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अब पीके को ही निपटाने में जुट गए कांग्रेसी !

 Tahlka News |  2016-05-18 08:24:13.0

prashant kishor


उत्कर्ष सिन्हा


लखनऊ . नरेन्द्र मोदी और नितीश कुमार को सत्ता की चाभी सौपने वाले पेशेवर रणनीतिकार प्रशांत किशोर अपने जीवन की अब तक की सबसे बड़ी लडाई में फंस गए हैं.एक तरफ तो यूपी में हाशिये पर पड़ी कांग्रेस को पुनर्जीवित करने में टीम पीके को नाको चने चबाने पड़ रहे हैं तो वहीँ दूसरी तरफ पीके की कार्यशैली से परेशांन कुछ कांग्रेसी दिग्गज मीडिया में इस बात की हवा फ़ैलाने में जुट गए हैं कि पीके कांग्रेस को छोड़ सकते हैं.


जब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रशांत किशोर को यूपी में कांग्रेस को फिर से खड़ा करने और मिशन 2017 के लिए रणनीति बनाने की जिमीदारी प्रशांत किशोर को सौपी तब से ही यूपी कांग्रेस में कुंडली मार कर बैठे दिग्गजों को तकलीफ होनी शुरू हो गयी थी.


इसके बाद जिस तरह से पीके ने पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की ताबड़तोड़ बैठके लेनी शुरू कर विधान सभा के टिकट के लिए मानक तय करने शुरू कर दिए उससे भी इन नेताओं को अपने साम्राज्य पर खतरा महसूस होने लगा. रही सही कसर पीके के इस निर्देश ने पूरी कर दी जिसमे उन्होंने संक्रिया कार्यकर्ताओं से सीधे उन्हें रिपोर्ट करने को कहा था.


लम्बे समय से कांग्रेस में अपना वर्चस्व बनाये कुछ नेताओं को पीके की यह रणनीति नहीं भाई. पीके की इस प्रक्रिया से उपेक्षित पड़ा आम कांग्रेसी तो खुश हुआ मगर नेताओं के माथे पर पसीना आ गया. इसके बाद से ही मीडिया में पीके के कांग्रेस छोड़ने की खबरे आनी शुरू हो गयी.


पीके ने जिस दिन पहली बार यूपी कांग्रेस में बैठक ली थी तब उन्होंने प्रियंका गाँधी को कांग्रेस का चेहरा बनाने की बात कही. इसके बाद हाशिये पर पड़ी कांग्रेस अचानक चर्चा में आ गयी थी. फिर जब पीके ने सर्वे के साथ साथ संगठन और क्षेत्र की बैठके शुरू कर दी. इन बैठकों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री और प्रभारी महासचिव मधुसुदन मिस्त्री शामिल जरूर हुए मगर मधुसुदन मिस्त्री पीके को ले कर सहज नहीं हो पाए.


इसके बाद जब पीके ने मिशन 2017 के लिए यूपी की कमान एक ब्राह्मण चेहरे के साथ साथ गुलाम नबी आजाद को देने की बात कही और ब्राह्मण चेहरे के तौर पर शीला दीक्षित का नाम आगे बढाया तब यूपी कांग्रेस के एक दिग्गज ब्राह्मण नेता को यह बात नागवार गुज़री . इस बीच यह भी रिपोर्ट आई कि पीके ने यूपी कांग्रेस कमेटी में बड़े फेरबदल की संस्तुति की है.


पीके की समस्याए यही से शुरू हो गयी. बेजान पड़े संगठन को जिन्दा करने की कवायद के बीच पीके के खिलाफ कांग्रेस के इस गुट ने ही मोर्चा खोल दिया. मधुसूदन मिस्त्री ने ही प्रशांत किशोर पर तंज करते हुए कह दिया कि वे राहुल का राजनीतिक क़द बढ़ाने आए हैं या बस यूपी तक समेट देने. यूपी में सीएम पद का उम्मीदवार कौन होगा इसका फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व लेगा.

यूपी में कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने राहुल या प्रियंका गांधी को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित करने का सुझाव दिया था.


हालाकि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि प्रशांत किशोर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का समर्थन हासिल है. लेकिन बीते सोमवार को पार्टी ने उन्हें ढके छिपे तरीके से चेतावनी भी दी, जब पार्टी प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा कि प्रशांत किशोर को जिस वक्त पार्टी ने जिम्मेदारी सौंपी थी, उसी वक्त उन्हें साफ तौर पर बता दिया गया था कि वह सिर्फ चुनावी रणनीतिकार हैं और संगठन के मामलों और टिकट बंटवारे में उनकी कोई भूमिका नहीं होगी.


प्रशांत किशोर के मिशन यूपी सम्हालने के पीछे राहुल गाँधी के साथ ही साथ बिहार के सीएम नितीश कुमार की भी भूमिका रही है. नितीश की रणनीति में यूपी के चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन शामिल है. फिलहाल नितीश ने प्रशांत किशोर को बिहार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दे रखा है. नितीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड का यूपी में कोई आधार फिलहाल न के बराबर है, ऐसे में यदि पीके कांग्रेस संगठन को सक्रिय कर सके तो उसका फायदा नितीश को भी होगा.



यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत पीके की जिम्मेदारी छोड़ने के मामले को बिलकुल गलत बताते हुए कहते हैं - प्रशांत जी को राहुल गाँधी ने खुद की काम सौंपा है और उनकी टीम लगातार क्षेत्रीय बताके कर रही है जिसका फायदा भी पार्टी को मिल रहा है , दूसरी और खुद प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया है कि वे टिकट  वितरण में निर्णय लेने के अधिकारी नहीं है. ऐसे में कोई विदाद का प्रश्न ही कहाँ से उठता है. उनकी भूमिका स्पष्ट है और वे उस भूमिका का निर्वहन जिम्मेदारी से कर रहे हैं.

यूपी में बीते 28 साल से सत्ता से बहार रही कांग्रेस अपने नेताओं के अंदरूनी कलह के कारण इस हालत में पहुंची है. इस अंदरूनी कलह से खुद को बचा के रखना पीके के लिए ज्यादा बड़ी चुनौती है, मगर फिलहाल तो यह दिख रहा है कि उन्हें भी इस जाल में फंसने की कोशिशे शुरू हो गयी है.

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