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संस्कृत कर्मकांड तक सीमित रही तो खुद को साबित नहीं कर पायेगी

 Sabahat Vijeta |  2016-09-14 14:29:27.0

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लखनऊ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ  के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा है कि हमारी संस्कृति संस्कृत और हिन्दी भाषाओं की है। स्वतन्त्रता के बाद देश में अनेक संस्थाएँ खुलीं। लोग पद्मभूषण और पद्मश्री भी हो रहे हैं, पर संस्कृत हार रही है। प्रो. पाठक ने कहा कि संस्कृत यदि कर्मकाण्ड तक ही सीमित रहेगी, तो यह कभी भी अपने को प्रमाणित नहीं कर सकेगी। संस्कृत को विज्ञान और तकनीक से जुड़कर अपने आपको विस्तार देना होगा। सीखने व सिखाने के सॉफ्टवेयर बनाने होंगे, ताकि न केवल संस्कृत पढ़ने वाले बल्कि सभी धाराओं के लोग चाहे वे वैज्ञानिक हों, चिकित्सक हों, विज्ञान व तकनीक के आचार्य हों, अधिकारी हों, सभी संस्कृत जान सकें, संस्कृत बोल सकें, संस्कृत में सोचना शुरू कर दें। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा प्रयास हुआ तो संस्कृत जीत सकती है।


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उन्होंने कहा कि इसके लिए तकनीक मदद कर सकती है। वह आज गोमती नगर स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में आयोजित प्रौद्योगिकी बाजारवाद विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे.


समारोह में उपस्थित संस्कृत के छात्रों का आह्वान करते हुए कुलपति ने कहा कि संस्कृत शास्त्रों में सीधे प्रवेश वाले और उनकी मीमांसा करने वाले तो अब बहुत ही कम रह गये हैं। जो इसमें सोचते हैं, वे कुछ कर सकते हैं। वे शास्त्रों को, उनके उच्चारण को, वेबसाइट पर डालें। जो वेदों में ज्ञान और विज्ञान को खोज सकते हैं, वे मन्थन करें। यद्यपि यह कार्य और कठिन है किन्तु उससे हमारी परम्परा की, संस्कृति की और संस्कृत की उपयोगिता प्रमाणित हो सकेगी।


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उन्होंने कहा कि पहले गुरुकुल परम्परा में पाठशालाएँ महत्त्वपूर्ण नहीं थीं, व्यक्ति या गुरु महत्त्वपूर्ण होते थे। उसके बाद विश्वविद्यालयों/ संस्थाओं का युग आया और आज पुनः सूचना प्रौद्योगिकी का युग है। इनमें पुनः व्यक्ति महत्त्वपूर्ण हो गया है। संस्कृत में ब्लागिंग हो, हम उसे होस्ट कर सकते हैं। उसे विस्तार देने में हम आपकी मदद को तैयार हैं। मगर जरूरत आपको अपनी उपयोगिता प्रमाणित करने की है। संस्कृत को तकनीक से जोड़ना होगा।


कार्यक्रम का शुभारम्भ, अतिथियों के वाग्देवी की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन, डॉ. नीरज तिवारी के वैदिक मंगलाचरण, शैलेश तिवारी के लौकिक मंगलाचरण से हुआ। छात्रों और छात्राओं अंकित, राजेन्द्र, अमृता, भव्या और भास्कर ने स्वागत गीत स्वागतं अभिनन्दनं पुनः स्वागतं अभिनन्दन प्रस्तुत किये। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय, आधुनिक विषय संकायाध्यक्ष ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।


कार्यक्रम का संचालन डॉ. एस. पी. सिंह ने व धन्यवाद.ज्ञापन डॉ. कविता बिसारिया ने किया।

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