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भारत की शान है रामपुर रज़ा लाईब्रेरी 

 Sabahat Vijeta |  2016-12-20 14:44:36.0

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने राजभवन में रामपुर रज़ा लाईब्रेरी, रामपुर द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में वर्ष 2014-15 के लिये स्वर्गीय प्रो. नबी हादी को नवाब फैजुल्लाह खाँ अवार्ड (फारसी भाषा और साहित्य की श्रेणी में) तथा प्रो. मोहम्मद सालिम किदवई को नवाब रज़ा अली खाँ अवार्ड (इस्लामिक स्टडीज की श्रेणी में) से सम्मानित किया। वर्ष 2015-16 के लिये प्रो. मोहम्मद सलाहउद्दीन उमरी को नवाब फैजुल्लाह खाँ अवार्ड (अरबी भाषा और साहित्य की श्रेणी में) तथा इस्लामिक बुक फाउंडेशन नई दिल्ली के फिरासत अली खाँ को उर्दू प्रकाशन के लिये मंशी नवल किशोर अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। स्वर्गीय प्रो. नबी हादी के पुत्र इकबाल हादी ने उनके स्थान पर सम्मान प्राप्त किया तथा प्रो. उमरी किन्हीं कारणों से उपस्थित नहीं हो सके थे इसलिए उनका अवार्ड प्रो. इक्तेदार ने प्राप्त किया। राज्यपाल द्वारा पुरस्कृत महानुभावों को एक लाख ग्यारह हजार रूपये की धनराशि, शाल तथा सम्मान पत्र दिया गया। राज्यपाल ने सभी सम्मान प्राप्तकर्ताओं को अपने द्वारा लिखित पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ की प्रति अपनी ओर से भेंट की। उल्लेखनीय है कि नवाब फैजुल्लाह खाँ अवार्ड एक वर्ष फारसी भाषा के लिये तथा दूसरे वर्ष अरबी भाषा के लिये दिया जाता है।


राज्यपाल ने इस अवसर पर रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की प्रशंसा करते हुये कहा कि 17वीं शताब्दी में स्थापित रामपुर रज़ा लाईब्रेरी केवल रामपुर या उत्तर प्रदेश की नहीं बल्कि उनका मानना है कि पूरे भारत की शान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने ईरान दौरे पर वहाँ के राष्ट्रपति हसन रूहानी को हज़रत अली के हाथ के लिखे कुरान शरीफ की प्रतिलिपि तथा सुमेर चंद द्वारा फारसी में अनुदित वाल्मीकी रामायण की प्रति भी भेंट की थी। उन्होंने कहा कि रामपुर रज़ा लाईब्रेरी की पुस्तकें हमारी संस्कृति की वाहक हैं।


श्री नाईक ने कहा कि शोध विद्यार्थियों के लिये रामपुर रज़ा लाईब्रेरी के पास पर्याप्त सामग्री है। शोध संस्थान के रूप में रामपुर रज़ा लाईब्रेरी में सुविधायें बढ़ायी जायेंगी। उन्होंने कहा कि सुविधायें बढे़ंगी तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लाईब्रेरी की मान्यता भी बढे़गी। रामपुर रज़ा लाईब्रेरी बोर्ड के सदस्य लाईब्रेरी के सुधार के लिये अपने बहुमूल्य सुझाव दें जिससे उसको व्यवहार में लाने का प्रयास किया जा सके। रामपुर रज़ा लाईब्रेरी के निदेशक के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के फारसी विभाग के प्रो. सैय्यद हसन अब्बास को रामपुर रज़ा लाईब्रेरी के निदेशक नियुक्त करने हेतु संस्तुति कर दी है, जिसकी अधिसूचना निकट भविष्य में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी की जायेगी। रामपुर रज़ा लाईब्रेरी को नयी ऊँचाईयों पर ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष सम्मान समारोह भव्य तरीके से आयोजित किया जायेगा।


रामपुर रज़ा लाईब्रेरी की निदेशक सुश्री दीपिका पोखरना ने लाईब्रेरी के इतिहास पर प्रकाश डालते हुये कहा कि रामपुर रज़ा लाईब्रेरी की स्थापना नवाब फैजुल्लाह खाँ द्वारा 1774 में की गयी थी। लाईब्रेरी में 17,000 से अधिक पाडुलिपियाँ तथा उर्दू, अरबी, फारसी, तुर्की, हिन्दी, संस्कृत, अवधि की लगभग 60,000 से अधिक पुस्तकें हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा लाईब्रेरी में अनेक दुर्लभ धरोहर भी हैं, जो वास्तव में देखने योग्य हैं।


सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में उर्दू, अरबी, फारसी के विद्वानों सहित राज्यपाल की प्रमुख सचिव सुश्री जूथिका पाटणकर, संयुक्त सचिव संस्कृति मंत्रालय पंकज राज विशेष रूप से उपस्थित थे।

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