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रमजान में मुस्लिम युवक बता रहा है, गाय सिर्फ हिन्दुओं की नहीं, विश्वमाता है

 Anurag Tiwari |  2016-06-18 05:38:19.0

[caption id="attachment_89518" align="aligncenter" width="1690"]Faiz Khan, Varanasi, Cow, Gau-Katha,Kaithi गौ सेवा करते मो. फैज़ खान[/caption]

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

वाराणासी. देश के गंगा-जमनी ताने-बाने की इससे बेहतर मिसाल क्या होगी कि मुसलमानों के पवित्र महीने रमजान  के दौरान एक मुस्लिम युवक हिन्दुओं की पूजनीय गाय के महत्व के बारे में बता रहा हो। जिले के कैथी के पास ढाखा गाँव में गंगा तट पर महादेव धाम में गौकथा का आयोजन चल रहा है। खास बात यह है कि इस गौकथा को सुनने वाले मुस्लिम युवक मोहम्मद फैज़ खान ग्रामीण आर्थिक में गाय के महत्व को बता रहे हैं। वे बता रहे हैं कि किस तरह गाय पालन, जैविक खेती,पर्यावरण संरक्षण और आपसी सूझबूझ से गाँव की स्थिति बेहतर बनाया जाना संभव है।


लाखों की नौकरी छोड़ बता रहे हैं गाय का महत्व

कथा स्थल पर देसी गाय के विधिवत पूजन और आरती के साथ रायपुर छत्तीसगढ़ के गौ भक्त और कथा वाचक मोहम्म्द फैज खान द्वारा गौ कथा का शुभारम्भ किया गया। मोहम्मद खान रायपुर के महाविद्यालय में लेक्चरर के नौकरी छोड़ पिछले तीन सालों से देश भर में घूम-घूम कर लोगों को गोकथा सुना रहे हैं। वे लोगों को गो सेवा और गो पालन के लिए प्रेरित करते हैं।

Gaukatha (4)

रोजा रखते हैं, इफ्तार के साथ शुरू होती है गौ-कथा

रमजान के दिन में नियमपूर्वक रोजा रखते हुए वे दिन की शुरुआत नमाज से करते हैं और शाम को मंदिर परिसर में उपस्थित श्रोताओं को गो कथा सुनाते हैं। कथा के दौरान ही वे खजूर के इफ्तार करते है। इस नावेल का नायक एक मुस्लिम है। यहीं से अपने जीवन में उस किरदार को अपनाने की ठान ली। संत गोपाल मणि से हिमालय में मुलाकात हुई। यहां उनका धेनु मानस ग्रंथ पढ़ा और फिर गोकथा वाचक बन गए।

नावेल से हुए इंस्पायर

फैज़ खान बताते हैं कि उन्हें यह प्रेरणा गिरीश पंकज के उपन्यास ‘एक गाय की आत्मकथा’ से मिली। उन्होंने बताया कि इस उपन्यास और “धेनु मानस ग्रन्थ” के अध्ययन से मुझे गाय की महत्ता का पता चला और मैंने स्वयं को ‘गौवंश’ की रक्षा के लिए समर्पित करने का फैसला करके ‘गौ सेवा’ को ही अपना लक्ष्य बना लिया है।

Gaukatha (3)

जरूर पढ़ते हैं एक वक्त की नमाज

खान बताते हैं कि वे दिन की शुरुआत फजर की नमाज से करते हैं। इसके बाद कभी-कभी गोकथा दिनभर चलती है। इसलिए जब वक्त मिलता है जोहर, असर, मगरीब व ईशा की नमाज पढ़ता हैं। भारत की सनातन संस्कृति के प्रति निष्ठा है। इसी का एक अंग गाय और गंगा है। जिससे हर धर्म का व्यक्ति लाभ उठाता है।

200 से अधिक लेक्चर सिर्फ गाय पर

फैज़ अब तक देश के स्कूलों व अन्य संस्थाओं में गाय की महत्ता पर 200 से अधिक लैक्चर दे चुके हैं वे गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में 15 गऊ कथाओं का आयोजन कर चुके हैं। वे बताते है, ‘‘गाय सिर्फ हिन्दुओं की ही माता नहीं है बल्कि वेदों के अनुसार वह सबकी माता (विश्व माता) है।’’ उन्होंने कहा योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने हमेशा गोदुग्ध पान किया तो उनके मुखारविंद से भगवतगीता प्रस्फुटित हुइ , दुर्भाग्य से आज लोग  शराब का सेवन करते हैं तो मुख से गाली निकलती है। गो  दुग्ध कोई  साधारण पेय  पदार्थ नहीं है साक्षात् अमृत है।

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कई बीमारियों का इलाज है गाय के पास

गाय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि गाय का दूध और घी ही नहीं बल्कि गौ मूत्र भी समान रूप से उपयोगी है। गाय के मूत्र से मधुमेह, जोड़ों के दर्द, दमा, टी।बी। आदि 48 रोगों की औषधि बनती है और बाजार में दवा के रूप में एक लीटर गौ मूत्र का मूल्य 500 रुपए तक है। उन्होंने कहा कि गाय पालन की सदियों से चली आ रही परम्परा को पुनर्स्थापित करने की जुरत है इससे ग्रामीण न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होगा बल्कि स्वास्थ्य के साथ साथ पर्यावरण भी समृद्ध होगा।

कार्यक्रम संयोजक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने बताया कि शनिवार की शाम कथा के पूर्व आपसी प्रेम और भाईचारे को बढाने का सन्देश देने वाला कठपुलती शो की प्रस्तुति की जायेगी।

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