Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

क्या पहले योगी से अलग दिखेंगे सीएम योगी ?

 Utkarsh Sinha |  2017-03-19 09:03:33.0

क्या पहले योगी से अलग दिखेंगे सीएम योगी ?

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. 18 मार्च का दिन गोरखपुर जिले के लिए जितना ख़ास रखा उससे ज्यादा ख़ास उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के लिए रहा. इस जिले के दो लोग एक दिन दो राज्यों के मुख्यमंत्री बन गए. शनिवार को उत्तराखंड में त्रिदेव सिंह रावत ने मुख्यमंत्री की शपथ ली। इसी दिन उत्तर प्रदेश के लिए उसी उत्तराखंड के सपूत योगी आदित्यनाथ के नाम की घोषणा मुख्यमंत्री पद के लिए की गयी। यह भी संयोग ही कहा जाएगा कि ये दोनों नेता एक ही बिरादरी से आते हैं योगी आदित्यनाथ का मूल नाम अजय सिंह बिष्ट है। इसे संयोग ही कहा जाएगा की उत्तर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के दोनों घोषित नाम विधान सभा के सदस्य नहीं हैं।

आज के आदित्यनाथ वही हैं जिनका जन्म पौड़ी जिले के पंचुरी गांव में नंद सिंह बिष्ट के घर पांच जून 1972 को हुआ था। अजय सिंहबिष्ट कालेज का चुनाव हारने और अपने कमरे में हुयी चोरी से दुखी हो कर जब अपने मामा और गोरखनाथ पीठ के महंत अवैद्यनाथ के पास पहुंचे तब उन्हें योगी आदित्यनाथ के नाम से जाना जाने लगा. नाथपंथ के विश्व प्रसिद्ध मठ श्री गोरक्षनाथ मंदिर गोरखपुर के पावन परिसर में शिव गोरक्ष महायोगी गोरखनाथ जी के परिसर में 15 फरवरी सन् 1994 को तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ ने अपने उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ का दीक्षाभिषेक सम्पन्न किया और जब 14 सितंबर 2015 महंत अवेद्यनाथ ब्रह्मलीन हुए तो फिर आदित्यनाथ योगी से महंत बन गए.1998 में अवैद्यनाथ जी ने योगी को अपनी राजनितिक विरासत सौंप दीठी और तब से अब तक योगी लोकसभा का चुनाव लगातार जीतते रहे.

योगी के जीवन यात्रा की कहानी किसी फ़िल्मी कथानक से कम नहीं है। एक गाव से निकल कर पहले योगी फिर सांसद और अंत में यूपी के सीएम तक की कुर्सी तक पहुँच गए. योगी की कर्मभूमि उत्तर प्रदेश का सबसे पूर्वी हिस्सा है, जिसमे गोरखपुर मंडल के देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर,महाराजगंज, बस्ती मंडल के बस्ती,संतकबीर नगर, सिद्धार्थनगर और आज़मगढ़ मंडल के आज़मगढ़, बलिया,मऊ जिले शामिल हैं. महंत दिग्विजय नाथ के समय से कई दशको से मठ आधारित ये राजनीति अपने शुरुवाती दिनों के सोफ्ट हिंदुत्व से उग्र हिन्दुत्ववादी हो चुकी है तो इसका श्रेय योगी आदित्य नाथ के आक्रामक स्वाभाव को ही जाता है.

बतौर सांसद योगी ने जापानी इंसेफलाइटिस से बचाव और उसके उपचार के लिए उलेखनीय प्रयास किये, उसके अलावा गोरखपुर में सफाई व्यवस्था व् राप्ती नदी पर बांध बनवाने, गोरखपुर में एम्स जैसे कई विकास के कार्य कराए. सदियों से श्रद्धा का केंद्र रहने वाले गोरखनाथ पीठ के महंत होने की वजह से वे कभी भी मतदाता के सामने हाथ नहीं जोड़ते, उल्टे मतदाता उनके पैर छूकर आर्शीवाद मांगते हैं. सांसद होने के नाते कोई समस्या बयान करता तो वे सरकारी प्रक्रिया का इंतज़ार किये बिना तुरंत संबंधित अधिकारी से बात कर समस्या का अपने स्तर पर निपटारा कर देते है. कुछ वर्ष पहले एक माफिया डॉन के द्वारा उनके एक मतदाता के मकान पर कब्जे से क्षुब्द, योगी ने सीधे ही उस मकान पर पहुँच अपने समर्थको के द्वारा उसे कब्जे से मुक्त करवा दिया ऐसे कई और मामलें है जो उनकी धार्मिक रहनुमाई से रोबिनहुड तक के सफ़र की कथा बयान करती है।

