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यूपी बोर्ड की परीक्षा पहले हो या चुनाव, फैसला करेगा चुनाव आयोग

 Tahlka News |  2016-12-08 11:32:28.0

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उत्कर्ष सिन्हा


लखनऊ. उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद् ने हाईस्कूल और इंटरमीडीएट के परीक्षाओं की तिथियाँ घोषित कर दी हैं और इसी के साथ यूपी की विधान सभा के आसन्न चुनावो के भी अप्रैल में होने की सम्भावनाये और मजबूत हो गयी हैं.यूपी बोर्ड की तरफ से परीक्षाओं की तिथियों की घोषणा के तत्काल बाद निर्वाचन आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वेंकटेश और अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) दलजीत चौधरी को दिल्ली तलब किया है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त इन अधिकारियों के साथ कल बैठक करने के बाद ही कोई फैसला करेंगे.


माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव शैल सिंह के अनुसार 16 फरवरी से छह मार्च तक हाईस्कूल और 16 फरवरी से 20 मार्च तक इण्टरमीडिएट की परीक्षाएं हैं. इन परीक्षाओं में 60 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल होंगे. आईसीएसई ने भी हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट की परीक्षाएं 16 फरवरी से 31 मार्च के बीच घोषित की हैं. सीबीएसई की परीक्षाएं भी एक मार्च से संभावित हैं. इन परीक्षाओं की घोषणा होने के बाद चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी और अपर पुलिस महानिदेशक (क़ानून व्यवस्था) से विचार-विमर्श का फैसला किया.


उत्तर प्रदेश सहित 5 राज्यों की विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव होने की उम्मीद को भी इस वजह से एक झटका मिल सकता है और अब यह भी उम्मीद जाहिर की जा रही है कि शेष चार राज्यों के चुनाव के साथ यूपी में चुनाव नहीं संपन्न हो पाएंगे. इसकी वजह ये है कि शेष राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 18 मार्च 2017 को ख़त्म हो जायेगा और नियमतः उसके पहले नयी विधानसभा के नतीजे आ जाने चाहिए.


पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि 5 राज्यों के विधानसभाओं की अधिसूचना एक साथ ही जारी की जाएगी और इसकी तिथियाँ फरवरी से मार्च के बीच होंगी. मगर यूपी बोर्ड ने अपनी परीक्षाओं की तिथि भी 18 फरवरी से घोषित कर दी है. यह परीक्षाएं 21 मार्च को समाप्त होंगी. अब तक ऐसा नहीं हुआ है कि बोर्ड की परीक्षाओं के बीच ही चुनाव भी हो क्योंकि ये परीक्षाएं इतनी बड़ी होती हैं कि बड़े पैमाने पर सरकारी अमला इसे सकुशल संपन्न करने में लग जाता है. साथ ही चुनावो के लिए न तो शिक्षको की ड्यूटी लगायी जा सकेगी और न ही मतदान केंद्र मानने के लिए स्कूल खाली मिलेंगे. 2012 में भी यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के पहले ही चुनाव संपन्न करा लिए गए थे.


अब चुनाव आयोग के सामने दो ही विकल्प हैं या तो वह विधानसभा चुनावो को 18 फरवरी से पहले निपटा दे या फिर इसे अप्रैल में कराये. यूपी की विधानसभा का गठन 21 मई से पहले होना है.


सूबे की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी और केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा को भी चुनावो के आगे खिसकने से सूकून मिलेगा. समाजवादी पार्टी के चुनावी तैयारियों वाले 2 महत्वपूर्ण महीने पार्टी की अंदरूनी उठापटक में निकल गए. अब तक अखिलेश यादव अपना चुनाव प्रचार शुरू भी नहीं कर सके हैं. साथ ही अखिलेश यादव यह भी चाहेंगे कि मेट्रो, बिजली, एक्सप्रेसवे और यूपी 100 जैसी उनकी परियोजनाएं का लाभ और असर जनता वोट डालने से पहले ठीक से महसूस कर ले. ख़राब कानून व्यवस्था को ले कर विपक्षी दल अखिलेश सरकार पर हमेशा हमलावर रहते हैं ऐसे में अखिलेश यूपी 100 की चुस्ती के जरिये इस आलोचना से उबरने की कोशिश कर रहे हैं.


इसी तरफ नोटबंदी के बाद उपजे जनता के आक्रोश को भापने में लगी भाजपा को भी चुनावो के आगे खिसकने का लाभ मिलने की उम्मीद है. कैश की कमी के कारण लाईनों में कड़ी जनता की समस्याएं भी फ़रवरी तक काफी कम हो चुकी होंगी और चीजे पटरी पर आने लगेंगी. इससे सरकार के फैसले से जो लोग भी मतदाता असंतुष्ट हैं उनका आक्रोश भी कम हो चुका होगा और भाजपा इस मुद्दे पर अपना पक्ष समझाने के लिए कुछ अतिरिक्त समय भी पा चुकी होगी.

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