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अब UP में होगा इको फ्रेंडली दाह संस्कार

 Tahlka News |  2016-06-16 08:43:02.0


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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
गोरखपुर:
अब शमशानों पर चिताएं तो जलेंगी, लेकिन धुआं और राख से प्रदूषण नहींं फैलेगा। इसके लिये अखिलेश सरकार ने सभी निकाय क्षेत्रों की अंत्‍योष्टि स्‍थलों पर मॉडर्न वुड बेस्‍ड ट्रेडिशनल क्रिमिनेशन सिस्‍टम लगाने का निर्णय किया है। इसके जरिए अंतिम संस्‍कार करने में परंपराओं के निर्वाह के साथ ही लकड़ी और समय की बचत भी होगी। गोरखपुर के बड़हलगंज के शमशान पर पूर्व विधायक राजेश त्रिपाठी के पहल के बाद इस सिस्‍टम को प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया है। मॉर्डन सिस्‍टम से शव 3 से 4 घंटे के बजाय 80-90 मिनट में जल जाएगा। साथ ही 300 से 400 किग्रा के बजाए मात्र 120-150 किग्रा ही लकड़ी खर्च होगी।


दरअसल, सरकार ने बड़ेे शहरोंं मे विद्युुत शवदाह गृह तो बनवाए हैं लेकिन इसमेंं अंतिम संस्‍कार करने से पारंपरिक रीति रिवाजों का पालत नहींं हो पाता। ऐसे में भावनात्‍मक कारणों से लोग विद्युत शवदाह गृह मे अपने प्रियजनों का अंतिम संस्‍कार करने से परहेज करते हैं। इसे देखते हुए गाेरखपुर की ऊर्जा गैसिफायर कंपनी ने मॉडर्न वुड बेस्‍ड ट्रेडिशनल क्रिमिनेशन सिस्‍टम तैयार किया है।


इसे प्रयोग के तौर पर गोरखपुर के बड़हलगंज के शमशान पर संचालित किया जा रहा है। पिछले महीने नगर विकास मंत्री आजम खां गोरखपुर गए थे तो इस सिस्‍टम को देखकर काफी प्रभाावित हुए थे। उन्‍होंने नगर विकास विभाग को सभी निकाय क्षेत्रों के शमशानों पर इसे लगाने को कहा था।


इसी के तहत विभाग के सचिव एसपी सिंह ने नगर निगमाें के आयुक्‍तों और नगरप‍ालिका परिषद के अधिशासी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों के अंत्‍योष्टि स्‍थलों पर मॉर्डन वुुड बेस्‍ड ट्रेडिशनल क्रिमिनेशन सिस्‍टम स्‍थापित करने का निर्देश दिया है।


मॉडर्न सिस्‍टम ऐसे होगी अंत्‍योष्टि
चिता तो परपंरागत तरीके से ही सजाई जाएगी। लेकिन यह जमीन के बजाय लोहेे की ट्रॉली पर सजेगी। शव कोचिता पर रखने सेे लेकर मुखाग्नि देने तक के सारे कर्मकांड करने के बाद जब चिता जलने लगेगी तो ट्रॉली को लोहे से बने गुंबदनुमा चैंबर में डालकर दरवाजा बंद कर दिया जाएगा। करीब डेढ़ घंटे में शव जलकर राख हो जाएगा। इसके बाद चैंबर के पीछे बने ढक्‍कन को हटाकर कपाल क्रिया संपन्‍न की जाएगी। इस सिस्‍टम से शवदाह में लकडी जलने से निकलने वाले धुंआ को सोलर भट्टी से साथ बने फिल्‍टर के जरिए शुद्ध करके करीब 100 फीट ऊंची चिमनी केे माध्‍यम से ऊंचाई पर छोड़ा जाता है। इससे पार्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। बाद में ट्रॉली को बाहर निकाल कर पानी में डाल दिया जाता है। जिससे अस्थियां राख से अलग हो जाती है। जिन्‍हें अंतिम रूप से विसर्जित कर दिया जाता है।


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