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गाँव के तालाब को फिर जिन्दा करने में जुट गए हैं जलयोद्धा

 Tahlka News |  2016-05-19 10:35:25.0

तहलका न्यूज़ ब्यूरो 

गोरखपुर. जिले के हरिहरपुर गाव के लोगों ने सूखे से लड़ने के लिए अब खुद ही कमान सम्हाल ली है. जल्द ही आने वाले मानसून के लिए पानी बचने की दिशा में जुटे ग्रामीणों को आमी बचाओ मंच का भरपूर सहयोग मिल रहा है.

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आमी बचाओ मंच के संयोजक और जल युद्ध के नाम से मशहूर हो चुके विश्वविजय सिंह का कहना है कि  पोखरे के किनारे के भीटा (बैंक) को ठीक कराकर इसपर सघन वृक्षारोपण करना होगा. वर्तमान में पोखरे का तल लगभग 40000 स्कवायर फीट है जिसे 5 फीट गहरा करने पर लगभग 200000 धन फीट मिट्टी निकालना होगा और इसके लिए ग्रामीणों ने युद्व स्तर पर 15 दिनो के अंदर पूरा करने का संकल्प लिया है.


विश्वविजय सिंह ने बताया कि  आज हमारे अपील पर बडी संख्या मे लोगों ने अपने जीवन आधार को पानीदार बनाने हेतु श्रम दान के साथ पैसा अनाज के रुप मे आर्थिक दान भी किया जिससे हमारा उत्साह एवं मनोबल बढा है.

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ग्रामीणों का कहना है कि बचपन मे हम सबके जलक्रीडा के केंद्र रहे पोखरे को पुनः जलसंग्रहण हेतु खुदाई मे श्रमदान करना आनंद एवं गर्व का विषय है.  तालाब के पुनर्जीवन का यह काम यह मनरेगा या किसी भी सरकारी सहायता के बिना गांव समुदाय के लोगों द्वारा श्रम दान एवं आर्थिक दान से बनकर तैयार होगा.

विश्वविजय सिंह ने बताया कि तालाब पोखर कुए की घटती संख्या औद्योगिक एवं पूंजीपतियो  विल्डरो द्वारा बेहिसाब भूमिगत जल का दोहन करने एवं वर्षा जल का उचित प्रबंधन न होने के कारण पूर्वी उ प्र का यह पानीदार इलाका भी अब धीरे धीरे बुंदेलखंड की राह पर है।जहां पानी पहले 25-40फिट के नीचे उपलब्ध था अब 15 बर्षो के अंदर ही 100-150 से नीचे चला गया जलनिगम के अनुसार प्रथम स्तर का पानी अब समाप्त हो चूका है जो भविष्य के खतरनाक संकट का संकेत है।किंतु दुर्भाग्य से समय रहते कोई प्रयास सरकारों द्वारा नही किया जा रहा.

इस महा अभियान में  प्रधान प्रतिनिधि महेश मास्टर कबीर पीठ के संत डा हरिसरन दास शास्त्री नरायन सिंह विजय नंदन सिंह उदय राय राधाकांत पाण्डेय ऋषि केश पाण्डेय अवधेश पाण्डेय बजरंगी बेल्दार कोमल समेत बडी संख्या मे ग्रामीण महिलाओं पुरुषो ने श्रमदान किया.

जिले में सक्रिय आमी बचाओ मंच के तकनीकी सलाहकार सिचाई विभाग के अवकाश प्राप्त अधिशासी अभियंता शशि सिंह ने पुरे पोखरे की मापी कराकर पोखरे को तकनीकी रुप से जल संग्रहण हेतु तैयार करने का सुझाव दिया.

तालाब से करीब 5फीट गाद निकालना होगा और साथ ही साथ पोखरे की खुदाई के साथ इसमें बर्षा पानी आने के रास्ते की भी सफाई करनी होगी.

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