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अर्जुन मिश्र को गुरु बिरजू, कुमुदिनी व शिष्यों की कथकांजलि

 Sabahat Vijeta |  2016-10-22 15:23:59.0

birju-maharaj


दो दिवसीय कथक समारोहः पहली शाम

आज मंच पर होंगे स्विटजरलैण्ड और श्रीलंका के नृत्य कलाकार


लखनऊ. विद्युत गति से मंच पर शास्त्रीय नृत्य कथक की प्रस्तुति देने वाले लखनऊ घराने के विख्यात गुरु अर्जुन मिश्र की पहली पुण्यतिथि पर उनके गुरु पद्मविभूषण बिरजू महाराज ने अपनी गुरु बहन पद्मभूषण कुमुदिनी लाखिया के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सीएमएस गोमतीनगर प्रेक्षागृह में कथक अकादमी, एएडीसी और कल्चरल क्वेस्ट के सौजन्य से गुरु अर्जुन मिश्र के शिष्यों के साथ ही स्विटजरलैण्ड, श्रीलंका व दिल्ली के कलाकारों की दर्शनीय नृत्य प्रस्तुतियों का दो दिवसीय कथक उत्सव आज से प्रारम्भ हो गया। कल यहां मंच पर स्विटजरलैण्ड और श्रीलंका के नृत्य कलाकार होंगे।


इस अवसर पर बिरजू महाराज ने भावुक माहौल में कहा कि अर्जुन मेरे प्रिय शिष्यों में थे। कथक करते समय उनका जोश और पद संचालन अद्भुत था। उन्होंने कहा कि मेरे अपने शहर में पूर्वजों की बिन्दादीन ड्योढ़ी तो संरक्षित होना संतुष्टि देता है किन्तु, मेरी इच्छा लम्बे समय से यहां दो एकड़ में कथक ग्राम की स्थापना की रही है और एक लम्बे अरसे से प्रदेश की विभिन्न सरकारों से हो रही बात के बावजूद अब तक अधूरी है। कथक गुरु कुमुदिनी लाखिया ने कहा कि अर्जुन मिश्र अभिनय में दक्ष जुनूनी कथक कलाकार थे और अभिनव काम करना उनकी सोच में शुमार था। इस अवसर पर अर्जुन मिश्र के भाई तबलानवाज नकुल मिश्र, कथक नृत्यांगना शास्वती सेन, प्रसिद्ध समीक्षक आशीष मोहन खोकर व मुख्य अतिथि पीएनबी प्रेरणा की प्रमुख श्रीमती शैल तिवारी ने दिवंगत कथक फनकार को श्रद्धांजलि अर्पित की।


समारोह की शुरुआत अकादमी और एएडीसी की गुरु को नमन करते हुए ‘गुरूर ब्रह्मा गुरूर विष्णु.....’ समूह कथक प्रस्तुति के संग सरगम से हुई। अर्जुन मिश्र के शिष्य व पुत्र अनुज मिश्र की एकल प्रस्तुति गीता उपदेश माध्यम सें पुरुष के विभिन्न रूपों का प्रदर्शन कथक मुद्राओं में किया। नृत्त पक्ष में तीन ताल विलम्बित लय में उपज, उठान से प्रारम्भ करते हुए आगे लखनऊ घराने की अप्रचलित बंदिशों को खूबी से दर्शाया। भाव पक्ष में ‘जब शंख भेरी ढोल आनन्द बज उठे....’के साथ ही भजन- ‘ऐसे राम हैं दुखहरन.....’ की मनोहारी प्रस्तुति दी। अलावा तालचक्र, झपताल, एक ताल, धमार और तीन ताल की पिता-पुत्र अर्जुन-अनुज मिश्र की कोरियाग्राफी में सजी समूह प्रस्तुतियों में टुकड़ों, तिहाइयों, परन और 33 चक्करों के प्रयोग ने दर्शकों की भरपूर सराहना पाई।


इन प्रस्तुतियों में सुरभि सिंह, कांतिका मिश्रा, नेहा सिंह, स्मृति मिश्र, अक्षरा के साथ ही ईशा रतन, मीशा रतन, प्रिया, राधिका, स्नेहा, श्रेया, प्रगति, सृष्टि, सलोनी, नीरज, अंकिता मिश्रा, शालिनी, एकता मिश्रा, आद्या, इशी, गरिमा, दिया, सृष्टि सेन, प्रिया, आस्था, सुकृति, आस्था, प्रगति सोनाली, जाह्नवी, कविशा, हिमाद्रि, शिवि, संगीता आदि मंच पर उतरे। ‘अष्टमंगल’ की मनोहारी पारम्परिक प्रस्तुति युगल रूप में अनुज-नेहा सिंह ने दी।


नृत्यांगना सुरभि सिंह टण्डन महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की कृति ‘राम की शक्तिपूजा’ को सुंदर कथक गतियों में ढालकर प्रस्तुत किया। इसके उपरांत गुरु शम्भू महाराज के पुत्र राममोहन महाराज ने अपनी एकल कथक प्रस्तुति की शुरुआत ‘जाकी महिमा है सुखदाई.....’ स्तुति से करते हुए कथक के शुद्ध पक्ष में थाट, आमद, उठान व गत निकास का प्रदर्शन किया। ठुमरी ‘हटो छेड़ो न कन्हाई....’ और गालिब की गज़ल ‘हजारो ख्वाहिशें ऐसी...’ की उनकी प्रस्तुति में अभिनय पक्ष का दर्शनीय रूप मंच पर कथक रसिकों के सामने आया।


करिश्मा व विजय अग्निहोत्री के संचालन में चले समारोह में संगीत पक्ष में तबले विकास मिश्र, नकुल मिश्र व नरेन्द्र, सारंगी पर विनोद मिश्र, गायन व हारमोनियम पर पं.धर्मनाथ मिश्र, सरोद पर हृदय देसाई, सितार पर नवीन मिश्र के साथ ही अन्य पक्षों में गोपाल सिन्हा, ज्योति किरन रतन के साथ ही आइसीसीआर, संस्कृति मंत्रालय, पीएनबी, बीबीडी व सिनर्जी आदि का सहयोग रहा।


दूसरी शाम कल 23 अक्टूबर को कल सीएमएस गोमतीनगर सभागार में कांतिका मिश्रा, संयुक्ता सिन्हा, नेहा सिंह, मनीषा मिश्रा, पूजा पंत, कल्चरल क्वेस्ट और श्रीलंका की नृत्यांगना रौशानी, हंसा व वेरोनिका के संग स्विटजरलैण्ड की कथक नृत्यांगना फेनी के एकल कथक की दर्शनीय प्रस्तुतियां होंगी। अतिथियों के रूप में महाप्रबंधक पंजाब नेशनल बैंक अरविंद तिवारी के साथ अभिनेता सुरेन्द्र पाल व कथक गुरु कुमुदिनी लाखिया आमंत्रित हैं।

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