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 राष्ट्रपति ने किया राज्यपाल राम नाईक की पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ का लोकार्पण 

 Sabahat Vijeta |  2016-11-09 13:28:29.0

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक की पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू एवं गुजराती संस्करणों का लोकार्पण आज राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन, केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और सांसद शरद पवार की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।


लोकार्पण के बाद पुस्तक की प्रथम प्रति राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा भेंट की गयी। लोकार्पण समारोह में गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा, दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग, गुजरात के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली, पंजाब के राज्यपाल वी.पी. सिंह बंडोर और आसाम के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, केंद्रीय मानव संसाधव विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर, केंद्रीय रेलमंत्री सुरेश प्रभु, केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पियूष गोयल, जनता दल(यू) से राज्यसभा सांसद शरद यादव, पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश अम्मार रिज़वी सहित अन्य राजनैतिक दलों के लोग भी उपस्थित थे।


राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पुस्तक की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ जीवन में आगे बढ़ने का संदेश देती है। राष्ट्रपति ने राज्यपाल नाईक के संसदीय जीवन की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्यपाल के रूप में भी उनके सुझाव अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक होते हैं। श्री नाईक ने राज्य विधान मण्डल सहित अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर उनका ध्यान आकृष्ट किया है, जिससे गृह मंत्रालय से समन्वय करके शीघ्र निर्णय किये जा सकें।


उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने श्री नाईक की कार्य पद्धति की तारीफ करते हुए कहा कि श्री नाईक धैर्य और संकल्प के धनी व्यक्ति हैं। उन्होंने पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके सामाजिक कार्य दूसरों के लिए प्रेरणा पुंज साबित होंगे।


लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने श्री नाईक की प्रशंसा करते हुए कहा कि लम्बे सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन में उनकी छवि बेदाग रही। संसद में उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। विशेष तौर से महिला आरक्षण बिल हेतु गठित संसदीय समिति के सदस्य के रूप में उनके साथ काम करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि श्री नाईक द्वारा जनता के समक्ष अपना वार्षिक कार्यवृत्त प्रस्तुत करना जवाबदेही और पारदर्शिता के मद्देनजर एक अच्छा उदाहरण है, जिसे कई सांसदों ने भी अपनाया है।


केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि श्री नाईक एक आदर्श कार्यकर्ता, आदर्श सांसद, आदर्श मंत्री रहें हैं और अब वे एक आदर्श राज्यपाल हैं। उन्होंने कहा कि श्री नाईक इन सबके ऊपर एक आदर्श इंसान भी है। हमें ऐसे व्यक्तित्व का अनुसरण करना चाहिए।


राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद शरद पवार ने श्री नाईक को एक जझारू व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवन के अनेक उतार-चढ़ाव को सफलता से जिया हैं।

राज्यपाल राम नाईक ने अपनी पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे एक छोटे से गाँव से निकलकर आज वे उत्तर प्रदेश जैसे बडे़ प्रदेश की राज्यपाल हैं। राज्यपाल ने अपने संस्मरण संग्रह के बारे में बताते हुए संसद में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गाये जाने, सांसद निधि की शुरूआत, दिल्ली और मुंबई में सीएनजी, मुंबई का नामकरण एवं महिला सशक्तिकरण हेतु उनके प्रयास आदि पर भी संक्षिप्त प्रकाश डाला।


पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ का हिंदी अनुवाद श्रीमती कुमुद संघवी चावरे द्वारा किया गया है, जिसकी प्रस्तावना गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने लिखी है। हिन्दी संस्करण सचित्र 268 पृष्ठों का है। संस्मरण संग्रह का अंग्रेजी अनुवाद दिलीप चावरे द्वारा किया गया है और प्रस्तावना केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पियूष गोयल द्वारा लिखी गयी है। अंग्रेजी संस्करण 344 पृष्ठों का है। पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के हिंदी एवं अंग्रेजी संस्करण का प्रकाशन ‘प्रभात प्रकाशन’ नई दिल्ली द्वारा किया गया है।


पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ का उर्दू अनुवाद लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष डाॅ. अब्बास रज़ा नैय्यर द्वारा तथा प्रस्तावना उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डाॅ. अम्मार रिज़वी ने लिखी है। 344 पृष्ठों के रंगीन उर्दू संस्करण का प्रकाशन लखनऊ के गुटेनबर्ग प्रकाशन द्वारा किया गया है।


संस्मरण संग्रह का गुजराती अनुवाद श्रीमती नीलाबेन सोनी द्वारा किया गया है तथा प्रस्तावना जय वसावडा द्वारा लिखी गयी है। गुजराती संस्करण में पृष्ठों की संख्या 260 है तथा प्रकाशन एन.एम. ठक्करनी कंपनी, मुंबई द्वारा किया गया है। कार्यक्रम का संचालन राज्यसभा सदस्य विनय सहस्रबुध्दे ने किया।

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