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मानवाधिकारों पर हुआ अन्तराष्ट्रीय सम्मलेन, लेखिका पूजा को मिला सम्मान

 Sabahat Vijeta |  2016-04-23 13:05:26.0

तहलका न्यूज़ ब्यूरो


poojaलखनऊ, 23 अप्रैल. राजधानी की इंटीग्रल यूनीवर्सिटी में आयोजित तीन दिवसीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं सम्मलेन में दुनिया के कई देशों में हो रही मानवाधिकार हनन की घटनाओं पर रौशनी पड़ रही है. सम्मलेन के दूसरे दिन आज भारत के कई राज्यों के अलावा अफगानिस्तान और नेपाल और बांग्लादेश के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मानवाधिकार हनन पर बात की.


सम्मलेन में भाग लेने आई मानवधिकार के मुद्दों पर लिखने वाली  लेखिका , स्तंभकार और दूरदर्शन की समाचार वाचिका  पूजा श्रीवास्तव को उनके मानवाधिकार सम्बंधित कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया.


इस सम्मलेन में पूजा श्रीवास्तव ने मानवाधिकार के हनन के मामलों में मीडिया की भूमिका पर अपना वक्तव्य भी दिया. उन्होंने कहा कि अधिकारों के प्रति सतत् जागरूकरता तभी बनी रह सकती है जब मीडिया अपनी भूमिका सार्थक ढंग से निभाए. वह मानवाधिकार के हनन को रोकने का अभियान चलाए. हमें यह मालूम है कि जो ताकतवर हैं वे अक्सर मानवाधिकार का हनन करते हैं. उनमें राज्यतंत्र तो है ही, लेकिन केवल वही नहीं हैं. मानवाधिकार का हनन वे भी करते हैं जो जेहादी हैं. जो आतंकवादी हैं. जो समाज पर अपनी मनमानी थोपना चाहते हैं. इस श्रेणी में संस्था, व्यक्ति और गैर सरकारी समूह भी आ जाते हैं.


पूजा श्रीवास्तव ने कहा कि मानवाधिकार का हनन वे भी करते हैं जो शोषण को पालते हैं. जो उसे चलाते और बढ़ाते हैं. लोकतांत्रिक समाज में स्वतंत्र मीडिया मानवाधिकार की रक्षा और संवर्द्धन का एक बहुत शक्तिशाली माध्यम बन सकता है. वह मानवाधिकार के हनन और दुरूपयोग को रोकने के लिए जनजागरण कर सकता है.

अफगानिस्तान से आये ग्रुप ने अपने देश की राजनीतिक स्थितियों पर चर्चा करने के साथ-साथ यह भी कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद महिलाओं की हालत ज्यादा खराब हुई.


नेपाल से आये ग्रुप ने भूकम्प के बाद की स्थितियों पर चर्चा की. भूकम्प के बाद दुनिया के तमाम देशों से जिस तरह से नेपाल को सहानुभूति और मदद मिली उसकी बात भी हुई.


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