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राजभवन में शाम-ए-अवध और सुबह बनारस का संगम

 Sabahat Vijeta |  2016-09-28 15:52:47.0

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राजभवन में आयोजित याद-ए-बिस्मिल्लाह में सोमा घोष ने दी प्रस्तुति

लखनऊ. राजभवन लखनऊ में आज संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के सौजन्य से ‘याद-ए-बिस्मिल्लाह‘ की कड़ी में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें पद्मश्री डाॅ. सोमा घोष ने अपना गायन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर राज्यपाल की पत्नी श्रीमती कुंदा नाईक, विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय, योजना आयोग के उपाध्यक्ष एन.सी. बाजपेई, प्रमुख सचिव राज्यपाल सुश्री जूथिका पाटणकर, सचिव संस्कृति विभाग हरिओम, स्वर्गीय बिस्मिल्लाह खां के पुत्र नाजिम व बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे। राज्यपाल ने बिस्मिल्लाह खां के चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा द्वीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।


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राज्यपाल ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि स्वर्गीय बिस्मिल्लाह खां को 2001 में भारत रत्न प्रदान किया गया। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और वे पेट्रोलियम मंत्री थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने विशेष तौर से बिस्मिल्लाह खां साहब की विशेषतायें बतायीं थी। आज अटल जी की याद आती है, यदि उनका स्वास्थ्य ठीक होता तो वे उनसे कार्यक्रम में आने का अवश्य आग्रह करते। राज्यपाल ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि पांच विशिष्ट महानुभावों (1) उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं बीजेडी के संस्थापक बीजू पटनायक (2) प्रख्यात गायिका सुब्बालक्ष्मी (3) रामकृष्ण वेदान्त मठ के संस्थापक स्वामी अभेदानन्द (4) प्रख्यात साहित्यकार अमृतलाल नागर तथा (5) शहनाई के बादशाह उस्ताद बिस्मिल्लाह खां पर विशेष आयोजन किये जाये। उन्होंने कहा कि आज की प्रस्तुति उसी की एक कड़ी है।


डाॅ. सोमा घोष ने अपनी प्रस्तुति ‘शहनाई को बिस्मिल्लाह ने गंगा की रवानी दी, भारत की बनी शान, बनारस को जवानी दी‘ से शुरूआत की। इसके पश्चात् उन्होंने अपनी मशहूर महफिली दादरा ‘हमरी अटरिया पे आओ रे संवरिया‘ प्रस्तुत किया, जिस पर लखनऊ की कलाकार सुश्री आयुषी वर्मा ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। डाॅ. सोमा घोष ने रंग हंसध्वनि में निबद्ध शिव तांडव (जटाधारी) और इसी राग में तराना भी गाया। महफिल में बेगम अख्तर की ग़ज़ल ‘ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया‘ श्रोताओं के लिए पेश की। उन्होंने मीना कुमारी की दो ऩज्में ‘मेरे महबूब जब दोपहर‘ तथा ‘रात सुनसान‘ प्रस्तुत करने के पश्चात् ‘गंगा द्वारे बधइया बाजे‘ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डाॅ. सोमा घोष ने अपनी अंतिम प्रस्तुति राम यमन विभिन्न बंदिशों के साथ गाकर दी। कार्यक्रम में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के जीवनवृत को भी प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाया गया।


कार्यक्रम में डाॅ. सोमा घोष का साथ पं. मोहन लाल त्यागी (शहनाई), पंकज मिश्र (हारमोनियम), कृष्ण मोहन (साइडन्डिम), डाॅ. जब्बार हुसैन (तबला) पर संगत कर रहे थे। कार्यक्रम का संचालन सुश्री प्रतिमा सिन्हा ने किया।

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