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नमक की अफवाह पर श्रद्धालुओं को फटकार

 Sabahat Vijeta |  2016-11-12 13:29:26.0

shreemad-bhagvat


श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ राजाजीपुरम् : छठी संध्या


लखनऊ। श्रद्धापूर्वक ब्रज की रज को भी माथे से लगा लो तो भी गोविंद मुक्ति दे देते हैं। यह संदेश ई-ब्लॉक सत्संग पार्क राजाजीपुरम की व्यास पीठ से वृन्दावन के श्रीपुरुषोत्तम रामानुजाचार्यजी महाराज ने आज श्रीमद्भागवत कथा में शुकदेव के परीक्षित और नारद के युधिष्ठर को कथा सुनाने के प्रसंग विस्तार देते हुए भागवत प्रेमियों को दिया।


महत्तम राय सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में छठी शाम श्रीकृष्ण नन्दोत्सव मनाने से पहले कल फैली नमक मंहगा होने की अफवाह को लेकर श्रद्धालुओं को मीठी फटकार लगाते हुए रामानुजाचार्यजी महाराज ने कहा कि पता नहीं आप लोग कैसी-कैसी बातों में आ जाते हो! मेरे गोविन्द का हिन्दुस्तान तो नमक का भण्डार है। यहां तो तीन ओर गोविंद के समुद्र ही समुद्र हैं। यहां कैसे कम हो सकता है नमक!


उन्होंने कहा कि भगवान राम और कृष्ण के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि चाहे कितना भी बड़ा संकट हो, दुख हो, कष्ट हो उसका सामना मुस्कुराते हुए करना चाहिए। भगवान कृष्ण के जन्म के बाद से ही तमाम संकट आए, परी सबका सामना करते हुए उन्होंने मुस्कराते हुए किया। यह विचार महत्तम राय सेवा ट्रस्ट द्वारा राजाजीपुरम के सत्संग पार्क मे आयोजित कथा के छठे दिन कथा व्यास जी पुरूषोत्तम रामानुजाचार्य जी ने व्यक्त किया।


रामानुजाचार्य जी ने भगवान कृष्ण की बाल तीलाओं का सरस वर्णन करते हुए बताया कि कन्हैया ने ब्रज मे रहते हुए पांच बातों का विशेष ध्यान रखा। उन्होंने चरण-पादुका धारण नहीं की, वस्त्र नहीं पहने, बाल नहीं कटाये, मोर मुकुट धारण नहीं किया और न ही कोई अस्त्र-शस्त्र ग्रहण किया। सभी श्रद्धालुओं को भी किसी तीर्थ यात्रा में इन नियमों का पालन करना चाहिए।


ब्रज में चार प्रतीक आज भी भगवान कृष्ण के समय के ही हैं और यह अति पुनीत व पवित्र हैं। इनका वर्णन पूजन व स्पर्श समस्त कष्टों का हरण करने वाला है। व्यासजी बताया कि, गोपोश्वर महादेव, कात्यानी मंदिर यमुना जी और ब्रजराज भगवान के काल के ही हैं। उन्होंने कहा कि भक्ति ने मुक्ति का उपाय जब भगवान से पूछा तो उन्होंने यही कहा कि ब्रज की रज मस्तक से लगाने पर मुक्ति हो जाती है। ऋषि-मुनियों, देवताओं ने बारम्बार ब्रज रज की महिमा गायी है।


रामानुजाचार्य जी ने भगवान की बाल लीलाओं का बहुत ही रोचक वर्णन करते हुए शकटासुर, त्रृणावर्त, पूतना जैसे राक्षसों व यमलार्जुन का उद्धार भगवान कृष्ण का नामकरण संस्कार तथा गोकुल से वृन्दावन प्रस्थान व गोचारण की लीलाओं का सरस वर्णन किया। कथा में भगवान के गुरु आश्रम जाने की सुन्दर झांकी प्रस्तुत की गयी। कथा यजमान पूर्व सांसद कुसुम राय व राजेश राय ने आरती उतारी। सात नवम्बर से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन सोमवार 14 नवम्बर को होगा।

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