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जन प्रतिनिधियों और जजों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ें

 Sabahat Vijeta |  2016-06-11 11:42:12.0

sandeep pandeyलखनऊ. उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल के 18 अगस्त, 2015 के फैसले जिसमें सरकारी वेतन पाने वाले जन प्रतिनिधियों व न्यायाधीशों के बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने का निर्देश दिया गया है. को लागू कराने के लिए अनिश्चितकालीन अनशन का आज छठा दिन है. इस आन्दोलन का समर्थन करने के लिए जदयू बिहार के पूर्व उपाध्यक्ष अनिल हेगड़े ने हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया.


सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के उपाध्यक्ष संदीप पाण्डेय ने बताया कि जब सोशलिस्ट पार्टी का प्रतिनिधिमण्डल 8 जून को मुख्य मंत्री से मिला था तो उन्हें यह सुझाव दिया गया था कि जिस तरह नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी को लागू कर गरीबों में लोकप्रियता हासिल कर ली है उसी तरह वह उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय के इस आदेश को लागू कर गरीबों के बीच लोकप्रियता हासिल कर सकते हैं, क्योंकि इस फैसले से सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की गुणवत्ता बढ़ेगी जिसका सीधा लाभ गरीब के बच्चों को मिलेगा.


उन्होंने कहा कि जिस तरह शराबबंदी को लागू करना बिहार के लिए एक कठिन फैसला था उसी तरह इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह फैसला लागू करना भी बहुत कठिन है, लेकिन जिस तरह बिहार सरकार ने अपना मन मजबूत कर जब शराबबंदी का फैसला लागू किया तो उसका लाभ जनता को मिला. इससे गरीब परिवारों में पैसे का दुरुपयोग बंद हुआ और शराब में बरबाद होने वाला पैसा अब परिवार की जरूरी चीजों पर खर्च होने लगा है. इससे परिवारों में खुशियाँ आई हैं. पंचायत चुनावों में शराब न बंटने के कारण उम्मीदवारों का चुनाव लड़ने का खर्च काफी कम हो गया.


उन्होंने कहा कि इसी तरह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को लागू करने से जब सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता सुधर जाएगी तो सभी लोग जब अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में भेजेंगे तो बच्चों की पढ़ाई पर खर्च काफी कम हो जाएगा. दूसरा फायदा यह होगा कि सभी बच्चे पढ़ने जा पाएंगे जो आज नहीं हो पा रहा.


संदीप पाण्डेय ने सवाल उठाया कि जब सरकार गुणवत्तापूर्ण केंद्रीय विद्यालय व नवोदय विद्यालय चला सकती है तो अच्छे प्राथमिक विद्यालय क्यों नहीं चला सकती. हम उत्तर प्रदेश की आईएएस अधिकारी मिनिस्ती की प्रशंसा करते हैं जो अन्य विकल्प होते हुए भी अपने बच्चों को केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ाती हैं.


पूर्व न्यायाधीश एवं नैतिक पार्टी के अध्यक्ष चंद्र भूषण पाण्डेय ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है और न्यायालय में इस संबंध में एक जन हित याचिका दायर करने का फैसला लिया है. समता मंच के के.के. त्रिपाठी भी अपने साथियों को लेकर अनशन स्थल पर पहुंचे.

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