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पकिस्तान में हर तीसरा नागरिक गरीब

 Sabahat Vijeta |  2016-04-08 15:03:38.0

pakistanइस्लामाबाद, 8 अप्रैल| पाकिस्तान में कम से कम छह करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं, जो सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। डॉन की वेबसाइट के अनुसार, पाकिस्तान के नियोजन, विकास और सुधार मंत्री अहसान इकबाल ने गुरुवार को कहा कि गरीबी रेखा तय करने के लिए अपनाई गई नई पद्धति के कारण गरीबों की संख्या बढ़ी है, जिसमें 2013-14 के सर्वे के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है।


गरीबी आकलन पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए इकबाल ने कहा कि वर्तमान सरकार एक बड़ी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है, क्योंकि गरीबी रेखा तय करने वाला 2001 का फार्मूला अप्रासंगिक और भ्रामक है, जिसके तहत दो करोड़ लोगों को गरीबी रेखा के नीचे बताया गया था।


इकबाल ने वित्तमंत्री इशाक डार के साथ संगोष्ठी की सह-अध्यक्षता की। इकबाल ने कहा कि नई गरीबी रेखा के अनुसार, करीब 68 से 76 लाख पाकिस्तानी परिवार गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम लोग अपने लिए पैमाने को ऊंचा कर रहे हैं। लेकिन हम लोगों ने ऐसा करने का फैसला किया है।"


2013-14 के सर्वेक्षण के आंकड़ों के इस्तेमाल से गरीबी के जो अनुपात हासिल हुए हैं, उसमें 29.5 प्रतिशत पाकिस्तानी गरीब हैं। मंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से 3030 रुपये कमाने वाले को गरीब माना गया है।


पुरानी गरीबी रेखा के अनुसार, 2001-02 के गरीबों की संख्या 34.6 प्रतिशत से घटकर 2013-14 में 9.3 प्रतिशत हो गई थी। लेकिन नई गरीबी रेखा के अनुसार, 63.3 प्रतिशत लोग 2001-02 में गरीब थे, जो अब घट कर 29.5 प्रतिशत हो गए हैं।


पहले 2001 में गरीबी रेखा तय करने के क्रम में इस बात को आधार माना गया था कि आप भोजन में कितना खाद्य ऊर्जा लेते (एफईआई) हैं। लेकिन मानक को पारदर्शी और सुसंगत बनाने के लिए मूल आवश्यकताओं की लागत को भी इसमें जोड़ा गया है।


इसके अलावा गैर खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में शिक्षा, स्वास्थ्य और मोबाइल फोन पर खर्च को भी शामिल किया जाएगा। इन्हें भी गरीबों की सही संख्या का पता लगाने के लिए मानकों में जोड़ा जाएगा।

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