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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक़ मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा

 Sabahat Vijeta |  2016-09-02 18:22:48.0

Supreme-Court-of-India


नई दिल्ली. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल कर दिया है. इस हलफनामे में बोर्ड ने कहा है कि पर्सनल लॉ को सामाजिक सुधार के नाम पर दोबारा से नहीं लिखा जा सकता, क्योंकि पर्सनल लॉ कुरान से लिया गया कानून है.


हलफनामे में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट तलाक की वैधता तय नहीं कर सकता. पहले कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट यह कह चुका है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ कोई कानून नहीं है जिसे चुनौती दी जा सके. यह कुरान से लिया गया है और यह इस्लाम धर्म से संबंधित सांस्कृतिक मुद्दा है.


आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि, तलाक और शादी अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग हैं. एक धर्म के आधार पर दूसरे धर्म के मामले में कोर्ट फैसला नहीं दे सकता. हलफनामे में कहा गया है कि कुरान के मुताबिक तलाक अवांछनीय है लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे दिया जा सकता है.


इस्लाम में यह नियम है कि अगर पति-पत्नी के बीच में ताल्लुकात इतने खराब हो चुके हैं कि सुधार की गुंजाइश नहीं है तो शादी को खत्म कर दिए जाने की व्यवस्था है. तीन तलाक को इजाज़त दी गई है क्योंकि पति सही से निर्णय ले सकता है, वो जल्दबाजी में फैसला नहीं लेते. तीन तलाक तभी इस्तेमाल किया जाता है जब तलाक़ देने वाले के पास पर्याप्त कारन हों.

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