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प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल, नीतीश ने दी बधाई

 Girish Tiwari |  2016-07-16 11:19:49.0

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पटना, 16 जुलाई. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा बिहार के पर्यटक एवं ऐतिहासिक स्थल नालंदा स्थित प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेषों को विश्व धरोहरों में शामिल कर लिए जाने पर यूनेस्को को धन्यवाद दिया और देश तथा बिहार के लोगों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर लिखा, "राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार की संयुक्त पहल के फलस्वरूप 'नालंदा महाविहार भग्नावशेष' को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किए जाने की सूचना प्राप्त हुई है।"


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उन्होंने आगे लिखा, "इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए यूनेस्को में प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सभी सदस्य देशों को और संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, यूनेस्को में भारतीय दूतावास, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राज्य के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा सभी संबद्घ अधिकारीगणों को उनके प्रयासों के लिए हार्दिक धन्यवाद देता हूं।" नीतीश ने बिहार और देश के लिए इसे गौरव का क्षण बताया।

यूनेस्को ने बिहार के गया जिला स्थित महाबोधि मंदिर के बाद बिहार के दूसरे स्थल नालंदा स्थित प्राचीन विश्वविद्यालय के खंडहरों को विश्व धरोहरों की सूची में शामिल किया है।

यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल होने के बाद विश्व के प्रथम विश्वविद्यालय नालंदा की खोई प्रतिष्ठा वापस मिलने की उम्मीद जगी है।

उधर, नालंदा के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस. मोहनराम ने नालंदा के अवशेषों को अब तक संजोकर कर रखने के लिए क्षेत्र के लोगों को बधाई का पात्र बताया है।

गौरतलब है कि नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 413 ईस्वी में हुई थी और 780 साल तक यह बौद्घ धर्म, दर्शन, चिकित्सा, गणित, वास्तु, धातु और अंतरिक्ष विज्ञान के अध्ययन का विश्व प्रसिद्घ केंद्र बना रहा।

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में करीब 10 हजार विद्यार्थी पढ़ते थे, जिनके लिए 1500 अध्यापक हुआ करते थे। विद्यार्थियों में अधिकांश एशियाई देशों जैसे चीन, कोरिया, जापान से आने वाले बौद्घ भिक्षु होते थे।

इतिहासकारों के मुताबिक, चीनी भिक्षु ह्वेन सांग ने भी अपनी किताबों में नालंदा विश्वविद्यालय की भव्यता का जिक्र किया है।

यूनेस्को विश्व धरोहर समिति द्वारा कहा गया है कि नालंदा विश्वविद्यालय भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है और करीब 800 वर्ष तक शिक्षा का प्रमुख केन्द्र रहा। (आईएएनएस)|

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