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सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर जल्दबाजी में फैसला नहीं : सुरेंद्रन

 Sabahat Vijeta |  2016-05-31 18:52:00.0

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तिरुवनंतपुरम. केरल के मंदिर न्यास मंत्री के. सुरेंद्रन ने मंगलवार को कहा कि राज्य की नई सरकार सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सोच-विचारकर फैसला लेगी, जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। सुरेंद्रन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि वर्तमान में इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई कर रहा है।

उन्होंने कहा, "मामला न्यायालय के समक्ष है और कोई फैसला लेने की हमें जल्दबाजी नहीं है। हम संबंधित सभी पक्षों को विश्वास में लेंगे और तब सोच-विचारकर फैसला लेंगे।"


सर्वोच्च न्यायालय ने फरवरी महीने में दिए अपने फैसले में कहा था कि सिवाय किसी धार्मिक आधार के, कोई मंदिर महिला श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक नहीं लगा सकता।

न्यायालय ने केरल सरकार को उस याचिका पर एक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा था, जिसमें सबरीमाला अयप्पा मंदिर में 10-50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी की प्रथा को चुनौती दी गई थी।

राज्य की पिछली सरकार ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी का बचाव करते हुए कहा था कि श्रद्धालुओं के विश्वास व रिवाज को एक न्यायिक प्रक्रिया से नहीं बदला जा सकता और धार्मिक मामलों में पुजारियों की राय अंतिम होगी।

कांग्रेस के नेतृत्व वाली युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार ने मुद्दे पर पिछली सरकार के रुख का विरोध किया था। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की सरकार ने 2007 में हलफनामे में कहा था, "महिलाओं के एक तबके पर सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर पाबंदी लगाना सही नहीं है।"

अब एलडीएफ की सरकार वापस आ चुकी है, लेकिन वह इस मुद्दे पर अपने पिछले रुख को दोहराने की जल्दबाजी में नहीं है। सुरेंद्रन ने कहा, "यह हो सकता है कि वाम मोर्चे की सरकार (2006-11) ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सहमति जताई हो, लेकिन आज हम 2016 में हैं और हमें लगता है कि जल्दबाजी में कोई फैसला लेने की जरूरत नहीं है।"

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