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तुमसे पूछा गया एक प्रश्न, अनीता अग्रवाल की कविताएँ

 Tahlka News |  2016-06-05 12:35:12.0

anita agrawalअनीता अग्रवाल की कवितायों में सहज सरल प्रवाह है. उनकी कविताएँ जीवन से जुडी होती हैं और समाज के हर आयाम को छूती  हैं. कविता के अलावा अनीता अग्रवाल डायरी लिखती है, सर्जनात्मक कार्यों में जुटी रहती हैं , विधिक साक्षरता शिविरों में भागीदारी करती हैं ,पीड़ितों-असहायों को नि:शुल्क न्याय दिलाने में मदद करती हैं और विवाह के पश्चात् संबंधो में स्थायित्व लाने हेतु सलाह देती हैं. बीते तीन दशक से ज्यादा से आकाशवाणी और लगभग पन्द्रह वर्षों से दूरदर्शन के विभिन्न चैनलों में सक्रिय सहभागिता कर रही हैं. उनके काव्य संग्रह “नदी का सच” से दो कविताये ...

चाँद

हम-तुम और चाँद
चलते थे करीब
सट-सटकर
पुराने राजा और न्याय की तरह
सुर्ख बात यह कि
कैसे आया यह सलोना चाँद
इसकी जुर्रत कैसे हुई
आने की हमारे बीच

हम और तुम
जब भीग रहे थे
ओस की बूँद
और
हरी घास की तरह
ज़्यादा ही ढीठ होता है
पूरनमासी के रोज
पूरी चाकाचौंध का मुखौटा पहने चाँद

डर है
चाँदनी
कहीं ले ले आगोश में अपने
और तुम
चाँद की
हो जाओ

तुमसे पूछा गया एक प्रश्न

जिन्दगी के
दो पृष्ठों के बीच
जो यह खाली-सी
जगह है- खाली और मनहूस
उसे कौन भरेगा

क्या तुम्हें याद नहीं
कि तुमने मेरे प्राणों में
बाँसुरी का संगीत
भरा था

और मैंने पूर्ण चन्द्रमा को देखकर
कहा था-उत्सव |

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