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पर्यावरण प्रदूषण के निवारण में आम आदमी की सह-भागिता ज़रूरी

 Sabahat Vijeta |  2016-10-20 16:17:26.0

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी ‘पर्यावरण प्रदूषण: कारण एवं निवारण’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. आलोक धवन, संयोजक डा. ए.के.पाण्डेय, हिन्दी अधिकारी चन्द्र मोहन तिवारी, इंजीनियर अल्ताफ़ हुसैन खाँ सहित अन्य विशिष्टजन व वैज्ञानिकगण उपस्थित थे।


राज्यपाल ने संगोष्ठी के विषय को सामयिक बताते हुए कहा कि संगोष्ठी का विषय हमारे वैज्ञानिकों के लिये एक चुनौती है। पर्यावरण प्रदूषण मानव जीवन के लिये गम्भीर संकट है। औद्योगिकीकरण, शहरीकरण एवं रसायनों के प्रयोग से प्रदूषण बढ़ा है। हमें विकास के साथ पर्यावरण को स्वच्छ बनाने का प्रयास करना होगा। पर्यावरण प्रदूषण के कारण ढूढ़ना और निराकरण के उपाय बताने की जिम्मेदारी वैज्ञानिकों की है। वैज्ञानिक अपने ज्ञान को व्यवहार में लायें। उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक ज्ञान लाइब्रेरी तक सीमित रहेगा तो उसका लाभ आम आदमी को नहीं मिलेगा।


श्री नाईक ने कहा कि एक स्वच्छ भारत अभियान सुनने में लगता है कि सामान्य बात है मगर विषय अत्यन्त गम्भीर है। छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर बड़े विषयों की समस्या को ठीक किया जा सकता है। स्वच्छता अभियान में आम आदमी की भागीदारी तथा विचार-विमर्श आवश्यक है। नदियों से लेकर समुद्र का प्रदूषण मछलियों एवं अन्य जलचरों के लिये नुकसान देह है। उन्होंने कहा कि गंगा के प्रदूषण का कारण मनुष्य स्वयं है इसलिये उसको स्वच्छ करने का विचार भी सबको मिलकर करना होगा।


राज्यपाल ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण के निवारण में आम आदमी की सह-भागिता आवश्यक है। आम आदमी जितना इस विषय को समझेगा उतना ही लाभ समाज को मिलेगा। वैज्ञानिक अपनी राय और सुझाव केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार को दें ताकि जनता की सुरक्षा के लिये जागरूक प्रहरी के रूप में काम किया जा सके। राज्यपाल ने बताया कि पेट्रोलियम मंत्री रहते हुए उन्होंने पेट्रोल में मिलावट रोकने और पीएनजी एवं सीएनजी का प्रयोग पर्यावरण की सुरक्षा की दृष्टि से करवाने का निर्णय लिया था। उन्होंने दीपावली की बधाई देते हुए कहा कि प्रदूषण मुक्त दीपावली पर विचार करें।


संगोष्ठी में निदेशक प्रो. आलोक धवन ने संस्थान का परिचय दिया, डा. ए.के. पाण्डेय ने स्वागत उद्बोधन के साथ-साथ जल, वायु एवं पर्यावरण के प्रदूषण पर अपने विचार रखें तथा इंजीनियर अल्ताफ हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। निदेशक द्वारा राज्यपाल को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। राज्यपाल ने हिन्दी अधिकारी चन्द्र मोहन तिवारी को हिन्दी में काम करने के लिये सम्मानित भी किया।

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