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इस IAS अफसर से तंग कर्मचारियों की गुहार, बहुत प्रताड़ित करते हैं कमिश्नर साहब, हमें मुक्ति दे दो !

 Tahlka News |  2016-09-07 07:19:54.0

इस IAS अफसर से तंग कर्मचारियों की गुहार, बहुत प्रताड़ित करते हैं कमिश्नर साहब, हमें मुक्ति दे दो !
तहलका न्यूज ब्यूरो

इलाहाबाद. अपने कार्यशैली से आये दिन सुर्ख़ियों में रहने वाले इलाहबाद के कमिश्नर और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजन शुक्ला एक बार फिर चर्चा में हैं. दुर्भाग्य यह है कि ये सभी चर्चाएँ बुरी वजहों से हो रही हैं.

बीते दिनों परिवहन विभाग में एक विवादास्पत आर्डर करने के बाद उठे बवंडर के कारण राजन शुक्ल को अपना आदेश वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा था और इसके बाद उनके आवास पर तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने राजन शुक्ल पर प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है. इलाहाबाद विकास प्राधिकरण के इन कर्मचारियों ने कहा है कि “ हमें कमिश्नर आवास की ड्यूटी से हटा लिया जाए.” इस शिकायत के बाद कर्मचारी संघ एक बार फिर आन्दोलन की मुद्रा में आ गया है.


मंगलवार को इलाहाबाद विकास प्राधिकरण कर्मचारी संघ ने एडीए के उपाध्यक्ष को पत्र लिखा है जिसमे आरोप लगाया गया है कि कमिश्नर आवास पर तैनात प्राधिकरण के कर्मचारियों को गंभीर रूप से अमानवीय बर्ताव का सामना करना पड़ रहा है.

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चपरासी विशेश्वर राज और सतीश चन्द्र कनौजिया इस समय कमिश्नर के घर पर लगाये गए हैं. विशेश्वर टेलीफोन ड्यूटी पर है और सतीश कपडे धोने के काम पर हैं. इन दोनों ने अपने साथ अमानवीय हरकते करने का आरोप कमिश्नर और उनके परिजनों पर लगाया है.

यह पहली बार नहीं है जब कमिश्नर राजन शुक्ल पर यह आरोप लगे हैं. दो महीने पहले भी उनके आवास पर ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों ने इस तरह के आरोप लगाये थे. उस वक्त कर्मचारियों ने कहा था कि न सिर्फ कमिश्नर प्रताड़ित करते हैं बल्कि उनके पिता भी बात बात पर डंडा ले कर मारने के लिए उठ जाते हैं.

इस बीच कमिश्नर राजन शुक्ल पर इस बात का भी आरोप लगा कि कथित तौर पर उन्होंने अपने आवास पर पाली हुयी गाय को बेरहमी से पीटा.

राजन शुक्ल पहली बार विवादों में नहीं आये हैं. बतौर डीएम उनके गोरखपुर के कार्यकाल में भी इस तरह की बहुत खबरे आई थी जिसके बाद उन्हें हटाया गया और जौनपुर तैनाती मिली मगर वहां भी शिकायते नहीं रुकी. इसके बाद से उन्हे कई साल फिल्ड पोस्टिंग से दूर रखा गया. बतौर कमिश्नर उनकी इलाहाबाद नियुक्ति के पीछे  समाजवादी पार्टी के संस्थापको में से एक वरिष्ठ नेता  से उनकी नजदीकियाँ बताई जाती रही हैं.

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