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मानस की अमूल्य धरोहर सौंपने वाले संगीतज्ञ को नगर निगम ने दी पहचान

 Sabahat Vijeta |  2016-12-10 16:11:05.0

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इन्दिरानगर में समर बहादुर सिंह मार्ग का लोकार्पण

महापौर ने की डा.सिंह के नाम पर क्षेत्र में एक चौराहा करने की घोषणा

लखनऊ. सुंदरकाण्ड की मानस चौपाइयों के बीच महापौर डॉ. दिनेश शर्मा ने इन्दिरानगर में इण्डियन ओवरसीज़ बैंक से मानसरोवर चौराहे तक की सड़क के नामकरण डॉ. समर बहादुर सिंह मार्ग का लोकार्पण आज शाम किया. नवाबी शहर के गुणी संगीतज्ञ के नाम पर मैथिलीशरण गुप्त वार्ड के अन्तर्गत आने वाले इस मार्ग के साथ ही डॉ.सिंह के कृतित्व व जीवन परिचय की पट्टिका भी नगर निगम लगाएगा. इसके साथ ही क्षेत्र में एक चौराहे का नाम भी उनके नाम पर होगा. भातखण्डे संगीत महावि़द्यालय से विशारद करने वाले डॉ. समर बहादुर सिंह ने वर्ष 1980 में पहली बार रेडियो के लिए रामचरित मानस की चौपाइयों को स्वरबद्ध व संगीतबद्ध किया था.


भूतनाथ मंदिर के सामने आयोजित लोकार्पण समारोह में उक्त घोषणा के साथ ही महापौर डॉ. दिनेश शर्मा ने डॉ. सिंह को छोटे तुलसी की संज्ञा करते हुए कहा कि संगीत और गोस्वामी तुलसीदास रचित मानस की चौपाईयां दोनों ही मनुष्य का मन बदलने का साधन हैं. डॉ. सिंह ने इनके संगम का दुरूह कार्य समाज के लिए किया. जो लोग समाज के लिए काम करते हैं उनके जाने के बाद उनका स्मरण होता है. उनके नाम पर क्षेत्र में किसी एक चौराहे का नामकरण होगा जो परिवारीजन और नगर निगम के सोजन्य से तय कर लिया जाएगा. डॉ. शर्मा ने रैनबसेरे और अलाव इत्यादि की समुचित व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि क्षेत्र में वेण्डिंग पालिसी सही तरह से लागू हो पर अतिक्रमण न हो और इस तरह स्वच्छ लखनऊ की परिकल्पना साकार हो. इससे पहले डॉ. सिंह की पुत्रवधू आभा सिंह ने अपने श्वसुर डॉ. सिंह का जीवनवृत्त रखते हुए उनके नाम पर चौराहा करने और प्रतिमा लगाने की मांग सभी अतिथियों व गणमान्य नागरिकों का स्वागत करते हुए उठाई. नगर आयुक्त उदयराज सिंह ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में और भी विकास कार्य कराए जाएंगे.

इस अवसर पर डॉ. सिंह के परिजनों में पुत्र वाईपी सिंह, पुत्रियां ऊषा सिंह, प्रतिमा सिंह, दामाद आर.के.सिंह व प्रो.आर.पी.सिंह, मीनाक्षी सिंह, एडीशनल डीजी राजीव कृष्णा, भूतनाथ मंदिर के महंत स्वामी बटुकनाथ, पूर्व पार्षद दिलीप श्रीवास्तव नगर निगम के अभियंता-अधिकारी, प्रमोद सिंह राजन आदि अन्य वार्डों के पार्षद और गणमान्य नागरिक उपस्थिति थे.

विविध भारती की सुबह डॉ. सिंह की संगीतबद्ध चौपाईयों से


लखनऊ के भातखंडे संगीत महाविद्यालय से संगीत विशारद करने वाले संगीतज्ञ, प्रख्यात लेखक और इतिहासकार डॉ समर बहादुर सिंह द्वारा रेडियो के लिए स्वरबद्ध-संगीतबद्ध मानस की चौपाइयों से आज तक हर सुबह विविध भारती सेवा की शुरुआत इन चौपाइयों के प्रसारण के साथ होती है. अगस्त 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी इस अमूल्य धरोहर को डिजिटल स्वरूप प्रदान किया. आल इंडिया रेडियो में एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए संगीत के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किये. वे यहां प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के सचिव भी रहे. बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. समर बहादुर सिंह का जन्म 15 जून 1919 को जौनपुर में हुआ था. उनके करियर की शुरुआत एक प्रवक्ता के तौर पर हुई और एक लंबे प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर कार्य करने के उपरांत वर्ष 1997 में आल इंडिया रेडियो मुम्बई से वे वरिष्ठ उपनिदेशक के पद से रिटायर हुए. सन् 1957 में उनका चयन नेशनल डिफेन्स अकादमी खडगवासला, पुणे में लेक्चर्र ऑफ म्यूजिक एंड हिस्ट्री के पद पर हुआ था. एक वर्ष पश्चात उनका चयन यूपीएससी के द्वारा क्लास वन अफसर के पद पर हुआ और वे आल इंडिया रेडियो में नियुक्त हुए। यहाँ रहते हुए उन्होंने संगीत के क्षेत्र में जो महत्वपूर्ण कार्य किये और कला की सेवा की. उन्होंने अब्दुलरहीम खानखाना के जीवन एवं कृतियों के समीक्षात्मक अध्ययन विषय पर अपनी पीएचडी की. उनकी प्रसिद्ध किताबों में कुतुब से ताज तक, अतीत के आईने में, सफलता कैसे मिले आदि हैं. वर्ष 2007 में उनका निधन हुआ.

उनके द्वारा शुरू किये गए समाजसेवा कार्य आज भी उनकी याद में बने रणसमर चेरिटेबल ट्रस्ट के अंतर्गत जारी हैं. ये ट्रस्ट गरीब बच्चो और महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और उनके अधिकारों के लिए कार्य कर रहा है. उत्तर प्रदेश के कई गांव देहातों की पीड़ित और गरीब महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए ट्रस्ट के कार्यकर्ता दिन रात लगे रहते हैं. ये ट्रस्ट उनकी बहू मुम्बई हाईकोर्ट की प्रतिष्ठित वकील श्रीमती आभा सिंह की देखरेख में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है.

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