राजनीति के मैदान में आते ही योगी आदित्यनाथ ने सियासत की दूसरी डगर भी पकड़ ली, उन्होंने हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया और गोरखपुर में रहना है तो योगी योगी कहना है के नारे लगाने वाले योगी सेवक शहर में आम दिखने लगे. कट्टर हिंदुत्व की राह पर चलते हुए उन्होंने कई बार विवादित बयान दिए। योगी विवादों में बने रहे, लेकिन उनकी ताकत लगातार बढ़ती गई। 2007 में गोरखपुर में दंगे हुए तो योगी आदित्यनाथ को मुख्य आरोपी बनाया गया, गिरफ्तारी हुई और इस पर कोहराम भी मचा। योगी के खिलाफ कई अपराधिक मुकदमे भी दर्ज हुए। योगी आदित्यनाथ की हैसियत ऐसी बन गई कि जहां वो खड़े होते, सभा शुरू हो जाती, वो जो बोल देते हैं, उनके समर्थकों के लिए वो कानून हो जाता है. आदित्यनाथ को गोरखपुर दंगों के दौरान तब गिरफ्तार किए गए जब मुस्लिम त्यौहार मोहर्रम के दौरान फायरिंग में एक हिन्दू युवा की जान चली गई थी। डीएम ने बताया की वह बुरी तरह जख्मी है, तब अधिकारियों ने योगी को उस जगह जाने से मना कर दिया, लेकिन आदित्यनाथ उस जगह पर जाने के लिए अड़ गए। तब उन्होंने शहर में लगे कर्फ्यू को हटाने की मांग की। अगले दिन उन्होंने शहर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करने की घोषणा की, लेकिन जिलाधिकारी ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया। आदित्यनाथ ने भी इसकी चिंता नहीं की और हजारों समर्थकों के साथ अपनी गिरफ्तारी दी। उनपर कार्यवाही का असर हुआ और मुंबई-गोरखपुर गोदान एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे फूंक दिए गए, जिसका आरोप उनके संगठन हिन्दू युवा वाहिनी पर लगा। यह दंगे पूर्वी उत्तर प्रदेश के छह जिलों और तीन मंडलों में भी फैल गए। उनकी गिरफ्तारी के अगले दिन जिलाधिकारी और पुलिस का तबादला हो गया।

हालाकि इस मामले में जेल जाने के बाद जब योगी संसद में अपनी जान के खतरे को बयान करते हुए रोये तब भी यह बड़ी खबर बनी थी.

7 सितंबर 2008 को सांसद योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ़ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ था। इस हमले में वे बाल-बाल बचे थे, यह हमला इतना बड़ा था कि सौ से अधिक वाहनों को हमलावरों ने घेर लिया और लोगों को लहुलुहान कर दिया।

योगी के विवादित बयान
1- दादरी हत्याकांड पर योगी ने कहा यूपी कैबिनेट के मंत्री (आजम खान) ने जिस तरह यूएन जाने की बात कही है, उन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए। आज ही मैंने पढ़ा कि अखलाख पाकिस्तान गया था और उसके बाद से उनकी गतिविधियां बदल गई थीं। क्या सरकार ने ये जानने की कभी कोशिश की कि ये व्यक्ति पाकिस्तान क्यों गया था। आज उसे महिमामंडित किया जा रहा है।
2- अगस्त 2014 में लव जेहाद' को लेकर योगी का एक वीडियो सामने आया था, जिसे लेकर काफी हल्ला मचा था।
3- फरवरी 2015 में योगी आदित्यनाथ ने विवादित बयान देते हुए कहा था कि अगर उन्हें अनुमति मिले तो वो देश के सभी मस्जिदों के अंदर गौरी-गणेश की मूर्ति स्थापित करवा देंगे। उन्होंने कहा था कि आर्यावर्त ने आर्य बनाए, हिंदुस्तान में हम हिंदू बना देंगे। पूरी दुनिया में भगवा झंडा फहरा देंगे। मक्का में गैर मुस्लिम नहीं जा सकता है, वेटिकन सिटी में गैर ईसाई नहीं जा सकता है। हमारे यहां हर कोई आ सकता है।
4- योग के ऊपर भी विवादित बयान देते हुए योगी आदित्‍यनाथ ने कहा था कि जो लोग योग का विरोध कर रहे हैं उन्‍हें भारत छोड़ देना चाहिए। उन्होंने ने यहां तक कहा कि लोग सूर्य नमस्‍कार को नहीं मानते उन्‍हें समुद्र में डूब जाना चाहिए।
5- अगस्त 2015 में योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि मुस्लिमों के बीच 'उच्च' प्रजनन दर से जनसंख्या असंतुलन हो सकता है।
6- अप्रैल 2015 में योगी ने हरिद्वार में विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल 'हर की पौड़ी' पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, जिसके बाद काफी बवाल मचा था।

अब यही योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और संविधान की शपथ से बंधे हुए भी. योगी अब कितना बदलते हैं यह भविष्य बताएगा. विपक्ष के नेता रहते हुए आक्रामकता सत्ता सम्हालने के बाद विनम्रता में कितनी बदलती है यह भी देखने लायक बात होगी. योगी का अतीत भी उनके पीछे होगा और उन बयानों को समर्थन देने वाले समर्थको का दबाव भी. योगी अपने पूर्व के बयानों से यदि अलग हो जाते हैं तो कट्टर समर्थक निराश होंगे और यदि योगी वे सारी बाते जो वे बोलते रहे हैं उसे ही हकीकत बनाने में लगेंगे तो यूपी का माहौल बिगड़ेगा. अब यह संतुलन योगी को बनाना है और इसके साथ ही उन्हें अपने स्वभावतः उग्र सेना को भी नियंत्रित करना होगा तभी सूबे में कानून व्यवस्था बनाने की उनकी प्राथमिकता पूरी हो सकेगी.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top