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कैदियों ने किया गोरखपुर जेल पर क़ब्ज़ा

 Vikas Tiwari |  2016-10-13 17:08:19.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. गोरखपुर की जिला जेल में कैदियों और बंदी रक्षकों का विवाद आज तूल पकड़ गया. कैदियों ने बंदीरक्षकों को बंधक बना लिया और जेल की बैरक की दीवार पर चढ़कर जेल पर पूरी तरह से क़ब्ज़ा जमा लिया. गोरखपुर जेल में पिछले चार दिन से चल रहा विवाद आज हद से ज्यादा बढ़ गया. स्थितियां इतनी विस्फोटक हो गईं कि एसएसपी रामलाल वर्मा को जेल में पुलिस बल भेजना पड़ा.


गोरखपुर जेल के कैदी पिछले कई दिन से जेलर आर.के.सिंह के खिलाफ अभियान चला रहे हैं. बताया जाता है कि कैदी जेल में हुई तलाशी की वजह से नाराज़ हैं. जेल में कैदियों की तलाशी में कई कैदियों के पास मोबाईल फोन बरामद हुए थे. कैदियों की आज बंदीरक्षकों से भिडंत हो गई तो कैदियों ने बंदीरक्षकों को पीट दिया और उन्हें बंधक बना लिया. तीन बंदीरक्षक बुरी तरह से घायल हो गए. तीनों बंदीरक्षकों को मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया है. एक बंदी रक्षक की हालत गंभीर बनी हुई है.


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कैदियों के बवाल को देखते हुए जेल प्रशासन ने जेल की बिजली काट दी. जेल में चल रही गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन की मदद ली गई. ड्रोन के जरिए उन जगहों को चिन्हित किया गया जहाँ कैदी बवाल कर रहे थे. बैरक की छतों पर चढ़े बंदियों ने डीएम-एसएसपी ने बात की तो कैदियों ने कहा कि जेलर डॉ राजेश सिंह को सस्पेंड कर दो नीचे आ जायेंगे. यह सुनकर जेल में तैनात सिपाहियों ने जेलर राजेश सिंह के पक्ष में आते हुए ऐलान कर दिया कि डॉ. राजेश सिंह को सस्पेंड करने से पहले सभी सिपाहियों को सस्पेंड करें. बंदियों ने जिन दो सिपाहियों जनार्दन मिश्र और जयप्रताप सिंह को अपने कब्जे में लिया है उन्हें अब तक छोड़ा नहीं है. जेल में इस समय लगभग 1600 कैदी और 160 बंदी रक्षक हैं.


इसके पहले कैदियों ने जेल की रसोई में रखे गैस सिलेंडर कब्जे में ले लिए और विस्फोट की धमकी देने लगे. बंदियों के उग्र रुख को देखते हुए जेल प्रशासन ने बड़ी संख्या में पीएसी व पुलिस फोर्स मौके पर बुला ली.


पुलिस आने के बाद नाराज कैदियों बंदियों ने बैरक नम्बर एक के पास जमा कूड़े में आग लगा दी और गेट नम्बर 3 बन्द कर छत पर चढ़ कर मोर्चेबंदी कर ली. बन्दियों के ऐसे तेवर देख जेलर डॉक्टर राजेश सिंह ने जेल इमरजेंसी अलार्म बजा सारे बन्दी रक्षकों को तलब कर लिया और साथ ही प्रशासन से मदद मांगी.


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बवाल की जानकारी मिलने पर अवकाश पर लखनऊ गए जेल अधीक्षक एसके शर्मा दोपहर लगभग एक बजे जेल पहुंचे और अफसरों से कहा कि वह मामला शांत करा देंगे. उन्होंने कहा कि कैदी उन्हें देवता मानते हैं. यह कहते हुए वह अकेले ही अंदर चले गए और उन्होंने कैदियों को समझाया. कैदी उनकी बात मान भी गए, लेकिन उन्होंने कहा कि जब तक डीएम-एसएसपी यहां से पूरी फोर्स लेकर हट नहीं जाते तब तक वह दोनों बंदी रक्षकों को नहीं छोड़ेंगे. इस पर डीएम व एसएसपी मय फोर्स लौट गए. बवाल शांत हो गया.


बताया जाता है कि जेल अधीक्षक की इस पहल के बाद भी जब बंदी रक्षक नहीं छोड़े गए तो जेल के बंदी रक्षकों ने जेल अधीकह्स्क के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उनका आरोप है कि जेल अधीक्षक के लचर रवैये की वजह से ही कैदी आए दिन बवाल करते हैं. एसएसपी रामलाल वर्मा और डीएम संध्या तिवारी का कहना है कि कैदी खाने की गुणवत्ता और दुर्व्यवहार को लेकर नाराज़ हैं.


बताया जाता है कि बुधवार की रात जेल की बैरकों में हुई तलाशी में बंदियों के पास से 85 मोबाइल फोन मिले थे. कल दिन में भी 89 मोबाइल फोन बरामद हुए. सुबह से ही जेल के अंदर कैदी के मरने की अफवाहें हवा में तैर रही थी. पुलिस का कहना है कि जेल के भीतर किसी कैदी की मौत नहीं हुई.

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