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साकार होने की राह पर है भारत-पाक महासंघ का सपना

 Sabahat Vijeta |  2016-08-16 15:04:25.0

rajnath sharma


तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. गांधीवादी विचारक और समाजवादी राजनाथ शर्मा भारत और पकिस्तान का महासंघ बनाने की दिशा में जोर-शोर से काम में लगे हैं. यह सपना सबसे पहले डॉ. राम मनोहर लोहिया ने देखा था. डॉ. राम मनोहर लोहिया और पंडित दीन दयाल उपाध्याय दोनों ही यह चाहते थे कि भारत और पाकिस्तान का महासंघ बने.


राजनाथ शर्मा इस दिशा में लम्बे समय से कोशिशें कर रहे हैं. इस मुद्दे पर विमर्श के लिए वह सेमिनार करते रहते हैं. सेमिनार में दोनों देशों के बुद्धिजीवी अपने विचार रखते रहे हैं.


दोनों देशों का महासंघ बनाने का विचार सबसे पहले डॉ. राम मनोहर लोहिया के दिमाग में आया था. पंडित दीनदयाल उपाध्याय को भी यह योजना बहुत पसंद आई. 1964 में दोनों नेताओं के हस्ताक्षर से संयुक्त विज्ञप्ति जारी की गई थी. वर्ष 1975 में इस मुद्दे पर संयुक्त सम्मलेन की बात भी तय हुई थी.  बाद में अटल बिहारी वाजपेई ने जनसंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी यह मुद्दा उठाने की बात कही थी लेकिन इसी बीच इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगा दी और मामला वहीं का वहीं ठहर गया.


दोनों देशों का महासंघ बने इसकी कोशिशें सेमिनार के ज़रिये जिन्दा रखने वाले भारत-पाक-बांग्लादेश महासंघ बनाओ सम्मलेन और गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा ने इन कोशिशों को आगे बढ़ाने की गरज से पकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को लिखे पत्र में इस बात पर खुशी ज़ाहिर की कि वह दीवाली के मौके पर पकिस्तान के कराची शहर में होने वाले समारोह में शामिल हुए.


rajnath-2इस पत्र में राजनाथ शर्मा ने नवाज़ शरीफ को बताया कि मैं डॉ. राम मनोहर लोहिया का मानने वाला हूँ. राम मनोहर लोहिया ने भारत-पाक बंटवारे के वक्त 1947 में ही दोनों देशों का महासंघ बनाने का प्रस्ताव रखा था. श्री शर्मा ने लिखा है कि मैं 1965 से लगातार इस मुहीम पर काम कर रहा हूँ. उन्होंने लिखा है कि जब परवेज़ मुशर्रफ पकिस्तान के राष्ट्रपति और अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री के बीच हिन्दुस्तान-पकिस्तान के रिश्तों को लेकर बातचीत हुई थी तब भी यह मुद्दा सामने आया था कि अगर भारत-पाक-बांग्लादेश का महासंघ बन जाए तो चीज़ें काफी हद तक ठीक हो सकती हैं.


राजनाथ शर्मा ने अपने पत्र में नवाज़ शरीफ को लिखा कि भारत-पाक-बांग्लादेश का महासंघ बनाने के मकसद से हमने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से लखनऊ और यहाँ से दिल्ली के राजघाट तक मार्च किया है. मार्च करने वाले मुंह पर पट्टी बांधे हुए थे. मार्च करने वालों ने दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र के दूतावास पर जाकर भी अपनी मंशा को लिखकर दिया था. उन्होंने नवाज़ शरीफ के सामने यह उम्मीद जताई कि वह भी इस मुहीम को अपना समर्थन देंगे.


rajnath-3इस पत्र के जवाब में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के प्रिंसपल स्टाफ आफिसर बैरिस्टर नबील अहमद अवान ने बताया कि आपका पत्र प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने पढ़ा है और आपकी मुहीम के लिए आपका शुक्रिया अदा किया है. नवाज़ शरीफ ने कहा है कि आप जैसे लोगों का भरपूर सहयोग रहेगा तो भारत और पकिस्तान के बीच अमन कायम करने से कोई रोक नहीं सकता है. उन्होंने लिखा कि पकिस्तान सरकार अपने देश के अल्पसंख्यकों के अधिकारों के प्रति पूरी तरह से संवेदनशील है.

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