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लोकार्पित हुई ‘सोचने की भारतीय दृष्टि’

 Vikas Tiwari |  2016-09-26 16:07:26.0

राम नाईक

तहलका न्यूज़ ब्यूरो 

लखनऊ.  सूबे के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि राष्ट्रीय एकता की दृष्टि से भारतीय राष्ट्रवाद का विचार पक्ष लगातार रखे जाने की आवश्यकता है। भारत को एक राष्ट्र न मानने वाली शक्तियां पराजित हो रही हैं। राष्ट्रवादी विचार लगातार रखा जाना चाहिए। आज यहां यूपी हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार में भाजपा नेता हृदयनारायण दीक्षित द्वारा लिखित ‘सोचने की भारतीय दृष्टि’ नामक पुस्तक का विमोचन करते हुए उन्होंने दीक्षित को राष्ट्रवादी विचारधारा रखने वाला प्रतिष्ठित लेखक बताया। उन्होंने कहा कि हर महीने लगभग दो दर्जन आलेख लिखना कठिन काम है। समकालीन घटनाओं के साथ ही वैचारिक सामग्री भी जोड़ना और भी कठिन है। दीक्षित ने वैदिक साहित्य से लेकर अद्यतन संदर्भो को जोड़ते हुए राष्ट्रभाव को मजबूती दी है। उन्होंने श्री दीक्षित को ज्ञान का संदर्भ ग्रंथ बताया।


पुस्तक की समीक्षा करते हुए हिन्दी के साहित्यकार डाॅ0 राम नरेश यादव ने कहा कि एक सुन्दर और प्रेमपूर्ण समाज बनाने के लिए लिखने वाले श्री दीक्षित ने दुनिया के सभी दर्शन और सभ्यताओं का अध्ययन किया है। लगातार इतिहासबोध जगाया है। उन्होंने सभी विचारधाराओं से सामग्री ली है और भारतीय राष्ट्रवाद का पक्ष मजबूती से रखा है। कार्ल माक्र्स, धु्रव माक्र्सवादी डाॅ0 रामविलास शर्मा आदि के विवेचन भी उनके लेखन में हैं तो डाॅ0 लोहिया, डाॅ0 अम्बेडकर और पं0 दीनदयाल उपाध्याय भी दीक्षित के लेखन का भाग हैं। श्री दीक्षित के प्रत्येक लेख व पुस्तक में ऋग्वेद से लेकर आधुनिक काल तक के संदर्भ होते हैं। इस तरह वे पांच हजार वर्ष जैसा जीवन जीने वाले निराले व्यक्ति हैं।


कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद लालजी टंडन ने दीक्षित के संगठन कर्म, लेखन और राजनीति की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उनका साहित्य, लेखन और स्तम्भ निरंतर पढ़े जाते हैं। सभी वक्ताओं ने ‘सोचने की भारतीय दृष्टि’ नामक पुस्तक के पढ़े जाने की अपील की।


पुस्तक के लेखक हृदयनारायण दीक्षित ने कहा कि हजारों वर्ष पहले से भारत में विचार विविधिता है। जैसे प्रकृति में अनेक रूप हैं, ऐसे ही यहां के राष्ट्रजीवन में अनेक धाराएं हैं। सारी धाराओं को मिलाकर सोचने की भारतीय दृष्टि बनती है। उन्होंने आधुनिक विचारक कांट का भी उल्लेख किया और कहा कि मूल विचार के जन्म के बारे में कांट भी असमंजस में थे लेकिन वैदिक ऋषि तमाम भिन्न विचार रखने के बावजूद सृष्टि की एकता और एक सत्य पर एक मत थे। कार्यक्रम का संचालन पवनपुत्र बादल ने किया।


कार्यक्रम के संयोजक दिलीप श्रीवास्तव, प्रकाशक नित्यानंद तिवारी तथा बृजेश सिंह आदि अनेक नेताओं ने राज्यपाल का स्वागत किया। इस अवसर पर डाॅ0 ओम प्रकाश पाण्डेय, महानगर अध्यक्ष मुकेश शर्मा, मान सिंह, राजीव मिश्रा, दिनेश तिवारी, त्रयम्बक तिवारी, कुमुद श्रीवास्तव, पुष्पेन्द्र सिंह एडवोकेट आदि लोग कार्यक्रम उपस्थित रहे।

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