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यूपी चुनाव: सीएम अखिलेश की पत्नी डिंपल के गढ़ में लोकप्रिय हैं 'शीला'

 Abhishek Tripathi |  2016-07-15 03:02:34.0

sheila_dikshit_dimple_yadavतहलका न्यूज ब्यूरो
कन्नौज. कांग्रेस ने यूपी चुनाव के लिए अपना सीएम उम्मीदवार घोषित कर दिया है। दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित को कांग्रेस ने ये जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, शीला दीक्षित के नाम की घोषणा होते ही यूपी की इत्रनगरी कन्नौज में खुशी की लहर दौड़ गई। बता दें कि करीब 30 साल पहले शीला दीक्षित कन्नौज से सांसद रह चुकी हैं और वे यहां काफी लोकप्रिय भी रही हैं। इससे पहले कांग्रेस नेता के तौर पर राज बब्‍बर भी वर्ष 2009 में फिरोजाबाद सीट पर हुए उपचुनाव में यूपी के मौजूदा सीएम अखिलेश यादव की पत्‍नी और मुलायम की पुत्र वधू डिंपल यादव को हरा करारी शिकस्त दे चुके हैं।


वीआईपी जिला कन्नौज में कांग्रेस की शीला दीक्षित को अब तक सबसे अधिक विकास कार्य कराने वाली सांसद के रूप में याद किया जाता है। वह सन् 1984 में फर्रुखाबाद जिले की कन्नौज संसदीय सीट से कांग्रेस के बैनर तले चुनाव लड़ी थीं। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी व तत्कालीन सांसद छोटे सिंह यादव को 61 हजार 815 वोटों से शिकस्त दी थी। सांसद बनने के बाद शीला दीक्षित ने अपने क्षेत्र में कई विकास कार्य कराए। उन्होंने लाख-बहोसी पक्षी विहार का प्रस्ताव मंजूर कराया। कन्नौज नगर में अपने स्वर्गवासी पति विनोद दीक्षित की याद में एक सरकारी अस्पताल बनवाया। जीटी रोड किनारे पर्यटक आवास गृह का निर्माण भी कराया। इसके अलावा जिले में सड़कों का जाल बिछाने और ऊंचाई वाले स्थानों विश्वबैंक के जरिए कई सरकारी ट्यूबवेल लगवाने का काम भी किया। उनके काम की वजह से जिले वासी आज भी सबसे अधिक विकास कराने वाली सांसद के रूप में उन्हें जानते हैं।


हालांकि शीला दीक्षित ने 1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के प्रत्याशी छोटे सिंह यादव से हार गईं। छोटे सिंह ने उन्हें करीब 53 हजार 833 वोटों से हराया था। अपने संसदीय क्षेत्र से चुनाव हारने के बाद शीला दीक्षित ने दिल्ली में राजनीतिक पारी नए सिरे से शुरू कर दी और फिर वह दिल्ली की मुख्यमंत्री भी बनी।


उन्नाव की हैं बहू
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित उन्नाव के वरिष्ठ कांग्रेसी व केंद्रीय मंत्री रहे स्व. उमाशंकर दीक्षित की पुत्रवधू हैं। अपने ससुराल के पैतृक निवास नगर पंचायत ऊगू से दीक्षित का काफी लगाव है। स्व. उमाशंकर दीक्षित के इकलौते पुत्र स्व. विनोद दीक्षित से शीला की शादी हुई थी। विनोद दीक्षित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे। उत्तर प्रदेश में वह कई उच्च पदों पर रहे। दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने के पहले श्रीमती दीक्षित लगभग हर साल अपने ऊगू स्थित आवास पर ससुर स्व. उमाशंकर दीक्षित की जयंती मनाने 12 जनवरी को आतीं थी।


ससुर की थी यूपी कांग्रेस में अच्छी खासी दखल
स्व. उमाशंकर दीक्षित की गांधी परिवार से काफी घनिष्ठता थी। वह केंद्रीय गृहमंत्री रहे। इसके अलावा उन्होंने कई केद्रींय मंत्रालयों को संभाला। स्व. दीक्षित पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रहे । यूपी कांग्रेस में उनकी अच्छी खासी दखल भी थी। भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी से भी स्व. दीक्षित की निकटता थी। वर्ष 1991 में उमाशंकर दीक्षित की मृत्यु हो गई।


उन्नाव में तिवारी कांग्रेस से चुनाव हारीं
कांग्रेस से अलग होकर बनी तिवारी कांग्रेस (नारायण दत्त तिवारी का) से शीला दीक्षित उन्नाव में लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में लगभग 12 हजार वोट मिले थे। उस समय उन्नाव से भाजपा के देवी बक्श सिंह सांसद चुने गए थे।

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