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नोटबंदी के बाद अब तीसरी क्लास का बच्चा सीखेगा मनी मैनेजमेंट

 Vikas Tiwari |  2016-11-26 12:04:29.0

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शबाहत हुसैन विजेता


लखनऊ. 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद हिन्दुस्तान के बैंकों में लगी लम्बी-लम्बी लाइनों की फिर कभी पुनरावृत्ति न हो इसकी तैयारी नयी पीढ़ी को होश संभालने के साथ ही करवाई जायेगी. तीसरी कक्षा से दसवीं कक्षा के बीच ही बच्चा मनी मैनेजमेंट की पूरी जानकारी हासिल कर लेगा.


नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ़ सेक्युरिटी मार्केट्स (एनआईएसएम) ने बच्चो को मनी मैनेजमेंट सिखाने वाली किताबें तैयार कर ली हैं. भारत सरकार से हरी झंडी मिलने के साथ ही बच्चो को तीसरी कक्षा से दसवीं कक्षा तक मनी मैनेजमेंट पढ़ाया जायेगा.


बच्चो को मनी मैनेजमेंट सिखाने वाली यह किताबें शुरू में कामिक्स की तर्ज़ पर होंगी. इसमें तस्वीरों के ज़रिये बच्चो का ज्ञान बढ़ाया जायेगा. जयपुरिया इंस्टीटयूट ऑफ़ मैनेजमेंट के एसोसियेट प्रोफ़ेसर डॉ. शुमेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि बच्चो को शुरुआती दौर में सिर्फ तीन चीज़ों की जानकारी दी जायेगी. बैंक, चेक और ड्राफ्ट. इन तीनों की ज़रूरत के बारे में जानने के बाद बच्चे मनी को विस्तार से अगली कक्षाओं में जानेंगे.


एच.एस.बी.सी. बैंक के वाइस प्रेसिडेंट रह चुके एवोक इंडिया के प्रेसिडेंट प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि जो लोग ज़रुरत से बचा पैसा कहीं इस्तेमाल नहीं करते वह हमेशा घाटे में हैं. पैसा बैंक में रहे या घर में लगातार उसकी कीमत घट रही है. यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि हिन्दुस्तान के लोगों को मनी मैनेजमेंट नहीं आता है.


श्री द्विवेदी ने यह मानने से इनकार किया कि सारा काला धन नोटों के रूप में लोगों के पास डंप है. अचानक नोट बंद किये जाने से लोगों में इसी वजह से गुस्सा है. उन्होंने बताया कि भारत में काला धन नोटों के रूप में सिर्फ 4 फीसदी है. काला धन तो सोने और ज़मीनों की शक्ल में है.


उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार का यह फैसला फिलहाल भले ही बहुत खराब लग रहा हो लेकिन आने वाले दिनों में इसका अच्छा असर लोगों को नज़र आयेगा. सिर्फ 15 दिनों में देश के बैंकों में जमा हुआ 8 लाख करोड़ रुपया विभिन्न योजनाओं में लगने के लिये तैयार है.


बैंकों में इतना धन आने के बाद ऋण की ब्याज दर कम हो सकती है. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और उड़ीसा के लोगों को अपने धन के बारे में ही जानकारी नहीं है. इसी से वह विकास से कोसों दूर हैं.


500 और 1000 के नोटों पर पाबंदी के बाद घरों में रुपया जमा कर रखने वाले बेचैन होकर बैंकों की तरफ दौड़ पड़े और सारी व्यवस्थाएं चरमरा गईं. प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि घरों में रुपया रखने वाले लोगों खासकर महिलाओं को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि घर में रखा 100 रुपये का नोट एक साल में 92 रुपये की ही वैल्यू का रह जाता है. यह रुपया बैंक में रहता है तो 4 रूपये ब्याज मिलता है. यानी तब उसकी कीमत 96 रुपये रह जाती है. इस तरह से पैसा घर में रहे या फिर सेविंग एकाउंट में दोनों ही स्थितियों में घाटा है.


श्री द्विवेदी ने बताया कि हिन्दुस्तान के हर व्यक्ति को मनी मैनेजमेंट जानना चाहिये. ज़रुरत से बचा पैसा ऐसे क्षेत्र में लगाना चाहिए जो अच्छा रिटर्न दे सके. अच्छा रिटर्न नहीं आयेगा तो व्यक्ति हैण्ड टू माउथ ही रहेगा. अगर हर कोई वित्तीय जानकारी का मास्टर बन जाये तो उसके घर पर इतना पैसा रहेगा ही नहीं कि सरकार द्वारा नोट बंद किये जाने का असर उसे परेशान करे.


500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद लोगों को हुई दिक्क़तों का असर नयी पीढ़ी को न भुगतना पड़े इसी वजह से भारत सरकार छोटे बच्चो को शुरू से ही इस समस्या से निबटने का अभ्यस्त बनायेगी और वह मनी मैनेजमेंट के मास्टर बनकर स्कूल से निकलेंगे.

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