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एस डी ऍम साहव खुद करेंगे अपनी जांच

 Tahlka News |  2016-04-19 17:53:02.0

download (8)तहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ, 19 अप्रैल. मामला नगर पंचायत जैथरा के तालाब प्रकरण से जुड़ा है। आरटीआई कार्यकर्ता वीरेंद्र कुमार ने तालाब प्रकरण की जांच में लापरवाही बरते जाने, आरोपियों को बचाने, जांच अधिकारी नामित होने के बाद भी स्थलीय जांच न करने आदि आरोप लगाते हुए जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से शासन में एसडीएम अलीगंज चन्दन कुमार पटेल की शिकायत की थी । प्रमुख सचिव नगर विकास उत्तर प्रदेश शासन ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए 4 अप्रैल को आदेश जारी कर जिलाधिकारी एटा से जांच आख्या का मांग ली। जिलाधिकारी एटा ने 8 अप्रैल को एडीएम वित्त को जांच सौंप दी| एडीएम ने शिकायत को गम्भीरता से न लेते हुए एसडीएम की जांच एसडीएम को ही सौंप दी। आरटीआई कार्यकर्ता को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने शासन में पुनः शिकायत कर जांच शासन अथवा गैर जनपदीय टीम से कराने की मांग की। मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण योजनायों में शामिल इस पोर्टल को जिले के जिम्मेदारों ने मजाक बना रखा है । पोर्टल पर दर्ज होने वाली शिकायतों का न तो गम्भीरतापूर्वक अवलोकन किया जा रहा है और न ही जांच हेतु सही अधिकारी के पास भेज रहा है।

बरती जा रही हद दर्जे की लापरवाही
एसडीएम के खिलाफ की गई एक शिकायत की जांच को एसडीएम के पास भेजे जाने पर लिपिकीय त्रुटि मान भी लिया जाता लेकिन यहां तो 6 शिकायतों की जांचें ही एसडीएम को सौंप दी गई हैं। सभी 6 शिकायतों में एसडीएम अलीगंज पर गम्भीर आरोप लगाए गए हैं। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने आरोपी को ही सौंप दी है। ऐसे में निष्पक्ष न्याय और आरोपियों पर कार्यवाही की उम्मीद किया जाना बेमानी साबित होगा। प्रमुख सचिव नगर विकास ने अपने आदेश दिनांक- 1, 8, 10 व 12 अप्रैल के आदेश में जिलाधिकारी एटा से जांच रिपोर्ट मांगी है। वहीँ जिलाधिकारी ने भी अपने आदेश दिनांक 11 अप्रैल में एसडीएम की जांच एसडीएम को सौंपी है।
तहसीलदार करेंगे एसडीएम की जांच

आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत की जांच पर प्रमुख सचिव ने निदेशक स्थानीय निकाय से जांच रिपोर्ट मांगी है। निदेशक ने डीएम एटा से रिपोर्ट तलब कर ली। इस शिकायत में भी एसडीएम की शिकायत की गई है। इस मामले में उस समय अजीबो-गरीब स्थिति सामने आई| जब एसडीएम की जांच उनकी ही तहसील के तहसीलदार को ही सौंप दी गई। एक कनिष्ठ अधिकारी अपने उच्चाधिकारी की जांच करेगा। यह जांच के नाम पर खुला मजाक किया जा रहा है। अब पूरे प्रकरण की शिकायत पुनः शासन में की गई है।

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