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"प्रधानमंत्री इतने नजदीक होकर, भी इतने दूर हैं"

 Vikas Tiwari |  2016-08-10 13:29:49.0

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नई दिल्ली. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कश्मीर घाटी में एक महीने से भी ज्यादा समय से जारी हिंसा और तनाव की स्थिति के बारे में संसद में न बोलने को लेकर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निंदा की। आजाद ने साथ ही वहां की समस्याएं सुलझाने के लिए सरकार से भारत के 'अभिन्न अंग' के लोगों के दिलों और दिमागों को जोड़ने का आग्रह किया।


आजाद ने राज्यसभा में कश्मीर में जारी हिंसा पर चर्चा शुरू की। हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी के आठ जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद से कश्मीर में जारी हिंसा और तनाव के एक महीने से भी ज्यादा समय के बाद इस मुद्दे पर बहस शुरू हुई है।


विपक्ष के नेता ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सदन से गैर-मौजूदगी की भी निंदा की। आजाद ने कहा, "प्रधानमंत्री इतने नजदीक होकर, भी इतने दूर हैं।"


आजाद ने कहा, "प्रधानमंत्री हर रोज सुबह 10 बजे संसद परिसर पहुंचते हैं और शाम छह बजे तक रहते हैं। उनका कमरा राज्यसभा से महज डेढ़ मिनट की दूरी पर है।" कांग्रेस नेता ने कश्मीर मुद्दे पर संसद की जगह मध्यप्रदेश की एक रैली में बोलने को लेकर भी मोदी पर निशाना साधा।


आजाद ने कहा, "हम हमेशा कहते हैं कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। लेकिन अभिन्न हिस्सा केवल कागज पर ही नहीं होना चाहिए। दिलों और दिमागों को जोड़ा जाना चाहिए।" आजाद ने कहा, "कश्मीर में 30 दिनों से ज्यादा समय से कर्फ्यू है। कई लोग मारे जा चुके हैं और हजारों घायल हुए हैं।"


उन्होंने कहा, "अगर अफ्रीका में कुछ होता है तो आप (मोदी) ट्वीेट करते हैं। पाकिस्तान दुश्मन देश है, फिर भी अगर वहां कुछ होता है तो आप बोलते हैं। लेकिन भारत का ताज (कश्मीर) धधक रहा है। आपने भी दिल में न सही, दिमाग में जरूर इसकी तपिश महसूस की होगी।"


आजाद ने कहा, "कश्मीर एक गंभीर मुद्दा है। राजनीति पहले आती है, अर्थशास्त्र दूसरे स्थान पर और रोजगार उसके बाद। अगर हम बिजली, सड़क और पानी के बारे में प्रत्यक्ष रूप से बात करते हैं और राजनीति के बारे में नहीं, तो यह गलत होगा।"


राज्य से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद शमशेर सिंह मन्हास ने चर्चा में शामिल होते हुए इस बात पर हैरानी जताई कि सभी कश्मीर के बारे में बात कर रहे हैं, जम्मू के बारे में नहीं। मन्हास ने कहा, "जम्मू एवं कश्मीर, केवल कश्मीर नहीं है। यह राज्य जम्मू, कश्मीर और लद्दाख से मिलकर बना है।"


उन्होंने कहा कि जम्मू की भी अपनी समस्याएं हैं, जिसका करीब 500 किलोमीटर इलाका पाकिस्तान सीमा से सटा है। उन्होंने कहा, "राज्य की 55 प्रतिशत आबादी इस क्षेत्र में रहती है। करीब सात लाख शिक्षित युवा कार्यरत हैं। वे भी बंदूक उठा सकते थे। वे भी आजादी के नारे लगा सकते थे।"


मन्हास ने कहा, "जम्मू के लोग लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं। लेकिन कश्मीर घाटी में राष्ट्रीयता और अलगाववाद के बीच लड़ाई है। कश्मीर के लोग अलगाववादियों के फरमान मान रहे हैं।"

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