हिंदुत्व एजेंडे के साथ अगड़े, पिछड़ों को साधने की कोशिश है यूपी की नयी तिकड़ी

 2017-03-18 14:39:17.0

हिंदुत्व एजेंडे के साथ अगड़े, पिछड़ों को साधने की कोशिश है यूपी की नयी तिकड़ी

उत्कर्ष सिन्हा 

लखनऊ : योगी आदित्यनाथ को यूपी का मुख्यमंत्री बना कर भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनावो के लिए अपना एजेंडा साफ़ कर दिया है. यूपी में जातीयता की जटिलता को साधने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 17वीं विधानसभा के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा योगी आदित्य नाथ और प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य तथा लखनऊ के मेयर व पार्टी के उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा को उप मुख्यमंत्री बनाकर पूरा किया. भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में अपने जिस एजेंडे को लेकर चुनाव मैदान में उतरी थी और जिसका जनता ने भरपूर स्वागत किया, उसको आज बीजेपी ने प्रदेश के प्रतिनिधित्व में कायम रखा है. अभी संपन्न हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अगड़ों के साथ ही साथ पिछड़ा वर्ग के मतों में अपनी पैठ बनाने में कामयाब रही थी और यही वजह रही कि आज उस वर्ग को शासन सत्ता में भी प्रतिनिधित्व दिया गया है. भाजपा ने एक ठाकुर, एक ब्राह्मण और एक पिछड़ा चेहरा बनाकर आगे के लिए भी एक सन्देश देने और अपने मिले समर्थन को जोड़े रखने का काम किया है. बीजेपी के इस कदम से उसके  2019 के एजेंडे को और मजबूती भी मिलेगी.

कट्टर हिंदूवादी चेहरे के रूप में चर्चित योगी आदित्यनाथ को बीजेपी ने मुख्यमंत्री बनाकर अपने हिंदूवादी विचारधारा को कायम रखा है.  महज 26 वर्ष की उम्र में सांसद बनने वाले योगी आदित्य नाथ उत्तराखंड के पौड़ी जिले के बंचुरी गाँव के एक साधारण परिवार में पैदा हुए जिनका नाम अजय सिंह बिष्ट है. इनका आध्यात्म और राजनीति से जुड़ाव शुरू से ही रहा था. जिसके चलते 15फरवरी 1994 को गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी बनाया था. 1998 में गोरखपुर से पहली बार सांसद बने योगी लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. 2014 में पांचवी बार योगी बीजेपी से सांसद बने मगर पार्टी ने जब उन्हें केंद्र में मंत्री नहीं बनाया तब योगी समर्थको ने पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाये थे, राजनीति के मैदान में आते ही योगी आदित्यनाथ ने सियासत की अपनी हिंदुत्व की राह को धार देने के लिए हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया और धर्म परिवर्तन के खिलाफ मुहिम छेड़ अपने हिंदूवादी सोच को धार दी थी.

दूसरी तरफ लखनऊ के दो बार के मेयर दिनेश शर्मा को भाजपा ने प्रदेश का उप मुख्यमंत्री बनाकर ब्राह्मण वर्ग के मतों को अपने साथ जोड़े रखने का काम किया है. दिनेश शर्मा पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात के प्रभारी भी हैं. दिनेश शर्मा की समाज के हर वर्ग और धर्म में लोकप्रियता और उनकी संगठन की क्षमता ने ही उनको लखनऊ जैसे शहर जहां हर वर्ग और हर धर्म के लोग बहुतायत में हैं, का दुबारा मेयर चुना. उनकी इसी संगठन की क्षमता के चलते पार्टी ने उनको उपाध्यक्ष पद दिया. फिलहाल उत्तर प्रदेश में मिले इतने बड़े जन समर्थन को संभालने के लिए पार्टी ने श्री शर्मा को उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा कर 325 विधायकों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का काम कर सकती है.

मिशन 2017 के लिए भाजपा को विजय का सेहरा पहनाने में दलित व पिछड़ों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. लोकसभा चुनावो के बाद जब पार्टी ने मिशन यूपी के लिए पिछड़े वर्ग को साधने की कोशिश की तब लगभग अनजान से चेहरे केशव मौर्या को प्रदेश अध्यक्ष की कमान दे दी गई. केशव का राजनीती में उदय कुल 5 वर्षो का ही है. 2012 में कौशाम्बी के सिराथू से विधायक बने केशव को लोकसभा चुनावो में फूलपुर से सांसद का चुनाव लड़ाया गया और अब उपमुख्यमंत्री बनाया. केशव ने पिछडो को जोड़ने में खूब मेहनत की और अपने काम को बखूबी अंजाम देते हुए पार्टी को 2017 में एक मजबूत विजय दिलाने में कामयाब रहे. पार्टी ने अपने इन्हीं मतों को एकजुट रखने के लिए केशव को उपमुख्यमंत्री बनाया और अपने आगे के मिशन को मजबूत किया.            

इन तीन प्रमुख पदों पर पार्टी ने अगड़ो और पिछडो को भरपूर प्रतिनिधित्व दिया है और अब यही यही संतुलन मंत्रिमंडल में भी दिखेगा. तीनो  प्रमुख पदों पर अवध और पूर्वांचल को प्रतिनिधित्व देने के बाद पार्टी के लिए पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड को प्रतिनिधित्व देने की चुनौती भी रहेगी. 
 
 

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