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जब PM मोदी फहरा रहे थे तिरंगा, तब आतंकियों ने कमांडेंट प्रमोद कुमार को मारी गोली

 Abhishek Tripathi |  2016-08-16 03:26:51.0

commandant_pramod_kumarतहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में सोमवार को आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जांबाज कमांडेंट प्रमोद कुमार की जान बच सकती थी, अगर उन्होंने बुलेटप्रूफ हेलमेट पहना होता। सीआरपीएफ के मुताबिक, कमांडेंट की गर्दन के ऊपरी हिस्से में गोली लगी, जिससे उनकी मौत हुई। श्रीनगर के नौहट्टा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ के दस्ते को निशाना बनाकर हमला किया। इसमें सीआरपीएफ की 49 वीं बटालियन के कमांडेंट प्रमोद कुमार शहीद हो गए। उनके अलावा बल के आठ जवान और जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक सिपाही भी घायल हुआ है।


बख्तियारपुर (पटना) के रहने वाले प्रमोद कुमार ने अपनी टीम के साथ आतंकियों का बहादुरी से मुकाबला किया। उनकी टीम ने दो आतंकवादियों को मार गिराया था। बाकी बचे दो आतंकियों को वे ललकार रहे थे, तभी एक गोली कुमार के गर्दन के ऊपरी हिस्से में लगी। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।


वह 18 साल से बल को अपनी सेवाएं दे रहे थे। वर्ष 2011 से लेकर 2014 तक उन्होंने स्पेशल प्रोटेक्शन गु्रप (एसपीजी) में भी अपनी सेवाएं दी। प्रमोद की बहादुरी और दिलेरी की वजह से कुछ महीने ही पदोन्नति दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक कमांडेंट और अन्य कई जवान बिना हेलमेट के ही आतंकियों का मुकाबला कर रहे थे।


आतंकियों ने निपटने को नहीं साजो समान
आतंकियों और नक्सलियों का मुकाबला करने के लिए सीआरपीएफ जवानों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है, लेकिन उनका मुकाबला करने के लिए जवानों के पास जरूरी बुलेटपू्रफ जैकेट और हेलमेट नहीं हैं। बल के पास एक भी अगर संपूर्ण रक्षा कवच (फुलबाडी प्रीवेंटर) नहीं है। सीआरपीएफ के पास मात्र 1,852 बुलेटप्रूफ हेलमेट हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 1,22,485 है। इसी तरह बुलेटप्रूफ जैकेट भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। बारूदी सुरंग से बेअसर रहने वाले प्रोटेक्टिड माइनिंग व्हीकल (एमपीवी) की भी कमी है।


सीआरपीएफ प्रमुख ने माना हालत ठीक नहीं
सीआरपीएफ के महानिदेशक दुर्गा प्रसाद ने पिछले महीने बल के स्थापना दिवस के दौरान स्वीकार किया कि सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी है। उन्होंने कहा था कि पहले चरण में बतौर ट्रायल सात हजार रक्षा कवच खरीदे जाएंगे। इसके बाद ऑपरेशन ड्यूटी पर तैनात सभी जवानों को इस उपकरण से लैस कर दिया जाएगा। जवानों को जल्द ही तय संख्या में एमपीवी भी मिलेंगे।

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