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नोटबंदी के असर से हलकान भाजपा सांसदों ने सुनाई अमित शाह को खरी खरी, संघ की भी चेतावनी

 Tahlka News |  2016-12-17 06:55:23.0

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उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं वैसे वैसे नोटबंदी का भूत अब भाजपा के सर पर भी चढ़ने लगा है. शुरूआती दिनों का उत्साह अब चिंता में तब्दील हो रहा है. यूपी के सांसदों के साथ बीते दिनों हुयी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और राजनाथ सिंह की बैठक में भी सांसदों ने इस मसले पर खूब बोला.पहले तो अमित शाह ने पार्टी सांसदों को खूब ज्ञान दिया और कहा कि आप जनता को समझाने में नाकामयाब हो रहे हैं, मगर इसके फ़ौरन बाद पूर्वांचल के एक सांसद ने अध्यक्ष जी को खरी खरी सुना दी. यह सांसद पहले पहलवान भी रह चुके हैं.


सांसदों का कहना था कि अगर अधिकतम 15 जनवरी तक समस्या पर काबू नहीं पाया गया तो जनता के बीच जाना मुश्किल हो जायेगा. आरएसएस और भाजपा सांसदों का यह गुस्सा रंग लाता दिख रहा है इसलिए आनन् फानन में साढे सात हजार करोड़ की नयी करेंसी विशेष विमान द्वारा यूपी भेजी गयी है.

नोट बंदी के बाद से खास कर पूर्वांचल की हालत बहुत ख़राब है. बीते एक हफ्ते में वहां नगदी की किल्लत झेल रहे ग्रामीणों ने अब सड़क पर उतरना शुरू कर दिया है. आंदोलनों के लिए जानी जाने वाली पूर्वांचल की धरती से निकल रहे संकेत ने भाजपा सांसदों को हलकान कर दिया है और अब वे अपने क्षेत्र में जाने से कन्नी कटाने लगे हैं. खुद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या का घेराव हो गया और देवरिया में पार्टी की परिवर्तन यात्रा को भी कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. कई जगहों पर ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे जाम कर दिया और कही कही तो बैंक मैनेजरों की पिटाई की खबरें भी आने लगी हैं.

भाजपा के लिए सबसे बड़ी चेतावनी आरएसएस के नाराजगी के संकेत हैं. आरएसएस के शीर्ष नेताओं के साथ पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में भी यह मुद्दा उठा है. आरएसएस ने अपनी जमीनी पड़ताल में पाया है कि जनता का धरी अब जवाब दे रहा है और इस फैसले के बाद ध्वस्त व्यवस्थाओं की वजह से नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता में भारी गिरावट आयी है. शहरो में लगे छोटे छोटे कारखानों की बंदी के बाद मजदूरों का पलायन बड़ी संख्या में हुआ है और वे गाँव में वापस आ गए हैं. उनकी परेशानी ने गाँव का माहौल भी बदला है. दूसरी तरफ किसानो की बोआई में जो देरी हुयी है उससे किसान भी बहुत नाराज है. खेती के एक सीजन के नुक्सान का असर ख़त्म होने में कम से कम तीन फसल चक्र लग जाते हैं. गेहूं की सप्लाई प्रभावित न होने देने के लिए आयात के प्रोत्साहन की मोदी सरकार के फैसले ने भी किसानो का गुस्सा और बढ़ा दिया है.

इन सबके बीच विपक्षी दलों द्वारा भाजपा पर अपने पैसे को ठिकाने लगाने की खबरों ने भी जोर पकड़ा . गोरखपुर में भाजपा द्वारा गुपचुप तरीके से खरीदी गयी 250 से ज्यादा मोटरसाईकिलों के खुलासे और फिर कमल मेला के आयोजनों से भी जनता के लाईनों में खड़ी जनता के चिढने का खतरा महसूस हो रहा है. छात्र राजनीति से भाजपा में आये और अपना दूसरा विधान सभा चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटे एक नेता ने निराश भाव से कहा – सर्जिकल स्ट्राईक के बाद हमारे लिए बहुत अनुकूल माहौल बना था विपक्ष की बोलती बंद थी मगर अब तो जनता ही विपक्ष बनने लगी है.हमारा क्षेत्र में जाना मुश्किल हो रहा है. शादियो का सीजन हमारे प्रचार के लिए एक बेहतर अवसर था मगर नेता खुद नगदी की कमी से जूझ रहे हैं इसलिए शादियों के निमंत्रण भी छोड़ने पड़ रहे हैं.

रही सही कसर बड़ी संख्या में नोटों की बरामदगी ने पूरी कर दी है. अब यह भी सवाल उठने लगे हैं कि जहाँ आम आदमी को पैसे नहीं मिल रहे हैं वहां रसूखदारों के पास करोडो के नए नोट पहुँच जा रहे हैं ऐसे में भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने का दावा भी असफल हो गया है और सामान्यतः भ्रष्टाचार से अछूते माने जाने वाले बैंक भी इसकी जद में आ गए हैं.

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