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केन्द्र सरकार की जन विरोधी ऊर्जा नीति के ज़बरदस्त विरोध की तैयारी

 Sabahat Vijeta |  2016-07-25 15:43:04.0

electric power lines


लखनऊ. केन्द्र सरकार की जन विरोधी ऊर्जा नीति और इलेक्ट्रीसिटी (अमेंडमेंट) बिल के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने देशव्यापी अभियान चलाने का फैसला किया है. इसी के तहत आगामी 2 सितम्बर की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन किया गया है.


बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रीसिटी इम्प्लॉईस एण्ड इंजीनियर्स (एन सी सी ओ ई ई ई) की कल दिल्ली में हुई बैठक में 2 सितम्बर को हो रही राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन करने के साथ यह फैसला भी लिया गया कि केन्द्र सरकार की आम जन विरोधी ऊर्जा नीति और निजी घरानों के मुनाफे के लिए लाये जा रहे इलेक्ट्रीसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2014 की सच्चाई से आम लोगों को अवगत कराने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जायेगा.


अभियान के अन्तर्गत बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के प्रान्त और जिला स्तर के सम्मेलन आयोजित किये जाएँगे तथा जनजागरण अभियान चलाया जायेगा. बैठक में आल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन , आल इण्डिया फेडरेशन ऑफ़ पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स, आल इण्डिया फेडरेशन ऑफ़ इलेक्ट्रीसिटी इम्प्लॉईस(एटक), इलेक्ट्रीसिटी इम्प्लॉईस फेडरेशन ऑफ़ इण्डिया(सीटू), इण्डियन नेशनल इलेक्ट्रिसिटी वर्कर्स फेडरेशन(इंटक), आल इण्डिया पावर मेन्स फेडरेशन और टी एन ई बी इलेक्ट्रीसिटी वर्कर्स फेडरेशन के पदाधिकारी शामिल हुए.


आल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि सभी ट्रेड यूनियनों की 2 सितम्बर को होने वाली एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का देश के 12 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर समर्थन करेंगे. उन्होंने बताया कि बिजली कर्मचारी 2 सितम्बर को देश भर में विरोध प्रदर्शन करेंगे. इसके साथ ही 10 अगस्त से 31 अगस्त तक सभी प्रान्तों में प्रांतीय सम्मलेन एवं 5 सितम्बर से 20 सितम्बर तक जिला स्तरीय सम्मलेन कर बिजली क्षेत्र में चल रही जनविरोधी नीतियों को उजागर किया जायेगा. 21 सितम्बर से 20 अक्टूबर तक " जन जागरण अभियान " चलाया जायेगा जिसके तहत देश भर में धरना, सत्याग्रह, प्रदर्शन, मानव श्रृंखला, प्रेस कांफ्रेंस और जन सभाएं कर केन्द्र सरकार की कारपोरेट परस्त नीतियों से आम लोगों को अवगत कराया जायेगा.


उन्होंने बताया कि एन सी सी ओ ई ई ई की मीटिंग में बिजली के क्षेत्र में निजी घरानों के बढ़ रहे वर्चस्व के चलते बिजली वितरण कंपनियों की बदतर होती वित्तीय स्थिति और आम जन के लिए महंगी होती बिजली की स्थिति पर चिन्ता प्रकट की गयी. इलेक्ट्रीसिटी (अमेंडमेंट) बिल पर केन्द्र सरकार के लुका छिपी के रवैय्ये की आलोचना करते हुए एन सी सी ओ ई ई ई ने केन्द्रीय बिजली मन्त्री पीयूष गोयल से माँग की कि बिल में किये गए अद्यतन संशोधनों पर बिजली कर्मचारियों से विस्तृत वार्ता की जाये और राज्य सरकारों को भेजे गए संशोधित बिल की प्रति उन्हें भी दी जाये.


ध्यान रहे कि इलेक्ट्रीसिटी (अमेंडमेंट) बिल के जरिये बिजली वितरण और आपूर्ति को अलग अलग कर बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में एक इलाके में बिजली आपूर्ति हेतु कई निजी कंपनियों को लाइसेंस दिए जायेंगे. कोआर्डिनेशन कमेटी का यह मत है कि ऐसा करने से विद्युत वितरण कंपनियों का घाटा और बढ़ेगा क्योंकि निजी कम्पनियाँ केवल मुनाफे के क्षेत्र में ही बिजली सप्लाई करेंगी और सरकारी कम्पनी के पास केवल घाटे के उपभोक्ता बचेंगे. उन्होंने कहा कि निजी घरानों को मुनाफा देने के दृष्टिकोण से किये जा रहे तमाम बदलाव जनहित में नहीं हैं.


उन्होंने बताया कि बिजली के क्षेत्र में नियमित प्रकृति के कार्य आउट सोर्सिंग/ संविदा से कराये जाने, फ्रेंचायज़ी और निजीकरण पर भी मीटिंग में चिन्ता प्रकट की गयी और माँग की गयी कि ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर नियमित भर्ती की जाएं क्योंकि इसका दुष्प्रभाव आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड रहा है.

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