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बच्चों को भा रही हैं नये कलेवर की किताबें

 Sabahat Vijeta |  2016-10-20 14:21:25.0

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मोतीमहल लान में ‘गागर में सागर’ पुस्तक मेला

लखनऊ। पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डा.कलाम चाहते थे कि हर घर में अच्छी किताबों की लाइब्रेरी हो। पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने कहा था कि अच्छा साहित्य एक स्वस्थ मस्तिष्क के लिए जरूरी खुराक का काम करता है। इन दोनों राष्ट्रप्रधानों की कथनी को चरितार्थ करने की दिशा में अहम भूमिका इन दिनों मोतीमहल लाॅन में चल रहा गागर में सागर राष्ट्रीय पुस्तक मेला बखूबी निभा रहा है। निःशुल्क प्रवेश वाले पुस्तक मेले में जहां व्यस्कों के लिए उनके विषयों का साहित्य मिल रहा है वहीं बच्चों के लिए नये कलेवर की बहुत ही उपयोगी किताबें और सामग्री मिल रही हैं।


मेले में साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों और बच्चों के लिए प्रतिभा प्रदर्शन व प्रतियोगिताओं का क्रम भी बराबर बना हुआ है। ये मेला 23 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगा।


मेले में पहली बार आए प्रथम प्रकाशन के स्टाल पर प्रेरक बाल साहित्य प्रचुर मात्रा और वाजिब दामों में मेले में मिलने वाली न्यूनतम 10 प्रतिशत की छूट पर उपलब्ध है। ग्राॅलियर इंटरनेशनल फिर अपनी आकर्षक बाल पुस्तकों और योजनाओं के साथ मेले में माता-पिताओं की पसंद बना हुआ है। प्रथम प्रकाशन की ही तरह डायमण्ड कामिक्स, एनबीटी, राजा पाकेट बुक्स, दीपशिखा प्रकाशन, वाणी प्रकाशन, पीएम पब्लिकेशन्स, किताबघर, लोकभारती, प्रभात प्रकाशन, सस्ता साहित्य भण्डार, जनचेतना, यूनिकाॅर्न आदि अनेक स्टालों पर उत्कृष्ट साहित्य के साथ ही बच्चों के लिए बहुत रोचक ज्ञानवर्धक किताबें हैं। तिरुमाला साफ्टवेयर के स्टाल पर पाठ्मक्रम सम्बंधी सीडी-डीवीडी हैं तो प्रयोगात्मक उपकरणों के स्टाल भी मेले में मिल जाएंगे।


पुस्तक मेले में आज अतिथियों महेशचन्द्र द्विवेदी व डा.श्याम गुप्त की उपस्थिति, रंगनाथ मिश्र सत्य की अध्यक्षता व डा.योगेश के संचालन में हुई काव्यगोष्ठी में विशाल मिश्र, अविनाश, मुरली मनोहर कपूर, अर्जुन सागर, सरस्वती प्रसाद, मुकेशानन्द, अरविन्द रस्तोगी, अनिल किशोर शुक्ल निडर, अशोक विश्वकर्मा गुंजन, प्रेमशंकर शास्त्री बेताब, डा.विद्यासागर मिश्र, मिजाज लखनवी, महेशप्रसाद पाण्डेय व डा.शिवमंगल सिंह आदि ने ‘जिन्दगी दे रही तलाक मुझे, मौत से अब निकाह कर लेंगे’ जैसी स्वरचित कविताओं का पाठ किया।


भुशुण्डि साहित्य संस्थान की ओर से साहित्यकार का सामाजिक दायित्व विषय पर हुई संगोष्ठी में राजेश राय ने कहा कि जो साहित्य समाज को समर्पित होता है वही कालजयी होता है। संयोजक पद्मकांत शर्मा प्रभात का कहना था कि आज संवेदनाओं को सहेजने और उकेरना ज्यादा महत्व रखता है। कवि पुष्पेन्द्र, अनिल बांके, डा.अम्बरी और मंजुल मंजर आदि ने भी चर्चा में भाग लिया। इससे पहले डा.डी.एस.शुक्ला रचित ‘कही अनकही कहानियां’ पुस्तक का विमोचन हुआ। युवा पण्डाल में बच्चों और नययुवाओं की सर्जनात्मक गतिविधियां संचालित हुईं तो मुख्य मंच पर संत निरंकारी मिशन का शिक्षाप्रद कार्यक्रम हुआ।

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