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डिमोशन के बाद भी  बन गए निदेशक, RES में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय ताक पर

 2016-05-28 11:00:03.0


  • पहले पदोन्नति में आरक्षण पाकर निदेशक बने उमाशंकर को डिमोशन के बाद फिर से निदेशक का कार्य भार दिए जाने पर उठने लगे हैं सवाल


RES

तहलका न्यूज ब्यूरो

लखनऊ. पदोन्नति में आरक्षण पर आये सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पदावनत हुए अफसरों ने फिर से महत्वपूर्ण वरिष्ठ पदों पर तैनाती के रस्ते निकलने शुरू कर दिए हैं. ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में निदेशक का कार्यभार सम्हालने वाले उमाशंकर की तैनाती तो कुछ इसी तरफ इशारा कर रही है.

वर्तमान में विभाग के निदेश पद पर पुनः तैनात किए गए उमाशंकर की नियुक्ति पर विवाद उठने शुरू हो गए हैं. दरअसल पदोन्नति में आरक्षण एवं परिणामी ज्येष्ठता का लाभ न दिए जाने सम्बन्धी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक 27 अप्रैल 2012 के परिप्रेक्ष में उत्तर प्रदेश शासन के कार्मिक विभाग के शासनादेश संख्या 8/4/1/2000 tc-1–क -2/2015 दिनांक 21 अगस्त 2015 द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक नीति निर्धारित की गयी और उस नीति के अनुसार कारवाही करते हुए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग उत्तर प्रदेश शासन के कार्यालय ज्ञाप संख्या १०९/२०१५/३९३१/९२-1-२०१५-५८(अधि)/2015 दिनांक 9 सितम्बर 2015 द्वारा तत्कालीन निदेशक एवं मुख्य अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को पदोन्नति में प्राप्त आरक्षण का लाभ समाप्त कर अधीक्षण अभयन्ता के पद पर पदावनत कर दिया था.

पदोन्नति के बाद उमाशंकर अधीक्षण अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग परिमंडल फैजाबाद बनाये गए मगर उमाशंकर ने ज्वाइन नहीं किया और अवकाश पर चले गए और स्वयं को फिर से पुनः स्थापित करने के लिए जुगाड़ में लग गये.

इस प्रयास में उन्हें सफलता भी मिली जब विभाग के मंत्री की सिफारिश पर कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) जिनके पास विभाग के प्रमुख सचिव का भी कार्यभार था, के दिनांक 16 मई 2016 को किये गए आदेश के बाद दिनांक 17 मई 2016 को निदेशक का कार्यभार assume कराने का प्रमाण पत्र लेकर उमाशंकर निदेशालय पहुंच गए और दिनांक 18 मई को राम प्रकाश सिंह जो उस वक्त निदेशक के प्रभार में थे अवकाश लेकर विदेश यात्रा पर निकल गए.

राम प्रकाश सिंह के अचानक विदेश जाने के बाद से ग्रामीण अभियंत्रण विभाग सहित सरकार के दुसरे विभागों में अब इसी तरह की नियुक्तियाँ पाने का गणित शुरू हो गया है.

यहाँ यह भी जान लेना आवश्यक है कि सीनियरिटी लिस्ट में उमाशंकर कई अधीक्षण अभियंताओं से नीचे हैं. ऐसे में उन्हें किस आधार पर निदेश का कार्यभार सौंपा गया इस प्रश्न को सुलझाने में विभाग के लोग लगे हुए हैं. यह भी सवाल किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के उक्त आदेश के अनुसार पदोन्नति में आरक्षण का लाभ लेने वाले अधिकारी को डिमोट करने के बाद किसी तरह का अतिरिक्त प्रभार नहीं दिया जा सकता तो बिना आरक्षण का लाभ लिए ये मुख्य अभियंता अथवा निदेशक का चार्ज बिना ऐसा हुए कैसे ले सकते हैं.

इस पूरे मामले के चर्चित होने की एक वजह यह भी बयाती जा रही है कि सर्वोच्च न्यायलय और शासन की निति के अनुसार पूर्व प्रमुख सचिव प्रभात कुमार के कार्यकाल में उमाशंकर की पदावनति सम्बन्धी आदेश का क्या हुआ ? क्या इसे ख़ारिज कर दिया गया है या इस मामले में कोई अन्य रास्ता शासन ने निकाला है ? फिलहाल चार्ज सर्टिफिकेट में उल्लिखित शासनादेश की प्रति सार्वजनिक नहीं की गयी.

विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस विवादित निर्णय के पीछे विभाग में जल्द ही होने वाले प्रमोशन का मामला भी कही न कही शामिल है जिसके लिए तमाम लोग कुछ भी करने के लिए तैयार हैं.

बहरहाल , उमाशंकर की तैनाती ने दूसरे विभागों के जुगाडू अधिकारीयों के लिए नयी नजीर बना दी है.

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