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राज्यपाल से मिला तीर्थ यात्रियों का दल

 Vikas Tiwari |  2016-09-18 17:39:41.0

राज्यपाल

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक से रविवार को राजभवन में श्री भागवत परिवार मुंबई के तत्वावधान में उत्तर प्रदेश के तीर्थ क्षेत्रों की यात्रा करने के लिए आये लगभग 150 श्रद्धालुओं ने भेंट की तथा राजभवन का भ्रमण भी किया। श्रद्धालुओं में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ, चेन्नई, कोयम्बटूर, बंगलुरू, नेपाल तथा अन्य प्रदेशों से भी लोग सम्मिलित थे, जिनका लखनऊ, नैमिषारणय, अयोध्या, प्रयाग, चित्रकूट, वाराणसी आदि की तीर्थ यात्रा पर जाने का कार्यक्रम है।

राज्यपाल ने श्री भागवत परिवार के सभी तीर्थ यात्रियों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अनेक दर्शनीय स्थल हैं। छत्रपति शिवाजी के गुरू रामदास ने कहा था कि ‘‘देशाटन से ज्ञान बढ़ता है।‘‘ आप भी उत्तर प्रदेश की यात्रा पर निकले, जहाँ आपको अनेक मन को प्रसन्न करने वाले अनुभव मिलेंगे, जिससे आपकी यह यात्रा एक यादगार यात्रा होगी। उन्होंने तीर्थ यात्रियों से यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में आप अनेक तीर्थ स्थानों पर जायेंगे, अयोध्या, प्रयाग और वाराणसी में मेरी ओर से गंगा और अन्य देवों को प्रणाम कहियेगा।
श्री नाईक ने अपना संक्षिप्त परिचय देते हुए कहा कि मुंबई से आये लोगों से उनका पूर्व का संबंध रहा है, मगर अन्य प्रदेशों के लोगों को उनके बारे में शायद पूरी जानकारी न हो। उन्होंने बताया कि 1954 में वे पहली बार सांगली से मुंबई नौकरी के लिये आये। पहली नौकरी महालेखाकार कार्यालय में करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक, जनसंघ एवं आपातकाल में जनहित से जुडे़ अन्य समाजिक कार्यों के साथ-साथ कुष्ठ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए भी कार्य किये। जनता पार्टी बनने के बाद उन्होंने बोरीवली से विधान सभा का चुनाव लड़ा। समाज के समर्थन से तीन बार विधान सभा तथा पांच बार लोकसभा के सदस्य रहे। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी के साथ-साथ राजनैतिक रूप से भी काफी सजग थी, जिसने विभिन्न राजनैतिक दलों के बडे़ नेताओं को देश की सेवा के लिए समर्पित किया।
राज्यपाल ने कहा कि पांच बार लोकसभा सदस्य रहने के साथ वे केन्द्र में मंत्री भी रहे तथा दो बार चुनाव भी हारे। 2013 में नये चेहरे को स्थान देने के लिये उन्होंने चुनावी राजनीति छोड़ने का निर्णय किया। 2014 में उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया। राज्यपाल मनोनीत होने के बाद राष्ट्रपति  प्रणव मुखर्जी ने उनसे प्रथम भेंट में भारत के संविधान की प्रति सौंपते हुए कहा था कि ‘‘अब आपको भारत के संविधान के आधार पर उत्तर प्रदेश में काम करना है।‘‘ उन्होंने कहा कि वे कोशिश करते हैं कि संविधान के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
श्री भागवत परिवार के श्री वीरेन्द्र याज्ञिक ने बताया कि इस तरह की तीर्थ यात्रा पिछले सात-आठ सालों से आयोजित की जा रही है। पूर्व में दक्षिण भारत, गुजरात व अन्य प्रदेशों के दर्शनीय स्थल की यात्रा पर गये थे और इस बार उत्तर प्रदेश की तीर्थ यात्रा पर आये हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की यात्राओं से देश की विभिन्न संस्कृतियों को जानने और समझने का मौका मिलता है।
कार्यक्रम में बंगलुरू व अन्य स्थानों से आये श्रद्धालुओं ने राज्यपाल को स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र व पगड़ी भेंट करके सम्मानित किया।

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