Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

सीटों के बंटवारे में उलझ गया है सपा-कांग्रेस का गठबंधन

 Tahlka News |  2016-12-09 09:38:55.0

rahul-mulayam-akhilesh

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. बीते दिनों जब यूपी के सीम अखिलेश यादव ने कहा की यदि सपा और कांग्रेस का गठबंधन हो जाता है तो हम 300 से ज्यादा सीटे जीत सकते हैं , तब से इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि 2017 के विधानसभा चुनावो में महागठबंधन के आकार लेने पर आपसी सहमति बन चुकी है मगर बीच बीच में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के तेवर इस संभावनाओं पर ग्रहण लगा देते हैं.

हाँलाकि इस बीच कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मुलायम सिंह से मुलाकाते भी हो रही हैं मगर अभी भी गठबंधन को ले कर संशय बना हुआ है. समाजवादी पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि समाजवादी पार्टी द्वारा कांग्रेस को की गयी सीटो की संख्या पर मामला फंसा हुआ है. सूत्र बताते हैं कि समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को 60 सीटो की पेशकश की है मगर कांग्रेस इस पर तैयार नहीं है.बात यही पर अटकी हुयी है. कांग्रेस कम से कम 100 सीटो पर लड़ना चाहती है. कांग्रेस को लगता है कि यदि सीटो की सम्मानजनक संख्या नहीं हुयी तो उसकी किरकिरी हो सकती है.


कांग्रेस इन सीटो में 2012 में जीती अपनी 28 सीटो पर तो दावा कर ही रही है साथ ही उन सीटो को भी मांग रही है जहाँ 2012 में वह समाजवादी पार्टी से आगे रही है. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पश्चिमी यूपी में समाजवादी पार्टी की हालत न तो 2012 में ठीक थी और न ही अभी बेहतर है. ऐसे में यदि कांग्रेस को वे सीटें सपा से देती है तो फिर पश्चिम यूपी से भाजपा का सुपडा साफ़ हो सकता है.

समाजवादी पार्टी के पश्चिमी यूपी से आने वाले नेता भी इस बात से सहमति जताते हैं की अगर कांग्रेस के साथ मिल कर लड़ा गया तो इस इलाके में भाजपा कही नहीं टिकेगी. अब गेंद मुलायम सिंह के पाले में है उनका फैसला ही अंतिम होना है ऐसा अखिलेश यादव भी कह चुके हैं.

समाजवादी पार्टी में मचे अन्दरुनी कलह के वक्त यह लग रहा था कि पार्टी लडखडाई हुयी है मगर उसके बाद नोट बंदी का फैसला हुआ और अब सपा को लग रहा है कि इससे परेशांन लोग भाजपा छोड़ कर वापस उसकी तरफ मुड रहे हैं. वही कांग्रेस को लगता है कि राहुल के यूपी में हुए दौरों के बाद भाजपा से ऊबे लोग उनकी तरफ आ रहे हैं और अगर सपा और कांग्रेस का गठबंधन हो गया तो पूरे सूबे के मुस्लिम वोटरों का संशय ख़त्म हो जायेगा और फिर बसपा भी कमजोर पड़ जायेगी. ऐसी स्थिति में नतीजे गठबंधन के पक्ष में ही रहेंगे.

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों की मुश्किल ये है कि वे मन से तो गठबंधन के पक्ष में हैं मगर खुद उन्ही के लिए मुलायम सिंह यादव के रुख का अंदाजा लगा पाना मुश्किल हो गया है. जिस तरह से पार्टी में अचानक फैसले लिए जा रहे हैं उसे अखिलेश समर्थक भी बहुत गौर से देख रहे हैं और मुलायम के पैतरे का इन्तजार कर रहे हैं.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top