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देशभक्ति के जज्बे को सलाम: "घर छोड़ रहे हैं लेकिन पाकिस्तान को सबक सिखा दो"

 Anurag Tiwari |  2016-10-07 09:10:14.0

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तहलका न्यूज ब्यूरो

श्रीनगर. सर्जिकल स्ट्राइक के मुद्दे पर भले ही पॉलिटिकल पार्टीज आपस में इल्जामों की झड़ी लगा रही हों, लेकिन इंडो-पाक बॉर्डर के गाँवों में रहने वालों की देशभक्ति का जज्बा उदाहरण बनता जा रहा है. सीमावर्ती गाँवों के लोग युद्ध की आशंका के चलते अपने घर छोड़कर कैम्पों में बसने को मजबूर हैं. लेकिन इन लोगों बने भारत सरकार से गुजारिश की है कि हम भले ही अपना घर छोड़ रहे हों, लेकिन पकिस्तान को सबक सिखाया जाना जरूरी है ताकि इसके बाद न तो वह किसी आतंकी वारदात को अंजाम दे और न ही सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन करने पाए


सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध की साह्नका के चलते जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा से सटे गांव वीरान हो रहे हैं, क्योंकि ग्रामीण सीमा पार से होने वाली गोलाबारी से बचने के लिए अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर जा रहे हैं. इलाके के घरों की दीवारों और दुकानों के शटर पर मोर्टार के निशान पाकिस्तान की बौखलाहट और नापाक हरकतों की गवाही दे रहे हैं. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पल्लनवाला पट्टी में एलओसी के पास के गांवों पंजटूट, चन्नी देवानो, मोगयाल लालो, सोमवा, चापरियाल, गिगरियाल, पल्टन, मिली दी खाए और जोडियन के लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर जा चुके हैं.

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अपना ठिकाना छोड़कर जा रहे गाँववालों में गजब का देशभक्ति का जज्बा देखने को मिल रहा है. उनका कहना है कि वे घर छोड़ चुके हैं अब सरकार पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दे. वे सेना और सरकार से अपील कर रहे हैं कि रोज-रोज की किचकिच से बेहतर है कि पाकिस्तान के साथ एक बार कायदे से आर-पार की लड़ाई हो ही जाए. वे चाहते हैं कि मोदी सरकार ने पकिस्तान के खिलाफ इस बार जो सख्त रुख अपनाया है, वह बरक़रार रखे ताकि नियंत्रण रेखा पर फिर से आतंकी हमले और संघर्ष विराम का उल्लंघन न होने पाए.

एलओसी के पास स्थित अपना गाँव छोड़ चुके सुरेश कुमार का कहना है कि गोलीबारी के दौरान और उसके बाद से तीन दिनों से बाजार बंद है. वे लोग अपने गांवों और मवेशियों को छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं. बॉर्डर के इलाकों में रहने वाले लोग नरेंद्र मोदी सरकार से चाहते हैं कि वह पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे.

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इसी तरह खौर के राधास्वामी आश्रम में बनाए गए शरणार्थी शिविर में में अपने परिवार के साथ रह रही सीता देवी ने अपना दर्द बयान करते हुए कहती हैं कि कोई जंग नहीं चाहता है लेकिन हम बॉर्डर के इलाके में रहने वाले लोग हैं जिन्हें हर साल सीजफायर  के उल्लंघन के दौरान अपने घर और गांव को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है. उन्होंने कहा कि अब गाँववाले चाहते हैं कि इस बार पाकिस्तान को ऐसा सिखाया जाए ताकि वह फिर से सीजफायर उल्लंघन करने की हिम्मत न कर सके.

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