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मोदी सरकार में संघ जैसे कट्टरवादी संगठन क़ानून से ऊपर हो गये

 Sabahat Vijeta |  2016-07-15 16:17:33.0

mayavati


लखनऊ. बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गुजरात राज्य के ऊना जि़ले में ‘‘गोरक्षा‘‘ के नाम पर मरी हुयी गाय का चमड़ा उतारने वाले ग़रीब दलित समाज के लोगों के खि़लाफ बर्बर व अमानवीय व्यवहार करने की घटना की कड़ी निन्दा करते हुये कहा कि इस प्रकार की अनेक घटनाओं से बसपा का यह आरोप सही साबित होता है कि केन्द्र में भाजपा की वर्तमान सरकार बनने के बाद दलितों, पिछड़ों व धार्मिक अल्पसंख्यकों में से ख़ासकर मुस्लिम समाज के साथ भेदभाव, उनका शोषण और उत्पीड़न काफी ज़्यादा बढ़ गया है. धीरे-धीरे यह स्थिति भयावह रुप लेती जा रही है जो चिन्ताजनक है.


मायावती ने कहा कि केन्द्र की वर्तमान सरकार के आने के बाद आर.एस.एस. से जुड़े कट्टरवादी संगठनों के लोग अपने आपको संविधान व क़ानून से ऊपर मानकर काम करने लगे हैं. यही कारण है कि ख़ासकर भाजपा शासित राज्यों में वे लोग खुलेआम क़ानून को अपने हाथ में लेकर उन्माद व उपद्रव का वीभत्स प्रदर्शन करते रहते हैं और इसका शिकार ग़रीब निर्दोष दलित, पिछड़े व मुस्लिम समाज के लोग ख़ासतौर से बन रहे हैं. इनके खिलाफ बर्बर व्यवहार किया जा रहा है.


उन्होंने कहा कि चाहे स्कालर रोहित वेमूला की आत्महत्या का मामला हो या फिर हाल ही में गुजरात के ऊना जि़ले में घटित होने वाली घोर अमानवीय घटना हो, जिसने लोगों के दिल दहला दिये हैं, परन्तु झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र व हरियाणा आदि में खासकर ऐसी दर्दनाक घटनायें दलितों, पिछड़ों व मुस्लिम समाज के लोगों के खिलाफ लगातार घटित हो रही है और ऐसे लोगों पर सरकारी कार्रवाई ना के बराबर ही है.


उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं, भाजपा शासित मध्य प्रदेश में दलितों व आदिवासी समाज के लोगों के साथ भेदभाव, उनकी उपेक्षा व उनके हित व कल्याण की घोर उपेक्षा करने का मामला खुले तौर पर सामने आकर उसका विरोध हुआ है. वहाँ के एक वरिष्ठ आई.ए.एस. अफसर ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखकर इन मामलों में आपत्ति जताई है और अब उन्हें प्रताड़ित करने की तैयारी है, जैसा कि हैदराबाद के पी.एच. डी. स्कालर रोहित वेमूला के साथ किया गया.


मायावती ने कहा कि वास्तव में केन्द्र की भाजपा सरकार का ही पिछले दो वर्षों के कार्यकाल में ऐसा व्यवहार रहा है जिससे इस प्रकार के कट्टरवादी, जातिवादी, अराजक, साम्प्रदायिक तत्वों को काफी बढ़ावा मिला है फिर भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार का यह दावा कि वह दलितों, पिछड़ों व ग़रीबों आदि की हितैषी है, मात्र छलावा ही प्रतीत होता है. सरकार जो कहती है ज़मीन पर ठीक इसका उल्टा होता हुआ ही हर तरफ नजर आता है.

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