इजाज़त दी गई और सुन्नी मुसलमानों को नया जुलूस दे दिया गया. तंजीम की मांग है कि शियों को भी हज़रत मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर जुलूस की इजाज़त दी जाये.

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