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बिहार के 'नालंदा सत्तू' का विदेशी भी चखेंगे स्वाद

 Girish Tiwari |  2016-07-23 06:44:29.0

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मनोज पाठक 
बिहारशरीफ, 23 जुलाई. देश और विदेश में मशहूर बिहार के लिट्टी-चोखा के लिट्टी के अंदर भरा या डाले जाने वाले सत्तू का स्वाद अब देश ही नहीं, विदेश के लोग भी चखेंगे।

इस सत्तू की खास विशेषता है कि यह सत्तू किसी मिल या मशीन से नहीं, बल्कि महिलाओं द्वारा जांता (दो गोल पत्थरों के मिलाकर हाथ से अनाज पीसने का औजार) से पीसकर तैयार किया जा रहा है।

नालंदा के एक अधिकारी ने बताया कि गुजरे जमाने की चीज बन चुके जांते से पिसा सत्तू अब देश ही नहीं विदेशों तक ऑनलाइन मंगाए जा सकेंगे।


नालंदा में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति द्वारा संचालित जीविका परियोजना की महिलाएं चना को जांता से पिसकर सत्तू तैयार कर रही हैं। पहले चरण में स्वयं सहायता समूह की 30 महिलाएं इस कार्य में लगी हैं।

अधिकारी ने बताया कि यहां की महिलाओं द्वारा तैयार सत्तू का ब्रांड नाम 'नालंदा सत्तू' रखा गया है। यहां के तैयार सत्तू बिहार के बाजार में तो उपलब्ध होगा ही, विश्व की सबसे बड़ी ऑनलाइन कंपनी 'अमेजन' इसकी मार्केटिंग करेगी। क्षितिज एग्रोटेक ने ऑनलाइन बिक्री के लिए अमेजन से करार किया है।

नालंदा के जिलाधिकारी डॉ़ त्याग राजन एस.एम. ने आईएएनएस को बताया कि नालंदा के जांता से पिसा सत्तू अब देश के ही लोग नहीं विदेश के लोग भी खाएंगे। उन्होंने बताया कि जीविका महिलाओं को दिया गया है प्रशिक्षण पायलट प्रोजेक्ट के तहत चंडी के अनंतपुर गांव में कमन सेंटर खोला गया है।

उन्होंने बताया कि जांता से सत्तू पीसने और पैकैजिंग के लिए जीविका की 150 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। सरकार का मुख्य मकसद महिलाओं को स्थायी रोजगार दिलाकर उनकी आय बढ़ाना है।

नालंदा के उपविकास आयुक्त (डीडीसी) कुंदन कुमार का कहना है कि यहां तैयार सत्तू में गुणवत्ता पर पूरा ध्यान रखा जा रहा है। चने की छंटाई, पिसाई और पैकेजिंग पर बारीकी से काम किया गया है। इस पर विशेष ध्यान रखा जाएगा कि पॉकेट में बंद होने वाला सत्तू अधिक दिनों तक रखने लायक हो।

उन्होंने आईएएनएस को बताया कि प्रारंभ में यह काम 30 महिलाएं कर रही हैं, परंतु यह संख्या जल्द ही 150 तक पहुंच जाएगी।

डीडीसी का मानना है कि जांता में पिसा सत्तू मिल के सत्तू से ज्यादा स्वादिष्ट और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। मिल में सत्तू की पिसाई से उसमें मौजूद पोषक तत्व जल जाते हैं, लेकिन जांता में पिसाई से ऐसा नहीं होता है।

उन्होंने कहा कि जांता चलाने वाली महिलाओं की सेहत भी ठीक रहेगी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) मदद कर रही है। (आईएएनएस)|

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