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पी.के. की कांग्रेस से विदाई : वजह राहुल या प्रियंका

 Sabahat Vijeta |  2016-10-17 15:43:46.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार के लिए चुनावी जीत का कारनामा अंजाम देने वाले प्रशांत किशोर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के रणनीतिकार बने तो मृतप्राय कांग्रेस में जान लौटती दिखी लेकिन कांग्रेस और प्रशांत की ज्यादा निभ नहीं पाई. 2017 चुनाव की कमान संभाले प्रशांत का अब कांग्रेस से मोह भंग हो गया है. यूपी कांग्रेस के नेता हालांकि इस बात से इनकार कर रहे हैं कि पी.के. से कांग्रेस की कुछ अनबन है या फिर दोनों का रिश्ता टूट रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय से प्रशांत किशोर की टीम ने अपने सामान की पैकिंग शुरू कर दी है.


कांग्रेस सूत्र बताते हैं कि प्रशांत किशोर कांग्रेस से दो वजहों से अलग हो रहे हैं एक तो कांग्रेस की अंतर्कलह दूर होने का नाम नहीं ले रही है दूसरे कांग्रेस आलाकमान प्रशांत किशोर की सलाह पर शत-प्रतिशत अमल करने को तैयार नहीं दिखती. प्रशांत की नाराजगी की तीसरी वजह हैं प्रियंका गांधी. बताया जाता है कि यूपी चुनाव में बार-बार अपना नाम घसीटे जाने से प्रियंका ने नाराजगी ज़ाहिर की थी. हालांकि प्रियंका के नाम को यूपी से जोड़ना सिर्फ प्रशांत की वह रणनीति थी जो सोये हुए कांग्रेसियों को जगा सकें.


प्रशांत किशोर को चुनाव जिताने के मामले में जांचा, परखा, खरा के रूप में देखा जाता है. पी.के. की सलाह पर अमल कर मोदी देश के प्रधानमंत्री बन गए तो नीतीश ने भी बिहार की सत्ता में वापसी कर ली. कांग्रेस ने जब प्रशांत किशोर से सम्पर्क साधा तो कांग्रेस की हालत इतनी खराब थी कि किसी को नहीं लगा था कि प्रशांत यहाँ अपनी साख खराब करने आयेंगे लेकिन उन्होंने इस चैलेन्ज को न सिर्फ कुबूल किया बल्कि कांग्रेस में जान भी फूंक दी. राहुल की खाट सभा की प्लानिंग से लेकर राहुल के मंच की डिज़ाइनिंग तक पी.के. ने की.


लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी की चाय पर चर्चा प्रशांत किशोर के दिमाग की ही उपज थी. नीतीश कुमार तो पी.के. से इतना प्रभावित हुए कि उन्हें अपना सलाहकार ही बना लिया.


कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रशांत किशोर की काबलियत देखते हुए उन्हें यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी की कमान सौंप दी. ज़िम्मेदारी मिलने के बाद पीके ने तेज़ी से काम भी शुरू किया लेकिन कांग्रेस में चल रही गुटबाजी से वह बुरी तरह से ऊब गए हैं ओर उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय को छोड़ देने का फैसला किया है.


पी.के. ने राहुल को स्थापित करने के लिए खाट सभा की प्लानिंग और अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव की तरह का राहुल का मंच तैयार करने का जो खाका खींचा वह उत्तर प्रदेश क्या हिन्दुस्तान के लिए एक पहेली की तरह था. कभी किसी राजनीतिक दल ने ऐसा प्रयोग किया ही नहीं था. दरअसल पी.के. लम्बे समय तक अमरीका में रहे हैं वहां के चुनाव मैनेजमेंट का प्रयोग उन्होंने यहाँ शुरू किया तो लोगों ने हाथों हाथ लिया क्योंकि यह लीक से हटकर था.


पी.के. की रणनीति से कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं की अच्छी भीड़ भी जुटाई जो मंच पर मौजूद नेताओं का हौसला बढ़ाने के लिए ज़रूरी होता है. पीके अच्छी तरह जानते हैं कि देश के 65 प्रतिशत से ज्यादा युवा जिस ओर भी मुड़ेंगे सरकार उसकी ही बनेगी.


बताते हैं कि प्रशांत को कांग्रेस का मैनेजमेंट सौंपने वाले राहुल ही प्रशांत की वापसी की असल वजह भी हैं. बताते हैं कि राहुल गांधी ने प्रशांत किशोर के पर कतरते हुए यूपी कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद को फ्री हैंड देने का फैसला किया. पी.के. के अधिकारों में धीरे-धीरे कटौती करने का फैसला किया गया. चुनाव के दौरान पार्टी को अपने हिसाब से निर्देशित करने वाले पी.के. को अपने काम में हस्तक्षेप पसंद नहीं है. जब उनके अधिकार ही कम होने लगे तो उन्होंने खुद ही अपनी इज्ज़त बचा लेने का फैसला कर लिया. कांग्रेस भले इनकार करती रहे लेकिन सही यही है कि प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रशांत किशोर का सामान समेटा जा रहा है. कल से कांग्रेस अपनी बनाई रणनीति से चुनाव की तैयारी करेगी.

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