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अब कैराना पर घिरी भाजपा, हुकुम सिंह की सूची पर उठे सवाल

 Tahlka News |  2016-06-13 08:23:52.0

kairana
तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. भाजपा संसद हुकुम सिंह की मुजफ्फरनगर के कैरान इलाके से हिन्दुओं की हत्या और पलायन को ले कर सूची जो जारी की थी, उसने यूपी की सियासत में भूचाल ला दिया था. यहाँ तक मामला बढ़ा कि इलाहाबाद में चल रही भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में खुद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका जिक्र किया.

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपने देश में कुछ लोगों को अपना गांव छोड़कर जाना पड़ रहा है और इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए. वहीं बीजेपी नेता मेनका गांधी ने कहा कि एक दिन आएगा जब सभी लोग उत्तरप्रदेश छोड़ना चाहेंगे.


मगर अब हुकुम सिंह की रिपोर्ट पर ही सवाल उठने लगे हैं. सामाजिक राजनितिक संगठन रिहाई मंच ने इस सूची में दिए गए 21 हत्याओं की पड़ताल कर दावा किया है कि हुकुम सिंह ने जिन 21 हिंदुओं की हत्याओं की सूची जारी की है उनमें से एक भी सांप्रदायिक हिंसा या द्वेष के कारण नहीं मारे गए हैं और उनमें से कईयों की तो ढाई दशक पहले हत्याएं हुई थीं.

वरिष्ठ पत्रकार पंकज चतुर्वेदी द्वारा इस सूची की की गई तथ्यान्वेषण के आधार पर बताया कि इस सूची में दर्ज मदनलाल की हत्या 20 वर्ष पहले, सत्य प्रकाश जैन की 1991, जसवंत वर्मा की 20 साल पहले, श्रीचंद की 1991, सुबोध जैन की 2009, सुशील गर्ग की 2000, डा0 संजय गर्ग की 1998 में हत्याएं हुई थीं. इन सभी हत्याओं में आरोपी भी हिंदू समाज से थे.

इसी तरह 349 हिन्दुओं के पलायन के मामलों की पड़ताल के बाद समाचार चैनल एनडीटीवी ने कहा है की उसकी टीम ने जब कैराना का दौरा किया तो इस लिस्ट में 11 ऐसे नाम मिले जो 10 से 15 साल पहले ही आर्थिक और क़ारोबारी वजह से पलायन कर चुके थे. इनके पलायन का संबंध किसी आतंकी माहौल से नहीं था जिसका दावा हुकुम सिंह ने अपनी लिस्ट में किया है.

इसी तरह ABP न्यूज की पड़ताल में ये बात सामने आई कि कुछ लोग तो व्यवसाय मंदा होने से तो कुछ लोग यहां दिन-ब-दिन बढ़ रहे अपराध की वजह से पलायन कर रहे हैं, लेकिन मुस्लिम समुदाय के खौफ की वजह से पलायन की बात को लोग सिरे से खारिज कर रहे हैं.

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक लिस्ट में 165 और 166वें नंबर पर जय कुमार धीमान और पोनी का नाम है। उनके भाई मनु धीमान कैराना के बिसातयान मौहल्ले में कई दशकों से रहते हैं. वह हैरान है कि लिस्ट में उनके दो भाइयों के नाम हैं, उनका कहना है कि उनके दोनों भाई रोज़गार के लिए कई साल पहले ही इलाका छोड़कर चले गए थे.

इसी लिस्ट में सीताराम लुहार के परिवार का ज़िक्र है. उनके तीन बेटे नरेंद्र, सुरेंद्र और गोटी का 153 से 155 नंबर पर नाम है. कभी कैराना के बिसातयान मौहल्ले में यह परिवार रहता था लेकिन 10 साल पहले ही अपना घर-बार बेचकर जा चुका है.

हुकुम सिंह द्वारा जारी की गई लिस्ट में मांगे राम के तीन बेटे सुनील प्रजापत, सतीश प्रजापत और सोनू प्रजापत का नाम 159 से 161 नंबर तक है. जब एनडीटीवी इस पते पर पहुंची तो उनके भतीजे शिवकुमार प्रजापत मिले जिन्होंने बताया कि मांगे राम अपने परिवार के साथ क़रीब 15 साल पहले ही कैराना छोड़कर रोज़गार की तलाश में चले गए थे.

कैराना को कश्मीर कहने वाले संदेशो की सोशल मीडिया पर बाढ़ आ गयी है. ऐसे में अब जब हुकुम सिंह की सूची ही सवालों के घेरे में है तब देखना होगा कि भाजपा इस मामले में क्या रुख अपनाती है.

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