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देश का संविधान बदलना चाहती है बीजेपी : राज रतन अम्बेडकर

 shabahat |  2017-02-10 14:52:42.0

देश का संविधान बदलना चाहती है बीजेपी : राज रतन अम्बेडकर

शबाहत हुसैन विजेता

लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश की सत्ता हासिल करने में कोई इंटरेस्ट नहीं है. वह यह चुनाव सिर्फ इसलिये जीतना चाहती है ताकि राज्यसभा में उसे बहुमत हासिल हो जाये. राज्यसभा में बहुमत लाकर वह देश का संविधान बदलना चाहती है. उसने 42 पेज का संविधान बना भी लिया है. संविधान बदलकर वह देश को संघ की विचारधारा के अनुसार चलाना चाहती है. भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के पौत्र राज रतन अम्बेडकर ने आज यह खुलासा तहलका न्यूज़ से एक खास मुलाक़ात में किया. वह आज लखनऊ में हैं. कल वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस विधानसभा चुनाव में बौद्धिष्ट सोसायटी ऑफ़ इंडिया का समर्थन देंगे. वह चाहते हैं कि यूपी में गठबंधन की सरकार बने और बीजेपी और बीएसपी दोनों सत्ता की खुशबू से महरूम रह जाएँ.

उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी राज सत्ता के ऊपर धर्म सत्ता को काबिज़ करने की कोशिश कर रही है. योगी आदित्यनाथ जैसे लोगों को आगे लाने का काम किया जा रहा है. हमारे अधिकारों में कटौती करने के लिये विधानसभा के ऊपर रक्षा सभा और लोक सभा के ऊपर गुरु सभा बनाई गई है. आरएसएस तो पहले से ही संविधान को नहीं मानती. वह चाहती है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाये. उनका कहना है कि जब भेदभाव धर्म के आधार पर किया जाता है तो फिर आरक्षण आर्थिक आधार पर कैसे किया जा सकता है.

राज रतन अम्बेडकर ने कहा कि देश को बदलने की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर गुज़रता है. यूपी में अखिलेश यादव ने बहुत काम किया है. कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद वह पहले से ज्यादा मज़बूत हुए हैं और उनकी सरकार की वापसी तय हो गई है. यहाँ बीजेपी का वही हश्र होने जा रहा है जो बिहार में हुआ था. उन्होंने कहा कि अखिलेश युवा हैं. यूपी को अच्छी तरह से चला रहे हैं. उन्होंने इतना काम किया है इसी वजह से प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री को चैलेन्ज करना पड़ रहा है. हर मीटिंग में प्रधानमंत्री सीएम को चैलेन्ज कर रहे हैं.

उनसे यह पूछने पर कि मायावती दलितों के नाम पर सरकार बनाती हैं. उन्होंने डॉ. अम्बेडकर की स्मृतियों को जीवंत किया हैं लेकिन आप अखिलेश यादव का समर्थन कर रहे हैं. इसकी क्या वजह है. उन्होंने कहा कि मायावती ने परिवर्तन चौक बनाया. वहां से कौन सा परिवर्तन हो रहा है. वहां स्कूल खोला होता तो शायद बाबा साहब का सपना पूरा होता. उन्होंने तो हाथी को ही ब्रह्मा-विष्णु और महेश समझ लिया है. उसे उसी तरह से पेश कर रही हैं.

उन्हें इस बात पर भी एतराज़ है कि मायावती ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के बराबर में अपने माँ-बाप के पुतले खड़े कर दिये हैं. क्या उनका योगदान बाबा साहब के बराबर है. उन्होंने कहा कि बाबा साहब चाहते थे कि बच्चे शिक्षा प्राप्त करें लेकिन बच्चों से शिक्षा का अधिकार छीना जा रहा है. बाबा साहब ने स्कूल को अपनी संस्था माना था और स्कूल छोड़कर हर चीज़ बनाई जा रही है. बाबा साहब ने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था. बौद्धों की गणना पहले हिन्दुओं में की गई, बाद में जब अल्पसंख्यक आयोग बना तब उन्हें अल्पसंख्यक मान लिया गया. यह सारी योजनायें हमसे रिज़र्वेशन छीनने के लिये हैं.

राज रतन अम्बेडकर ने कहा कि बाबा साहब का निधन हुआ तो उनके पास एक भी रुपया नहीं था. बीएसपी के नाम पर 400 करोड़ का घोटाला है. उन्होंने कहा कि बीजेपी और बीएसपी में सिर्फ नाम का ही फर्क है. दोनों हैं एक जैसे ही. दोनों का मकसद किसी भी तरह से सत्ता हासिल करना है. दोनों ही बच्चों को स्कूल से दूर ले जा रहे हैं. कहने को बीजेपी ने राईट तो फ्री एजुकेशन एक्ट बनाया लेकिन इसमें आठवीं तक के बच्चों को फेल करने पर रोक लगा दी. जब बच्चे को फेल होने का डर नहीं होगा तो वह पढ़ाई क्यों करेगा. यही वजह है कि पांचवीं क्लास के बच्चे को दो का पहाड़ा नहीं आता है. बारहवीं क्लास के बाद नीट का एग्जाम रख दिया है, इसमें 750 नम्बर का एग्जाम देना होता है. जो बच्चा फेल न होने वाले सिस्टम से पढ़कर आया है वह नीट का एग्जाम कैसे पास कर पायेगा. इससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि सरकार देश में अफसर नहीं लेबर बनाने का काम कर रही है. बच्चों को शिक्षा से दूर कर बाबा साहब के सपनों को नष्ट करने का काम चल रहा है.

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