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फोटोजर्नलिस्ट रवि कनौजिया की मौत पर क्या कहा फोटोग्राफी गुरु ने यंगस्टर्स से

 Tahlka News |  2016-05-11 07:15:15.0

s k yadav


तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ: वाटर ट्रेन की फोटो क्लिक करने के दौरान फोटोजर्नलिस्ट रवि कनौजिया की मौत पर जहाँ पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई, वहीँ एक ऐसी भी शख्सियत भी थी, जिसने अपने पर संयम रखते हुए एक अर्थपूर्ण सन्देश दिया। उन्होंने आज से करीब 26 साल पहले, अपने दोस्त और उस समय के मशहूर फोटोजर्नलिस्ट संजीव प्रेमी की ऐसे ही हालात में हुई मृत्यु को याद करते हुए युवा फोटोग्राफर्स को अमूल्य सुझाव दिए।


फोटोग्राफी गुरु एसके यादव ने किया आगाह
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के सेण्टर फॉर मीडिया स्टडीज में फोटोग्राफी पढ़ाने वाले मशहूर फोटोजर्नलिस्ट  एसके यादव ने अपने फेसबुक वाल पर tahlkanews.com की खबर शेयर करते हुए युवा फोटोग्राफेर्स को पेशेगत खतरों से आगाह किया है। साथ ही उन्होंने बहुमूल्य सुझाव भी दिए हैं ताकि फिर कोई युवा फोटोग्राफर मरहूम रवि की तरह अपनी जान लापरवाही में न गंवा बैठे।


पढ़िए क्या सलाह दी फोटोजर्नलिज्म गुरु ने:


शोक प्रकट करने से पहले दी चेतावनी
फोटोपत्रकारिता का एक टीचर होने के नाते "RIP', दुखद, या "श्रद्धांजलि " लिखकर शोक प्रकट करने से इतर यह पोस्ट चेतावनी के साथ शेयर कर रहा हूँ। इंडियन एक्सप्रेस के फोटोजर्नलिस्ट रवि कनोजिया की असामयिक मौत इस पेशे से जुड़े हर व्यक्ति के लिए दुख़दायी है। लेकिन मेरी जिज्ञासा मौत के कारणों को तलाशते हुए हताशा और निराशा का भाव पैदा करती है।


26 साल पहले दोस्त को भी इसी तरह खोया

आज से लगभग 26 साल पहले इसी तरह मेरे एक मित्र ,उत्तर प्रदेश के टॉप फोटोजर्नलिस्ट,टाइम्स ऑफ़ इंडिया-लखनऊ के संजीव प्रेमी की मौत तत्कालीन पीएम राजीव गांधी की भारत यात्रा कवरेज के दौरान कानपुर स्टेशन पर, स्वागत के लिए उमड़े अपार जनसमूह के बीच राजीव गांधी की वेहतर फोटो खींचने की धुन में, ट्रेन की छत पर चढ़ने से हो गयी थी।


जोश में होश तो नहीं खो रहे?
फोटोपत्रकारिता अत्यंत जोखिम भरा पेशा है,लेकिन इस तरह के जोखिम से कई सवाल खड़े होते हैं। इसे आप साहसिक कार्य की श्रेणी में रखेंगे या अतिउत्साह में उठाया गया अविवेकपूर्ण कदम! ऐसा तो नहीं हम जोश में होश खो बैठ रहे हैं!


जूनून के साथ जान भी बचाएं
यह दोनों फोटोपत्रकार बड़े अखबार के और अनुभवी लोग थे,फिर भी ऐसी बचकानी हरकत कर जान गँवा बैठे।बचकानी इसलिए की आये दिन ट्रेन की छत पर हाई वोल्टेज करेंट की जद में आकर मरने वालों की खबर हम अखबारो में पढ़ते रहते है और इसके जानलेवा होने की बात से सभी वाकिफ हैं। यह घटना हमें नसीहत देती है कि हमें काम के जूनून को बनाये रखते हुए अपनी जान की हिफाजत का भी सर्वोच्च ध्यान रखना होगा।


फोटोजर्नलिज्म शेरदिलों का प्रोफेशन
मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मीडिया और खासकर फोटोजर्नालिज्म के छात्रों को पढाई के दौरान प्रोफेशनलिज्म का पाठ पढ़ाते हुए बताता हूँ कि-अगर जान की परवाह ज्यादा है तो इस पेशे में न आयें। फोटोपत्रकारिता शेरदिल इंसानो के ही बस की बात है, इसमें पगपग पर जान का जोखिम है,सीमा पर मुश्तैद सेना के जवान से भी ज्यादा,अगर ईमानदारी से अंजाम दिया जाय तो। मेरी तरह हर जिम्मेदार फोटोपत्रकार एक महान फोटो खींचने के लिए अपनी जान की बाजी लगाना पसंद करेगा, बजाय इसके कि वो किसी ट्रक के पहिये के नीचे आकर या इस तरह के अन्य गैर पेशेवर कारणों के बीच गुमनामी में जान गँवा बैठे।


जान जाए भी तो मकसद पूरा कर, लोग नाज करें
आज दुनिया के संपन्न देशों में फोटोपत्रकारों को जोखिम के बीच सुरक्षित रहकर कैसे काम करें इसबात का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।युद्ध और आतंकवादी हिंसा के बीच फोटोपत्रकार मौत सामने देखकर भी पैर पीछे खींचने की बजाय,दुर्लभ और टॉप-एक्सक्लूसिव श्रेणी की तस्वीर खींचते हुए सहर्ष मौत को गले लगा रहे हैं। ऐसी मौत जिसपर उनके माता पिता भी नाज़ करें। जीवन कीमती है, जान जाये मगर पूरी कीमत वसूल कर,इतने सस्ते में तो बिलकुल नही।

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